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लोकसभा चुनाव 2019: नाराज कर्मचारी बिगाड़ेंगे चुनावी समीकरण, पंजाब के बराबर वेतनमान बड़ा मुद्दा

Mon, 01 Apr 2019 04:30 PM IST
खुशबू गोयल यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Mon, 01 Apr 2019 04:30 PM IST
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Lok Sabha Elections 2019, Government Employees May Effect Results in Haryana
manohar lal khattar
हरियाणा में लोकसभा चुनाव के दौरान कर्मचारी वर्ग बड़ा फैक्टर रहेगा। लगभग तीन लाख पक्के और डेढ़ लाख कच्चे कर्मचारियों में नाराज कर्मी राजनीतिक दलों का चुनावी समीकरण बिगाड़ने को तैयार हैं। सत्ताधारी दल से अधिकांश कर्मचारी खुश नहीं हैं। भाजपा के सत्ता संभालने के बाद से ही कर्मचारियों और सरकार के बीच अनेक मुद्दों पर टकराव चला आ रहा है। परियोजना कर्मचारियों के आंदोलन प्रदेश में आम हो चुके हैं।
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ओल्ड पेंशन स्कीम 2003 के बाद सरकारी नौकरी पाने वाले कर्मचारियों के बीच बड़ा मुद्दा है। पंजाब समान वेतन और एस्मा के तहत कार्रवाई ने आग में घी डालने का काम किया है। ओल्ड पेंशन स्कीम तत्कालीन वाजपेयी सरकार में बंद की गई थी। पूरे देश की तरह ही हरियाणा में भी कर्मचारियों ने भाजपा सरकार से ही ओल्ड पेंशन स्कीम लागू करने की मांग पुरजोर तरीके से उठाई। हरियाणा में सवा लाख कर्मचारी ओल्ड पेंशन स्कीम बंद होने से प्रभावित हैं।
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2014 के विधानसभा चुनाव में भाजपा कर्मचारियों के जिन मुद्दों को घोषणा पत्र में शामिल कर सत्ता में आई थी, उन्हें पूरा नहीं कर पाई है। इसलिए अब अधूरे वादे लोकसभा चुनाव में भाजपा के गले की फांस बनने जा रहे हैं। कर्मचारी जहां भाजपा से चुनावी वादों को पूरा न करने का जवाब मांग रहे हैं, वहीं विपक्षी दलों को अपना रुख साफ करने के लिए दो टूक कहा है। कर्मचारी वर्ग लोकसभा चुनाव में अपनी पूरी तसल्ली होने के बाद ही वोट किसे देना है, ये तय करेगा।
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भाजपा के लिए जीत आसान नहीं होगी

हरियाणा में भाजपा के लिए लोकसभा की सभी दस जीतों पर जीत का परचम लहराना आसान नहीं होगा। पंजाब के समान वेतनमान कर्मचारियों को अभी तक नहीं मिल पाया है। ये बीते चुनाव में भी मुद्दा था। सरकार ने इसे देने का वादा किया, लेकिन उस पर खरा नहीं उतरी। पक्के कर्मचारियों के वेतन में इसके लागू होने से हजारों रुपये की बढ़ोतरी होनी थी।

एचआरए 2016 से देय है, भाजपा सरकार इसे भी केंद्रीय वेतनमान में बढ़ोतरी अनुसार प्रदान नहीं कर पाई है। कई मौकों पर एचआरए संशोधित करने की घोषणाएं तो हुईं, लेकिन हकीकत नहीं बनी। एक्सग्रेसिया स्कीम लागू करने की घोषणा सरकार ने विधानसभा में तो कर दी पर अधिसूचना आज तक जारी नहीं की। जिससे भी कर्मचारी निराश हैं।

चुनाव से ठीक पहले तक जारी रहे आंदोलन
प्रदेश में अनुबंध कर्मचारी लंबे समय से मांगों को लेकर आंदोलन करते आ रहे हैं। बिजली विभाग, नगर निकायों, 51 हजार आंगनबाड़ी कर्मचारी, ग्रामीण चौकीदार, सफाई कर्मी, रोडवेज व एनएचएम कर्मचारी चुनाव से ठीक पहले तक सड़कों पर उतरते रहे। एयर स्ट्राइक के दौरान इन्होंने अपने आंदोलनों को विराम दिया। ये न्यूनतम वेतन, नियमितीकरण, निजीकरण, वेतन बढ़ोतरी व सुरक्षा की मांग कर रहे हैं।

 

ये मुद्दे भाजपा की राह में रोड़ा

. रोडवेज की 18 दिन की हड़ताल के दौरान एस्मा के तहत की गई कार्रवाई वापस न लेने से सरकारी कर्मचारियों में रोष
. ठेकेदारी प्रथा वादों अनुसार बंद नहीं की। ठेका कर्मियों को रेगुलर नहीं कर पाए
. हरियाणा के कर्मचारी संगठनों के साथ समय-समय पर हुए समझौते लागू नहीं किए
. जनसेवा के विभागों में निजीकरण को बढ़ावा देने से कर्मचारी वर्ग में नाराजगी
. रोडवेज बेड़ा बढ़ाने के बजाय किलोमीटर स्कीम लागू करने से असंतोष
. वर्क लोड अनुसार सरकारी विभागों में पदों का पुनर्गठन न होना
. वास्तविक खर्च पर आधारित मेडिकल कैशलेस स्कीम लागू न करना
. बढ़ती उम्र के हिसाब से पेंशन में बढ़ोतरी का प्रावधान नहीं

झेलनी पड़ेगी भाजपा को नाराजगी

हरियाणा में कर्मचारी आंदोलनों की अगुवाई मुख्य रूप से सर्व कर्मचारी संघ ही करता है। इसके बाद हरियाणा कर्मचारी महासंघ है। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रधान धर्मबीर फौगाट, महासचिव सुभाष लांबा, इंद्र सिंह बधाना ने कहा कि कर्मचारियों की मांगें पूरी न करने की नाराजगी भाजपा को चुनाव में झेलनी पड़ेगी।

भाजपा सरकार ने एक तो कर्मचारियों के साथ किए वादे पूरा नहीं किए, दूसरा जब कर्मचारियों ने आवाज उठाई तो उसे एस्मा लगाकर दबाने का प्रयास किया गया। सरकार व विपक्ष भविष्य को लेकर कर्मचारियों के प्रति अपनी नीति स्पष्ट करे। महासंघ के नेता वीरेंद्र धनखड़ कहते हैं कि सरकार ने कर्मचारियों का उत्पीड़न करने का काम किया है। समझौते के बावजूद वादे नहीं निभाए।
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