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लोकसभा चुनाव 2019: पंजाब में विधानसभा चुनाव का प्रदर्शन दोहराना होगी कांग्रेस की बड़ी चुनौती

Sun, 24 Mar 2019 12:41 PM IST
खुशबू गोयल अशोक नीर, अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
अशोक नीर, अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब) Published by: खुशबू गोयल Updated Sun, 24 Mar 2019 12:41 PM IST
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Lok Sabha Elections 2019, Challange for Punjab Congress to Repeat Assembly Election Performance
कैप्टन अमरिंदर सिंह - फोटो : फाइल फोटो
विधानसभा चुनाव में नौ विधानसभा सीटों में से आठ पर बड़ी जीत हासिल करने वाले कांग्रेस के विधायकों के सामने लोकसभा चुनाव में अपने प्रदर्शन को दोहराने की कड़ी चुनौती होगी। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार चुनावी वायदे पूरे नहीं कर पा रही। बेरोजगारी और सरकारी की तरफ से मोबाइल फोन बांटने में हो रही देरी ने विधायकों की चिंताओं को बढ़ा दिया है।
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अमृतसर पूर्वी विधानसभा हलके से लगभग 40 हजार से अधिक मतों से जीतने वाले मंत्री नवजोत सिद्धू के लिए भी इस प्रदर्शन को दोहराना आसान नहीं होगा। 2018 के दशहरा दहन कार्यक्रम में इस विधानसभा हलके में पड़ते जौड़ा फाटक में हुए रेल हादसे में मारे गए लोगों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये सिद्धू ने दिए। लेकिन उसके बाद उनकी सुध न लेने पर उन्हें विरोध का सामना करना पड़ेगा।
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इस हादसे के बाद सिद्धू ने मारे गए लोगों के बच्चों को गोद लेने का वायदा किया था। छह महीने बीत जाने के बाद सिद्धू न पीड़ित परिवारों से मिले और न ही वायदे पूरे किए। लोकसभा चुनाव में विपक्ष इसे अमृतसर संसदीय क्षेत्र का चुनावी मुद्दा बनाएगा। सिद्धू अपने विधान सभा हलके से लगभग दस किलोमीटर की दूरी पर रहते हैं। स्लम एरिया में रहने वाले लोगों का सिद्धू से संपर्क टूट चुका है, जिसका राजनीतिक नुकसान होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
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भगतावाला कूड़े की डंपिंग के मुद्दे पर अकाली दल से इस्तीफा देकर कांग्रेस की टिकट पर चुनाव जीतने वाले साउथ विधानसभा हलका के विधायक इंदरबीर सिंह बुलारिया भी इस समस्या का हल नहीं कर पाए। लोगों ने कूड़े के डंप को यहां से कहीं और शिफ्ट कराने के लिए कई बार संघर्ष किया। बुलारिया ने अकाली दल के शासन में लोगों के साथ संघर्ष में हिस्सा लिया था।

दो साल बीत गए, लेकिन बुलारिया इस डंप को हटाने के लिए केवल एक-दो मशीनरी का ही जुगाड़ कर सके हैं। बुलारिया डंप को शिफ्ट करने लिए सिद्धू को यहां लेकर भी आए हैं, लेकिन डंप के लिए नई जमीन खरीदने की मांग पर सिद्धू की खामोशी लोकसभा चुनाव में बुलारिया के विधानसभा प्रदर्शन को दोहराने में मुश्किल पैदा करेगी।

अजनाला विधानसभा से चुनाव जीतने वाले हरप्रताप सिंह अजनाला भी सीमावर्ती गांवों के किसानों की समस्या का हल नहीं कर सके हैं। कैप्टन सरकार ने किसानों की कर्ज माफी के बड़े दावे किए हैं, लेकिन बॉर्डर के साथ-साथ खेती करते किसानों की समस्याएं अलग हैं। सीमा पार खेती करने में आ रही मुश्किलों के हल के लिए अजनाला ने बीएसएफ व किसानों के बीच तालमेल करवाने के प्रयास कभी नहीं किए।

सीमावर्ती इलाकों में सेहत सुविधाओं का अभाव है। सरकारी स्कूलों की स्थिति में कोई सुधार नहीं है। हरप्रताप को इस चुनाव में अकाली दल से अलग हुए डॉ. रतन सिंह अजनाला परिवार के बागी होने का कुछ लाभ तो हो सकता है, लेकिन जिस प्रकार अजनाला सेक्टर में बहती रावी नदी में अवैध माइनिंग को रोक लगाने में विफल रहे हैं, लोकसभा चुनाव में विपक्ष इसको मुद्दा बनाएगा।

राजासांसी विधानसभा के मंत्री सुख सरकारिया का विधानसभा हलका भी सीमावर्ती गांव के साथ जुड़ा है। पिछले साल इस विधानसभा हलके में पड़ते गांव में निरंकारी भवन में हुए ब्लास्ट के बाद उनके पैरोकारों में रोष है। मंत्री होने के बावजूद सरकारिया सीमावर्ती गांवों के नौजवानों के लिए रोजगार के साधन जुटा नहीं पाए।

सेंट्रल विधानसभा से विधायक शिक्षा मंत्री ओमप्रकाश सोनी को अध्यापकों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। सोनी ने 5178 अध्यापकों की मांगें तो स्वीकार कर ली, लेकिन कई अध्यापक संगठनों को अब भी सोनी से नाराजगी है। सोनी अपने विधानसभा हलके के लोगों के साथ संपर्क में हैं। वह चंडीगढ़ में कम रहते हैं। सोनी छह बार विधानसभा का चुनाव जीत चुके है। इसलिए उन पर लोक सभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन का दबाव बना रहेगा।

वहीं वेस्ट विधानसभा से दूसरी बार चुनाव जीते डॉ. राजकुमार को चुनाव से पहले पंजाब वेयर हाउसिंग बोर्ड का चेयरमैन नियुक्त कर दलित भाईचारे को सम्मान दिया था। यह हल्का कांग्रेस का गढ़ है। विधानसभा चुनाव के दौरान डॉ. राज कुमार द्वारा किए वायदे में से एक 22 नंबर फाटक में आरओबी का नींव पत्थर रखा गया है।

इस हलके में कभी बड़ी बड़ी फैक्ट्रियां होती थी, जो अब बंद हो चुकी हैं। उत्तरी विधानसभा हलके से तत्कालीन मंत्री अनिल जोशी को हराकर विधायक बने सुनील दत्ती दो साल में विकास की बयार नहीं ला सके। दो साल से दत्ती मजीठा रोड का निर्माण नहीं करवा सके हैं। जिस कारण लोगों में नाराजगी है।
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