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लोकसभा चुनाव 2019 के बाद हरियाणा में ये रहेगा भाजपा का एजेंडा, मनोहर लाल कर रहे हैं होमवर्क
Tue, 14 May 2019 10:56 AM IST
खुशबू गोयल
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 14 May 2019 10:56 AM IST
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मनोहर लाल खट्टर
- फोटो : फाइल फोटो
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लोकसभा चुनाव निपटते ही अब भाजपा की निगाहें आगामी विधानसभा चुनाव पर टिकी हैं। भाजपा ने विधानसभा का अधिकतर होमवर्क लोकसभा चुनाव की फील्ड पर ही पूरा कर लिया है। लेकिन इस लोकसभा चुनाव में विधायकों की मेहनत रंग लाई, तो विधानसभा के लिए भाजपा की राह आसान हो जाएगी।
क्योंकि लोकसभा के नतीजे आने के बाद प्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा फिर से हरियाणा फतेह की तैयारी में पूरी तरह जुट जाएगी। हालांकि प्रदेश में अभी विधानसभा चुनाव को करीब चार माह बाकी है। इन चार महीनों में सीएम मनोहर लाल विधानसभा चुनावों के लिए मजबूती से जमीन तैयार करेंगे।
सीएम के साथ-साथ भाजपा का संगठन भी सूबे में विधानसभा की सियासी जमीन को एक बार फिर पार्टी के लिए उपजाऊ बनाने में जुटेगा। संगठन नेताओं को जिम्मेवारी सौंप दी गई है कि लोकसभा में कार्यकर्ताओं का वर्तमान उत्साह वे विधानसभा तक बनाए रखें। विरोधियों की घेराबंदी किन मुद्दों पर करनी है, उसकी कमान टीम मनोहर के हाथ में रहेगी।
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मगर इस पूरी रणनीति को धार देने के लिए मनोहर के विधायकों को पहले इस लोकसभा के इम्तिहान में पास होना है।
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क्योंकि लोकसभा के नतीजे आने के बाद प्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा फिर से हरियाणा फतेह की तैयारी में पूरी तरह जुट जाएगी। हालांकि प्रदेश में अभी विधानसभा चुनाव को करीब चार माह बाकी है। इन चार महीनों में सीएम मनोहर लाल विधानसभा चुनावों के लिए मजबूती से जमीन तैयार करेंगे।
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सीएम के साथ-साथ भाजपा का संगठन भी सूबे में विधानसभा की सियासी जमीन को एक बार फिर पार्टी के लिए उपजाऊ बनाने में जुटेगा। संगठन नेताओं को जिम्मेवारी सौंप दी गई है कि लोकसभा में कार्यकर्ताओं का वर्तमान उत्साह वे विधानसभा तक बनाए रखें। विरोधियों की घेराबंदी किन मुद्दों पर करनी है, उसकी कमान टीम मनोहर के हाथ में रहेगी।
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मगर इस पूरी रणनीति को धार देने के लिए मनोहर के विधायकों को पहले इस लोकसभा के इम्तिहान में पास होना है।
अबकी कुछ अलग है विधानसभा का गणित
पिछले विधानसभा चुनाव की यदि तस्वीर देखें तो भाजपा पहली बार 33.20 वोट प्रतिशत के साथ बहुमत में आई थी। आज भाजपा के पास विधायकों की संख्या 48 है। जबकि इनेलो 19 विधायकों के साथ दूसरी बड़ी पार्टी थी। लेकिन आज सिर्फ10 विधायकाें वाली रह गई है। 4 विधायक बागी होकर जजपा में जा चुके हैं।
जबकि लोकसभा चुनाव से पहले इनेलो के 2 विधायक भाजपा और 1 कांग्रेस में शामिल हो चुका हे। इनेलो के 2 विधायकों का निधन हो गया। कांग्रेस भी 17 विधायकाें के साथ विधानसभा में पहुंची थी। जबकि बसपा व शिअद के 1-1 और आजाद 5 प्रत्याशी थी। भाजपा अब चाहती है कि फिर से पूर्ण बहुमत के लिए 48 विधायकों का ये आंकड़ा आगे बढ़े।
रैलियों के रिस्पांस से खुश भाजपा
लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा ने अपने सभी विधायकों को अपना-अपना हलका जीतने का टारगेट दे दिया था। विधायक अपनी परीक्षा दे चुके हैं, रिजल्ट 23 मई को आना बाकी है। दूसरी ओर, सीएम मनोहर लाल ने भी विजय संकल्प रैली के बहाने हलकों को टटोल लिया है।
सीएम ने सभी हलकों में जनसभाएं और रोड शो कर वहां विधानसभा की जमीन तैयार करने की कोशिश करते हुए मतदाताओं का मन भी टटोल लिया है। हालांकि भाजपा इन रैलियों के रिस्पांस से काफी खुश नजर आ रही है, लेकिन लोकसभा चुनाव के नतीजे ही तय करेंगे कि विधायकों की मेहनत क्या रंग लाई और इन रैलियों का मतदाताओं पर क्या असर रहा। यदि नतीजे भाजपा के पक्ष में रहे, तो विधानसभा में भाजपा को लाभ हो सकता है।
जबकि लोकसभा चुनाव से पहले इनेलो के 2 विधायक भाजपा और 1 कांग्रेस में शामिल हो चुका हे। इनेलो के 2 विधायकों का निधन हो गया। कांग्रेस भी 17 विधायकाें के साथ विधानसभा में पहुंची थी। जबकि बसपा व शिअद के 1-1 और आजाद 5 प्रत्याशी थी। भाजपा अब चाहती है कि फिर से पूर्ण बहुमत के लिए 48 विधायकों का ये आंकड़ा आगे बढ़े।
रैलियों के रिस्पांस से खुश भाजपा
लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा ने अपने सभी विधायकों को अपना-अपना हलका जीतने का टारगेट दे दिया था। विधायक अपनी परीक्षा दे चुके हैं, रिजल्ट 23 मई को आना बाकी है। दूसरी ओर, सीएम मनोहर लाल ने भी विजय संकल्प रैली के बहाने हलकों को टटोल लिया है।
सीएम ने सभी हलकों में जनसभाएं और रोड शो कर वहां विधानसभा की जमीन तैयार करने की कोशिश करते हुए मतदाताओं का मन भी टटोल लिया है। हालांकि भाजपा इन रैलियों के रिस्पांस से काफी खुश नजर आ रही है, लेकिन लोकसभा चुनाव के नतीजे ही तय करेंगे कि विधायकों की मेहनत क्या रंग लाई और इन रैलियों का मतदाताओं पर क्या असर रहा। यदि नतीजे भाजपा के पक्ष में रहे, तो विधानसभा में भाजपा को लाभ हो सकता है।