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Lok Sabha Election: हरियाणा में जातीय समीकरण भांपा... क्षेत्रीय गणित आंका; भाजपा में छह सीटों पर नए चेहरे
Wed, 27 Mar 2024 09:31 AM IST
शाहरुख खान
आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 27 Mar 2024 09:31 AM IST
सार
हरियाणा में भाजपा ने लोकसभा चुनाव को लेकर जातीय समीकरण के पैमाने पर परखने के बाद सभी दस सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। दस में से छह सीटों पर नए चेहरे हैं। चार पुराने सांसदों पर विश्वास जताया है।
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Lok Sabha Election 2024
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
भाजपा ने अपनी रणनीति के तहत दसों लोकसभा सीट पर उम्मीदवार उतार दिए हैं। पार्टी ने आंतरिक सर्वे में आए परिणाम और जातीय समीकरण के पैमाने पर परखने के बाद अपने उम्मीदवारों पर दांव लगाया है। पार्टी ने दस में से छह सीटों पर नए चेहरे उतारे हैं।
वहीं, चार पुराने सांसदों पर भरोसा जताया है। भाजपा के दसों प्रत्याशियों में से छह कांग्रेसी पृष्ठभूमि से जुड़े हैं। इनमें से राव इंद्रजीत और धर्मबीर 2014 में भाजपा में शामिल हुए थे। अरविंद शर्मा 2019 के चुनाव में भाजपा में शामिल हुए थे और रणजीत चौटाला 2019 का विधानसभा चुनाव जीतने के बाद भाजपा सरकार को समर्थन दे रहे थे।
अशोक तंवर और नवीन जिंदल कुछ दिन पहले ही भाजपा में शामिल हुए हैं। नए चेहरे उतारकर पार्टी ने जहां सत्ता विरोधी लहर को काटने की कोशिश की है, वहीं पुराने चेहरों को मैदान में उतारकर आगामी विधानसभा चुनावों को भी साधने की कोशिश की है।
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पार्टी इसे माइलेज के तौर पर देख रही है और पार्टी अब चुनाव प्रचार की रणनीति में जुट गई है। पार्टी की ओर से स्टार प्रचारकों की सूची भी तैयार की जा रही है। वहीं, कांग्रेस अभी तक उम्मीदवार घोषित नहीं कर पाई है। एक नजर डालते हैं भाजपा के घोषित उम्मीदवार की रणनीति और उनकी चुनौतियां पर।
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वहीं, चार पुराने सांसदों पर भरोसा जताया है। भाजपा के दसों प्रत्याशियों में से छह कांग्रेसी पृष्ठभूमि से जुड़े हैं। इनमें से राव इंद्रजीत और धर्मबीर 2014 में भाजपा में शामिल हुए थे। अरविंद शर्मा 2019 के चुनाव में भाजपा में शामिल हुए थे और रणजीत चौटाला 2019 का विधानसभा चुनाव जीतने के बाद भाजपा सरकार को समर्थन दे रहे थे।
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अशोक तंवर और नवीन जिंदल कुछ दिन पहले ही भाजपा में शामिल हुए हैं। नए चेहरे उतारकर पार्टी ने जहां सत्ता विरोधी लहर को काटने की कोशिश की है, वहीं पुराने चेहरों को मैदान में उतारकर आगामी विधानसभा चुनावों को भी साधने की कोशिश की है।
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पार्टी इसे माइलेज के तौर पर देख रही है और पार्टी अब चुनाव प्रचार की रणनीति में जुट गई है। पार्टी की ओर से स्टार प्रचारकों की सूची भी तैयार की जा रही है। वहीं, कांग्रेस अभी तक उम्मीदवार घोषित नहीं कर पाई है। एक नजर डालते हैं भाजपा के घोषित उम्मीदवार की रणनीति और उनकी चुनौतियां पर।
गुरुग्राम: राव को अहीरवाल पर पकड़ का मिला इनाम
भाजपा ने तीसरी बार राव इंद्रजीत पर भरोसा जताया है। वह लगातार दो बार से भाजपा के टिकट पर गुरुग्राम लोकसभा से चुनाव जीत रहे हैं। साल 2009 में उन्होंने कांग्रेस से चुनाव लड़ा था। उसके बाद साल 2014 में वह भाजपा में शामिल हो गए थे। 2019 के चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के कैप्टन अजय सिंह यादव को करीब चार लाख वोटों से हराया था। भाजपा ने अहीरवाल बेल्ट में राव का दबदबा देखते हुए उन पर फिर से दांव लगाया है।
भाजपा ने तीसरी बार राव इंद्रजीत पर भरोसा जताया है। वह लगातार दो बार से भाजपा के टिकट पर गुरुग्राम लोकसभा से चुनाव जीत रहे हैं। साल 2009 में उन्होंने कांग्रेस से चुनाव लड़ा था। उसके बाद साल 2014 में वह भाजपा में शामिल हो गए थे। 2019 के चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के कैप्टन अजय सिंह यादव को करीब चार लाख वोटों से हराया था। भाजपा ने अहीरवाल बेल्ट में राव का दबदबा देखते हुए उन पर फिर से दांव लगाया है।
मजबूत पक्ष
गुरुग्राम सीट भले ही 2008 में अस्तित्व में आई हो, मगर यह सीट और इस लोकसभा सीट से जुड़ी नौ विधानसभा क्षेत्रों में राव का दबदबा रहा है। अहीर वोटों पर उनकी जबरदस्त पकड़ है और उनका जनाधार भी अच्छा है। 2019 में लगातार दूसरी बार उनके वोटों में इजाफा हुआ है। 2019 में उन्हें 8,81,546 और 2014 में 6,44,780 वोट हासिल हुए थे।
चुनौतियां
राव इस सीट से 2009 से सांसद हैं। ऐसे में सत्ता विरोधी लहर होना लाजिमी है। हरियाणा के नए मंत्रिमंडल में उनके समर्थक विधायकों को जगह नहीं मिली है। अंदरखाते विधायकों में नाराजगी है। इस नाराजगी से निपटना भी उनके लिए चुनौती होगी।
गुरुग्राम सीट भले ही 2008 में अस्तित्व में आई हो, मगर यह सीट और इस लोकसभा सीट से जुड़ी नौ विधानसभा क्षेत्रों में राव का दबदबा रहा है। अहीर वोटों पर उनकी जबरदस्त पकड़ है और उनका जनाधार भी अच्छा है। 2019 में लगातार दूसरी बार उनके वोटों में इजाफा हुआ है। 2019 में उन्हें 8,81,546 और 2014 में 6,44,780 वोट हासिल हुए थे।
चुनौतियां
राव इस सीट से 2009 से सांसद हैं। ऐसे में सत्ता विरोधी लहर होना लाजिमी है। हरियाणा के नए मंत्रिमंडल में उनके समर्थक विधायकों को जगह नहीं मिली है। अंदरखाते विधायकों में नाराजगी है। इस नाराजगी से निपटना भी उनके लिए चुनौती होगी।
फरीदाबाद : टीम मोदी में शामिल गुर्जर पर हाईकमान ने जताया भरोसा
भाजपा ने हरियाणा में जिन पुराने चेहरों पर दांव लगाया है, उनमें फरीदाबाद के वर्तमान सांसद और केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर भी शामिल हैं। उनके पीएम मोदी और अन्य केंद्रीय नेताओं से अच्छे संबंध हैं। उन्होंने 2014 और 2019 में अच्छे मतों से जीत हासिल की थी। केंद्र की राजनीति के अलावा प्रदेश संगठन के कामकाज अच्छा अनुभव है। वह हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
मजबूत पक्ष
कृष्णपाल गुर्जर ने बीते दोनों लोकसभा चुनाव में रिकॉर्ड मतों से जीत हासिल की है। पहली बार उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी को चार लाख 66 हजार वोटों से हराया। दूसरी बार करीब साढ़े छह लाख वोटों से जीत हासिल की। वह दोनों बार मोदी सरकार में मंत्री रहे हैं। जमीनी नेता की होने की वजह से इलाके में अच्छी पकड़ है।
चुनौतियां
टिकट मिलने के बाद ही एक-दो इलाकों में उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए हैं। इसके साथ ही उन्हें सत्ता विरोधी भावनाओं से भी पार पाना होगा।
भाजपा ने हरियाणा में जिन पुराने चेहरों पर दांव लगाया है, उनमें फरीदाबाद के वर्तमान सांसद और केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर भी शामिल हैं। उनके पीएम मोदी और अन्य केंद्रीय नेताओं से अच्छे संबंध हैं। उन्होंने 2014 और 2019 में अच्छे मतों से जीत हासिल की थी। केंद्र की राजनीति के अलावा प्रदेश संगठन के कामकाज अच्छा अनुभव है। वह हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
मजबूत पक्ष
कृष्णपाल गुर्जर ने बीते दोनों लोकसभा चुनाव में रिकॉर्ड मतों से जीत हासिल की है। पहली बार उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी को चार लाख 66 हजार वोटों से हराया। दूसरी बार करीब साढ़े छह लाख वोटों से जीत हासिल की। वह दोनों बार मोदी सरकार में मंत्री रहे हैं। जमीनी नेता की होने की वजह से इलाके में अच्छी पकड़ है।
चुनौतियां
टिकट मिलने के बाद ही एक-दो इलाकों में उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए हैं। इसके साथ ही उन्हें सत्ता विरोधी भावनाओं से भी पार पाना होगा।
भिवानी-महेंद्रगढ़: धर्मबीर ने बंसीलाल की तीन पीढि़यों को हराया
इस सीट से भाजपा ने चौधरी धर्मबीर सिंह को उम्मीदवार बनाया है। वह साल 2014 में भाजपा में शामिल हुए और रिकॉर्ड जीत के साथ पहली बार संसद भवन पहुंचे। उन्हें पूर्व सीएम स्व. बंसीलाल का कट्टर प्रतिद्वंद्वी माना जाता है। उन्होंने बंसीलाल की तीनों पीढ़ियों को हराया है। पहले उन्होंने विधानसभा चुनाव में तोशाम सीट से बंसीलाल और उनके बेटे सुरेंद्र सिंह को हराया। साल 2014 व 2019 में उन्होंने बंसीलाल की पोती श्रुति चौधरी को हराया।
मजबूत पक्ष
इस क्षेत्र के जातीय समीकरण चौधरी धर्मबीर सिंह के पक्ष में हैं। इलाके में करीब 22 से 25 फीसदी जाट मतदाता हैं और 35 से 36 फीसदी ओबीसी वोट। इसलिए उनका पलड़ा भारी पड़ रहा है।
चुनौतियां
उनकी चुनौतियां इस बात पर निर्भर करती हैं कि कांग्रेस उनके सामने किस उम्मीदवार को उतारती है। चर्चा है कि कांग्रेस अपने विधायक राव दान सिंह पर दांव लगा सकती है। राव दान सिंह का भी अच्छा खास प्रभाव है। यदि वह चुनाव मैदान में आते हैं तो धर्मबीर को चुनौतियां मिल सकती हैं।
इस सीट से भाजपा ने चौधरी धर्मबीर सिंह को उम्मीदवार बनाया है। वह साल 2014 में भाजपा में शामिल हुए और रिकॉर्ड जीत के साथ पहली बार संसद भवन पहुंचे। उन्हें पूर्व सीएम स्व. बंसीलाल का कट्टर प्रतिद्वंद्वी माना जाता है। उन्होंने बंसीलाल की तीनों पीढ़ियों को हराया है। पहले उन्होंने विधानसभा चुनाव में तोशाम सीट से बंसीलाल और उनके बेटे सुरेंद्र सिंह को हराया। साल 2014 व 2019 में उन्होंने बंसीलाल की पोती श्रुति चौधरी को हराया।
मजबूत पक्ष
इस क्षेत्र के जातीय समीकरण चौधरी धर्मबीर सिंह के पक्ष में हैं। इलाके में करीब 22 से 25 फीसदी जाट मतदाता हैं और 35 से 36 फीसदी ओबीसी वोट। इसलिए उनका पलड़ा भारी पड़ रहा है।
चुनौतियां
उनकी चुनौतियां इस बात पर निर्भर करती हैं कि कांग्रेस उनके सामने किस उम्मीदवार को उतारती है। चर्चा है कि कांग्रेस अपने विधायक राव दान सिंह पर दांव लगा सकती है। राव दान सिंह का भी अच्छा खास प्रभाव है। यदि वह चुनाव मैदान में आते हैं तो धर्मबीर को चुनौतियां मिल सकती हैं।
सिरसा : चेहरा बदल अशोक तंवर पर लगाया दांव
भाजपा ने सुरक्षित सीट सिरसा से मौजूदा सांसद सुनीता दुग्गल का टिकट काटकर चेहरा अशोक तंवर को उतारा। तंवर पुराने कांग्रेसी रहे हैं। हाल ही में वह आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। तंवर को टिकट देकर पार्टी ने एक साथ दो निशाने साधे हैं। एक तो सिरसा में नया चेहरा उतारा और दूसरा युवा दलित को टिकट देकर दलित वोट बैंक को साधने का काम किया है।
मजबूत पक्ष
तंवर साल 2009 में इसी सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते थे। उनका खुद का एक वोट बैंक है। निर्वाचित प्रतिनिधि नहीं होने के बावजूद वह क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहे हैं। इस बार उनके साथ भाजपा का काडर वोट बैंक भी है।
चुनौतियां
अशोक तंवर 2009 का चुनाव जीतने के बाद लगातार दो बार से चुनाव हार रहे हैं। इसके अलावा कांग्रेस से यदि कुमारी सैलजा मैदान में उतरती हैं तो उनकी चुनौती और बढ़ सकती है। पंजाब से सटा होने के कारण सिरसा में भाजपा के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर भी ज्यादा है।
भाजपा ने सुरक्षित सीट सिरसा से मौजूदा सांसद सुनीता दुग्गल का टिकट काटकर चेहरा अशोक तंवर को उतारा। तंवर पुराने कांग्रेसी रहे हैं। हाल ही में वह आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। तंवर को टिकट देकर पार्टी ने एक साथ दो निशाने साधे हैं। एक तो सिरसा में नया चेहरा उतारा और दूसरा युवा दलित को टिकट देकर दलित वोट बैंक को साधने का काम किया है।
मजबूत पक्ष
तंवर साल 2009 में इसी सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते थे। उनका खुद का एक वोट बैंक है। निर्वाचित प्रतिनिधि नहीं होने के बावजूद वह क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहे हैं। इस बार उनके साथ भाजपा का काडर वोट बैंक भी है।
चुनौतियां
अशोक तंवर 2009 का चुनाव जीतने के बाद लगातार दो बार से चुनाव हार रहे हैं। इसके अलावा कांग्रेस से यदि कुमारी सैलजा मैदान में उतरती हैं तो उनकी चुनौती और बढ़ सकती है। पंजाब से सटा होने के कारण सिरसा में भाजपा के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर भी ज्यादा है।
रोहतक : हुड्डा के गढ़ में गैर जाट कार्ड
हरियाणा की सबसे हॉट सीट पर भाजपा ने फिर से डॉ. अरविंद शर्मा को चुनावी रण में उतारा है। शर्मा रोहतक के साथ सोनीपत व करनाल से भी सांसद रह चुके हैं। 2019 में डॉ. अरविंद ने कांग्रेस उम्मीदवार दीपेंद्र हुड्डा को चुनाव में पटकनी दी थी। पार्टी ने इस सीट पर शर्मा को उतारने से पहले कई और चेहरों पर भी मंथन किया था, मगर आखिरी में बाजी अरविंद शर्मा ने ही मारी।
मजबूत पक्ष
पार्टी ने ब्राह्मण उम्मीदवार उतारकर गैर जाट कार्ड खेला है। शर्मा के पास कई चुनाव जीतने का अच्छा अनुभव है। वह रोहतक से ही टिकट मांग रहे थे। पार्टी भी उन्हें चुनाव जिताने के लिए पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में है।
चुनौतियां
पिछली बार उन्होंने दीपेंद्र हुड्डा को मात्र सात हजार वोटों से हराया था। कम अंतर से जीत हासिल कर दोबारा जीतना एक बड़ी चुनौती है। वहीं, यदि दीपेंद्र चुनाव लड़ते हैं तो उन्हें सहानुभूति मिल सकती है।
हरियाणा की सबसे हॉट सीट पर भाजपा ने फिर से डॉ. अरविंद शर्मा को चुनावी रण में उतारा है। शर्मा रोहतक के साथ सोनीपत व करनाल से भी सांसद रह चुके हैं। 2019 में डॉ. अरविंद ने कांग्रेस उम्मीदवार दीपेंद्र हुड्डा को चुनाव में पटकनी दी थी। पार्टी ने इस सीट पर शर्मा को उतारने से पहले कई और चेहरों पर भी मंथन किया था, मगर आखिरी में बाजी अरविंद शर्मा ने ही मारी।
मजबूत पक्ष
पार्टी ने ब्राह्मण उम्मीदवार उतारकर गैर जाट कार्ड खेला है। शर्मा के पास कई चुनाव जीतने का अच्छा अनुभव है। वह रोहतक से ही टिकट मांग रहे थे। पार्टी भी उन्हें चुनाव जिताने के लिए पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में है।
चुनौतियां
पिछली बार उन्होंने दीपेंद्र हुड्डा को मात्र सात हजार वोटों से हराया था। कम अंतर से जीत हासिल कर दोबारा जीतना एक बड़ी चुनौती है। वहीं, यदि दीपेंद्र चुनाव लड़ते हैं तो उन्हें सहानुभूति मिल सकती है।
हिसार : रणजीत पर आकर रुकी जाट चेहरे की तलाश
मनोहर लाल और नायब सैनी सरकार में बिजली व जेल मंत्री रणजीत सिंह चौटाला कैप्टन अभिमन्यु व कुलदीप बिश्नोई को पछाड़ने में कामयाब रहे हैं। उनको टिकट दिए जाने को लेकर किसी ने उम्मीद नहीं लगाई थी। रणजीत चौटाला के टिकट को लेकर भाजपा हाईकमान काफी दिनों से मंथन कर रहा था। 2019 में वह सिरसा जिले की रानियां विधानसभा से निर्दलीय चुनाव जीते थे। पार्टी को हिसार सीट के लिए जाट उम्मीदवार तलाश रही थी। ऐसे में उन्हें सबसे सटीक उम्मीदवार रणजीत चौटाला लगे। वह चौधरी देवीलाल के बेटे हैं।
मजबूत पक्ष
चौधरी रणजीत चौटाला की किसानों और जाट वोट बैंक पर मजबूत पकड़ है। उनकी साफ छवि भी उनका मजबूत पक्ष है।
चुनौतियां
चौधरी बीरेंद्र सिंह के भाजपा से अलग होने पर भाजपा की चुनौतियां बढ़ गई हैं। इससे पार पाना उनके लिए बड़ी चुनौती होगी।
मनोहर लाल और नायब सैनी सरकार में बिजली व जेल मंत्री रणजीत सिंह चौटाला कैप्टन अभिमन्यु व कुलदीप बिश्नोई को पछाड़ने में कामयाब रहे हैं। उनको टिकट दिए जाने को लेकर किसी ने उम्मीद नहीं लगाई थी। रणजीत चौटाला के टिकट को लेकर भाजपा हाईकमान काफी दिनों से मंथन कर रहा था। 2019 में वह सिरसा जिले की रानियां विधानसभा से निर्दलीय चुनाव जीते थे। पार्टी को हिसार सीट के लिए जाट उम्मीदवार तलाश रही थी। ऐसे में उन्हें सबसे सटीक उम्मीदवार रणजीत चौटाला लगे। वह चौधरी देवीलाल के बेटे हैं।
मजबूत पक्ष
चौधरी रणजीत चौटाला की किसानों और जाट वोट बैंक पर मजबूत पकड़ है। उनकी साफ छवि भी उनका मजबूत पक्ष है।
चुनौतियां
चौधरी बीरेंद्र सिंह के भाजपा से अलग होने पर भाजपा की चुनौतियां बढ़ गई हैं। इससे पार पाना उनके लिए बड़ी चुनौती होगी।
सोनीपत: ब्राह्मण उम्मीदवार बड़ौली पर लगाया दांव
भाजपा ने सोनीपत से नए चेहरे पर दांव लगाया है। पार्टी ने मौजूदा सांसद रमेश कौशिक का टिकट काटकर राई से भाजपा विधायक और प्रदेश महामंत्री मोहनलाल बड़ौली को चुनावी रण में उतारा है। बड़ौली ब्राह्मण चेहरा हैं और पूर्व सीएम मनोहर लाल के करीबी हैं। नए मंत्रिमंडल में उनका नाम लगभग फाइनल था, मगर लोकसभा चुनाव को देखते हुए उन्हें नायब सैनी सरकार में शामिल नहीं किया गया था।
मजबूत पक्ष
मोहन लाल बड़ौली के पास संगठन के कामकाज का पुराना अनुभव है। वह 90 के दशक में ही पार्टी से जुड़ गए थे। जाट व गैर जाट के समीकरण में ब्राह्मण उम्मीदवार के हिसाब से बड़ौली का पलड़ा भारी है। उनके साथ कोई विवाद भी नहीं जुड़ा है।
चुनौतियां
भाजपा के सर्वे के मुताबिक इस सीट पर पार्टी के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर रही है। इससे पार पाना बड़ौली के आसान नहीं होगा। वहीं, रोहतक व सोनीपत कांग्रेस का गढ़ रहा है। सोनीपत से कांग्रेस मजबूत उम्मीदवार उतारने की कोशिश में है।
भाजपा ने सोनीपत से नए चेहरे पर दांव लगाया है। पार्टी ने मौजूदा सांसद रमेश कौशिक का टिकट काटकर राई से भाजपा विधायक और प्रदेश महामंत्री मोहनलाल बड़ौली को चुनावी रण में उतारा है। बड़ौली ब्राह्मण चेहरा हैं और पूर्व सीएम मनोहर लाल के करीबी हैं। नए मंत्रिमंडल में उनका नाम लगभग फाइनल था, मगर लोकसभा चुनाव को देखते हुए उन्हें नायब सैनी सरकार में शामिल नहीं किया गया था।
मजबूत पक्ष
मोहन लाल बड़ौली के पास संगठन के कामकाज का पुराना अनुभव है। वह 90 के दशक में ही पार्टी से जुड़ गए थे। जाट व गैर जाट के समीकरण में ब्राह्मण उम्मीदवार के हिसाब से बड़ौली का पलड़ा भारी है। उनके साथ कोई विवाद भी नहीं जुड़ा है।
चुनौतियां
भाजपा के सर्वे के मुताबिक इस सीट पर पार्टी के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर रही है। इससे पार पाना बड़ौली के आसान नहीं होगा। वहीं, रोहतक व सोनीपत कांग्रेस का गढ़ रहा है। सोनीपत से कांग्रेस मजबूत उम्मीदवार उतारने की कोशिश में है।
करनाल : पंजाबी मतदाओं के भरोसे मनोहर
भाजपा ने अपने मौजूदा सांसद संजय भाटिया का टिकट काटकर करनाल से पूर्व सीएम मनोहर लाल को उम्मीदवार बनाया है। करनाल उनकी कर्मभूमि रही है। वह जब से सीएम बने हैं, तब से उनका हर महीने करनाल आना-जाना लगा रहा है। सीएम सिटी होने की वजह से उनकी लोकसभा क्षेत्र में अच्छी पकड़ है।
मजबूत पक्ष
मनोहर लाल पंजाबी समुदाय से आते हैं। करनाल सीट पर पंजाबी समुदाय के वोटर ज्यादा हैं। करीब दो लाख पंजाबी मतदाता हैं। संजय भटिया ने 2019 में अपने प्रतिद्वंद्वी को करीब छह लाख वोटों से हराया था। ऐसे में इस क्षेत्र में भाजपा का अच्छा खासा वोट बैंक है।
चुनौतियां
मनोहर लाल को सीएम पद से हटाए जाने के बाद से पंजाबी समुदाय में नाराजगी है। ऐसे में उन्हें साधकर चुनाव जीतना उनके लिए बड़ी चुनौती होगी।
भाजपा ने अपने मौजूदा सांसद संजय भाटिया का टिकट काटकर करनाल से पूर्व सीएम मनोहर लाल को उम्मीदवार बनाया है। करनाल उनकी कर्मभूमि रही है। वह जब से सीएम बने हैं, तब से उनका हर महीने करनाल आना-जाना लगा रहा है। सीएम सिटी होने की वजह से उनकी लोकसभा क्षेत्र में अच्छी पकड़ है।
मजबूत पक्ष
मनोहर लाल पंजाबी समुदाय से आते हैं। करनाल सीट पर पंजाबी समुदाय के वोटर ज्यादा हैं। करीब दो लाख पंजाबी मतदाता हैं। संजय भटिया ने 2019 में अपने प्रतिद्वंद्वी को करीब छह लाख वोटों से हराया था। ऐसे में इस क्षेत्र में भाजपा का अच्छा खासा वोट बैंक है।
चुनौतियां
मनोहर लाल को सीएम पद से हटाए जाने के बाद से पंजाबी समुदाय में नाराजगी है। ऐसे में उन्हें साधकर चुनाव जीतना उनके लिए बड़ी चुनौती होगी।
कुरुक्षेत्र: वैश्य मतदाताओं को लुभाने के लिए जिंदल को किया आगे
भाजपा ने कुरुक्षेत्र से वैश्य बिरादरी के नवीन जिंदल को चुनाव मैदान में उतारा है। वह कुरुक्षेत्र से दो बार सांसद रहे हैं। उनके पिता स्व. ओमप्रकाश जिंदल हरियाणा की राजनीति का बड़ा चेहरा रहे हैं। वे हरियाणा सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। इसके साथ वैश्य परिवार के रूप में वह हरियाणा में बड़ा चेहरा रहे हैं। उनकी मां सावित्री जिंदल भी हुड्डा सरकार में मंत्री रह चुकी हैं।
मजबूत पक्ष
नवीन जिंदल दो बार कुरुक्षेत्र से ही कांग्रेस के सांसद रह चुके हैं। उनका अपना खुद का वोट बैंक है। इस बार भाजपा का साथ है। पिछली बार भाजपा को इस सीट से 53 फीसदी से ज्यादा वोट मिले थे।
चुनौतियां
साल 2014 का चुनाव हारे। पिछले दस साल से राजनीति में सक्रीय नहीं रहे।
भाजपा ने कुरुक्षेत्र से वैश्य बिरादरी के नवीन जिंदल को चुनाव मैदान में उतारा है। वह कुरुक्षेत्र से दो बार सांसद रहे हैं। उनके पिता स्व. ओमप्रकाश जिंदल हरियाणा की राजनीति का बड़ा चेहरा रहे हैं। वे हरियाणा सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। इसके साथ वैश्य परिवार के रूप में वह हरियाणा में बड़ा चेहरा रहे हैं। उनकी मां सावित्री जिंदल भी हुड्डा सरकार में मंत्री रह चुकी हैं।
मजबूत पक्ष
नवीन जिंदल दो बार कुरुक्षेत्र से ही कांग्रेस के सांसद रह चुके हैं। उनका अपना खुद का वोट बैंक है। इस बार भाजपा का साथ है। पिछली बार भाजपा को इस सीट से 53 फीसदी से ज्यादा वोट मिले थे।
चुनौतियां
साल 2014 का चुनाव हारे। पिछले दस साल से राजनीति में सक्रीय नहीं रहे।
अंबाला : रतनलाल के प्रति सहानुभूति लेने का प्रयास
भाजपा ने दिवंगत सांसद रतनलाल कटारिया की पत्नी बंतो कटारिया पर दांव लगाया है। बंतो कटारिया भाजपा की पुरानी सदस्या रही हैं। वह अच्छी वक्ता हैं। इस सीट से उनका टिकट पहले से पक्का माना जा रहा था। भाजपा अंबाला सीट लगातार दो बार से जीत रही है।
मजबूत पक्ष
बंतो कटारिया को रतनलाल कटारिया के निधन के बाद सहानुभूति मिल सकती है। सैनी के मंत्रिमंडल में अंबाला लोकसभा क्षेत्र को अच्छा प्रतिनिधित्व दिया गया है।
चुनौतियां
भाजपा को यहां से भी सत्ता विरोधी लहर का सामना करना पड़ रहा है। विज की नाराजगी भी पार्टी के लिए ठीक नहीं है। हालांकि बंतो टिकट मिलने के बाद विज से मिल चुकी हैं।
भाजपा ने दिवंगत सांसद रतनलाल कटारिया की पत्नी बंतो कटारिया पर दांव लगाया है। बंतो कटारिया भाजपा की पुरानी सदस्या रही हैं। वह अच्छी वक्ता हैं। इस सीट से उनका टिकट पहले से पक्का माना जा रहा था। भाजपा अंबाला सीट लगातार दो बार से जीत रही है।
मजबूत पक्ष
बंतो कटारिया को रतनलाल कटारिया के निधन के बाद सहानुभूति मिल सकती है। सैनी के मंत्रिमंडल में अंबाला लोकसभा क्षेत्र को अच्छा प्रतिनिधित्व दिया गया है।
चुनौतियां
भाजपा को यहां से भी सत्ता विरोधी लहर का सामना करना पड़ रहा है। विज की नाराजगी भी पार्टी के लिए ठीक नहीं है। हालांकि बंतो टिकट मिलने के बाद विज से मिल चुकी हैं।