{"_id":"66275d106afb9177d3091df3","slug":"lok-sabha-election-2024-akali-dal-candidate-mohinder-singh-figure-is-thirty-six-compared-to-all-3-candidates-2024-04-23","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Election: केपी का तीनों उम्मीदवारों से छत्तीस का आंकड़ा; चन्नी ने 2022 में टिकट काटी, 2017 में रिंकू ने कटवाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Election: केपी का तीनों उम्मीदवारों से छत्तीस का आंकड़ा; चन्नी ने 2022 में टिकट काटी, 2017 में रिंकू ने कटवाई
Tue, 23 Apr 2024 12:40 PM IST
शाहरुख खान
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 23 Apr 2024 12:40 PM IST
सार
शिरोमणि अकाली दल ने मोहिंदर सिंह का तीनों उम्मीदवारों से छत्तीस का आंकड़ा है। चन्नी ने 2022 में टिकट काट दी थी। 2017 में सुशील रिंकू ने उनकी टिकट कटवाई थी। वो टीनू के कारण विधानसभा चुनाव हारे थे।
विज्ञापन
मोहिंदर सिंह केपी
- फोटो : twitter @SevadalHsp
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
शिरोमणि अकाली दल ने मोहिंदर सिंह केपी को मैदान में उतारकर सियासत को गर्मा दिया है। शिरोमणि अकाली दल के उम्मीदवार मोहिंदर सिंह केपी की जालंधर में चुनाव लड़ रहे तीनों प्रमुख पार्टियों के उम्मीदवारों से जगजाहिर हैं, जिसका असर आने वाले दिनों में प्रचार में देखने को भी मिलेगा।
मोहिंदर सिंह केपी जालंधर वेस्ट से विधानसभा चुनाव लड़ते रहे हैं और यहीं से जीतकर वह पंजाब विधानसभा तक पहुंचे और पंजाब के मंत्री भी रहे, लेकिन 2012 में उनके विधानसभा हलके में पार्षद सुशील रिंकू ने टिकट पर दावेदारी पेश कर केपी परिवार के लिए चुनौती खड़ी की।
केपी की पत्नी सुमन केपी तब चुनाव लड़ रही थी और वह चुनाव हार गई। इसका ठीकरा सुशील रिंकू के सिर पर फूटा कि उनके कारण हार हुई है। 2017 में रिंकू ने केपी का पत्ता कटवाकर जालंधर वेस्ट से टिकट हासिल कर ली और केपी को आदमपुर में चुनाव लड़ने के लिए भेज दिया गया।
विज्ञापन
रिंकू तो जालंधर वेस्ट से कांग्रेस की टिकट पर जीत गए लेकिन केपी आदमपुर से हार गए। केपी कांग्रेस में हाशिये पर चले गए और रिंकू का बोलबाला दोआबा में बन गया। लिहाजा केपी अपनी सियासत में हाशिये पर जाने का जिम्मेदार रिंकू को मानते हैं। अब सियासत ने करवट ली है।
विज्ञापन
मोहिंदर सिंह केपी जालंधर वेस्ट से विधानसभा चुनाव लड़ते रहे हैं और यहीं से जीतकर वह पंजाब विधानसभा तक पहुंचे और पंजाब के मंत्री भी रहे, लेकिन 2012 में उनके विधानसभा हलके में पार्षद सुशील रिंकू ने टिकट पर दावेदारी पेश कर केपी परिवार के लिए चुनौती खड़ी की।
विज्ञापन
केपी की पत्नी सुमन केपी तब चुनाव लड़ रही थी और वह चुनाव हार गई। इसका ठीकरा सुशील रिंकू के सिर पर फूटा कि उनके कारण हार हुई है। 2017 में रिंकू ने केपी का पत्ता कटवाकर जालंधर वेस्ट से टिकट हासिल कर ली और केपी को आदमपुर में चुनाव लड़ने के लिए भेज दिया गया।
विज्ञापन
रिंकू तो जालंधर वेस्ट से कांग्रेस की टिकट पर जीत गए लेकिन केपी आदमपुर से हार गए। केपी कांग्रेस में हाशिये पर चले गए और रिंकू का बोलबाला दोआबा में बन गया। लिहाजा केपी अपनी सियासत में हाशिये पर जाने का जिम्मेदार रिंकू को मानते हैं। अब सियासत ने करवट ली है।
पवन कुमार टीनू आप से चुनाव लड़ रहे हैं। केपी के दूसरे सियासी दुश्मन पवन कुमार टीनू है। किसी समय दोआबा में केपी व चौधरी की दलित सियासत में तूती बोलती थी। पवन टीनू चौधरी जगजीत सिंह के खास होते थे और केपी के सियासी दुश्मन। जालंधर वेस्ट में विधानसभा चुनाव में केपी की हार की वजह टीनू भी रहे हैं। अब टीनू आप से हैं और केपी अकाली दल से।
चरणजीत सिंह चन्नी कांग्रेस से उम्मीदवार हैं। बेशक चन्नी केपी के निकटवर्ती रिश्तेदार हैं, लेकिन केपी खुलेआम अपने सियासी कत्ल के लिए चन्नी को जिम्मेदार ठहराते हैं। चन्नी ने सीएम रहते हुए केपी का आदमपुर से विधानसभा टिकट कटवाकर सुखविंदर कोटली को दे दिया। कोटली विधानसभा चुनाव जीत गए। सोमवार को अकाली दल में शामिल होते ही उन्होंने कहा कि मैं दो साल से आज के दिन का इंतजार कर रहा था।
खडूर साहिब पर टिकी निगाह, सुखबीर ने फिरोजपुर सीट छोड़ी
शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने लोकसभा चुनाव के लिए अपने प्रत्याशियों की दूसरी लिस्ट जारी कर जालंधर से मोहिंदर सिंह केपी, लुधियाना से रणजीत सिंह ढिल्लों, होशियारपुर से सोहन सिंह ठंडल, फिरोजपुर लोक सभा से नरदेव सिंह, बठिंडा से हरसिमरत कौर बादल, चंडीगढ़ से हरदेव सैनी को टिकट दिया है। हरसिमरत कौर बादल की टिकट बठिंडा से उसी दिन से पक्की समझी जा रही थी, जब उसने एलान किया था कि वह बठिंडा छोडकर नहीं जाएगी चाहे कुछ भी हो गए।
शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने लोकसभा चुनाव के लिए अपने प्रत्याशियों की दूसरी लिस्ट जारी कर जालंधर से मोहिंदर सिंह केपी, लुधियाना से रणजीत सिंह ढिल्लों, होशियारपुर से सोहन सिंह ठंडल, फिरोजपुर लोक सभा से नरदेव सिंह, बठिंडा से हरसिमरत कौर बादल, चंडीगढ़ से हरदेव सैनी को टिकट दिया है। हरसिमरत कौर बादल की टिकट बठिंडा से उसी दिन से पक्की समझी जा रही थी, जब उसने एलान किया था कि वह बठिंडा छोडकर नहीं जाएगी चाहे कुछ भी हो गए।
इसके पीछे परिवार का गणित भी है। पार्टी के उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक अकाली दल के लिए सबसे सेफ सीट खडूर साहब की है। जहां पर बिक्रम मजीठिया को इंचार्ज लगाया गया था, लेकिन सुखबीर बादल ने कुछ समय पहले मजीठिया को खडूर साहिब के इंचार्ज से हटा दिया था। लिहाजा, यह बात चल रही थी कि बिक्रम मजीठिया खुद लोकसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं, लेकिन पार्टी की तरफ से उसको टिकट नहीं दी जा रही थी।
बीबी हरसिमरत कौर बादल ने बठिंडा से टिकट लेकर खडूर साहब की सीट का रास्ता बिक्रम मजीठिया के लिए खाली कर दिया है। यही वजह है कि इस सीट से अकाली दल ने अभी उम्मीदवार घोषित नहीं किया है। सुखबीर बादल खुद चुनाव न लड़ने का एलान कर चुके हैं, ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि खडूर साहब से बिक्रम मजीठिया ही उम्मीदवार हो सकते हैं। बठिंडा से भी हरसिमरत कौर बादल को एक चुनौती का सामना करना होगा। अकाली नेता सिकंदर सिंह मलूका की पुत्रवधू परमपाल कौर सिद्धू भाजपा की उम्मीदवार है।
'एक परिवार-एक टिकट' की पॉलिसी
सुखबीर बादल ने अपनी फिरोजपुर सीट खाली कर नरदेव सिंह को दे दी है। पंजाब में शिरोमणि अकाली दल इस बार लोकसभा चुनाव में 'एक परिवार-एक टिकट' की पॉलिसी लागू कर एक संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि पार्टी में बाकी नेताओं को भी टिकट दी जाएगी। यही वजह है कि लोकसभा चुनाव में बादल परिवार से भी एक ही मेंबर चुनावी मैदान में उतारा गया है।
सुखबीर बादल ने अपनी फिरोजपुर सीट खाली कर नरदेव सिंह को दे दी है। पंजाब में शिरोमणि अकाली दल इस बार लोकसभा चुनाव में 'एक परिवार-एक टिकट' की पॉलिसी लागू कर एक संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि पार्टी में बाकी नेताओं को भी टिकट दी जाएगी। यही वजह है कि लोकसभा चुनाव में बादल परिवार से भी एक ही मेंबर चुनावी मैदान में उतारा गया है।
2019 में बठिंडा से हरसिमरत कौर बादल और फिरोजपुर से सुखबीर बादल ने चुनाव लड़ा था और दोनों विजयी रहे थे। अकाली दल इस बार लोकसभा चुनाव को लेकर काफी गंभीर है। पार्टी के प्रधान सुखबीर सिंह बादल ने पंजाब बचाओ यात्रा निकालकर एक बार फिर सीधे लोगों से जुड़ने की कोशिश की है। पार्टी में पुराने लाेगाें के आने से मजबूती मिली है। इसमें सीनियर नेता सुखदेव सिंह ढींडसा और जागीर कौर शामिल हैं। पर संगरूर से टिकट कटने से ढींडसा परिवार नाराज है। सुखबीर बादल इस डैमेज कंट्रोल में लगे हुए हैं। इसके अलावा पार्टी प्रधान निराश चल रहे सभी नेताओं को साधने में लगे हैं। वह पूरी तरह से प्रकाश सिंह बादल की तरह काम कर रहे हैं।