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हरियाणा में गठबंधन की राजनीति को हरियाणा ने नकारा, अवसरवादिता से ज्यादा कुछ नहीं माना
Fri, 24 May 2019 02:25 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 24 May 2019 02:25 PM IST
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- फोटो : Social Media
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हरियाणा में गठबंधन की राजनीति को जनता ने नकार दिया है। चुनावों से ठीक पहले होने वाले गठबंधनों को जनता ने अवसरवादिता से ज्यादा कुछ नहीं माना। जजपा का आप के साथ चुनावी दंगल में कूदना भी काम नहीं आया। पार्टी पहले चुनाव में कोई कमाल नहीं दिखा पाई। यहां तक कि पार्टी के सबसे बड़े चेहरे व सांसद दुष्यंत चौटाला खुद बड़े अंतर से अपनी सीट गंवा बैठे। उनके साथ ही इनसो के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पार्टी के दूसरे युवा चेहरे दिग्विजय चौटाला भी सोनीपत में बुरी तरह चित हुए।
आप के साथ गठबंधन का जजपा को न के बराबर लाभ मिला। दिग्विजय व आप के प्रदेशाध्यक्ष की तो खुद की जमानत तक जब्त हो गई। दुष्यंत के अलावा जजपा और आप गठबंधन के सभी उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई। शायद यही कारण था कि आप दिल्ली के साथ ही हरियाणा में कांग्रेस के साथ गठबंधन के लिए अंतिम समय तक आतुर रही। कांग्रेस और आप के बीच गठबंधन में कांग्रेस दिग्गजों के अलावा जजपा भी बड़ा रोड़ा बनी। अब जजपा-आप गठबंधन का भविष्य क्या होगा, यह यक्ष प्रश्न है।
विधानसभा चुनाव के लिए प्रदेश में गठबंधन के नए समीकरण बनना तय है। चूंकि, लोकसभा चुनाव में करारी हार से कांग्रेस के साथ ही अन्य दल भी सबक लेंगे। बसपा-लोसुपा गठबंधन का हश्र भी लोकसभा चुनाव में किसी से छिपा नहीं है। बसपा उम्मीदवारों के लिए सुखद ये रहा कि उन्होंने कुछ सीटों पर इनेलो, जजपा व आप उम्मीदवारों से ज्यादा वोट हासिल किए हैं। बसपा ने लोकसभा चुनाव से ठीक पहले इनेलो के साथ गठबंधन तोड़कर राजकुमार सैनी की पार्टी लोसुपा के साथ हाथ मिलाया था।
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बसपा के लिए लोसुपा का साथ कोई करिश्मा नहीं दिखा पाया। गठबंधन उम्मीदवार वोट कटवा ही साबित हुए। दोनों दलों के बीच गठबंधन की गांठ कब खुल जाए, इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता। चूंकि, हरियाणा में बसपा का हाथी किसी का स्थायी दोस्त नहीं रहा है। ऐसे में बसपा विधानसभा चुनाव से पहले किसी और दल से भी हाथ मिला सकती है।
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आप के साथ गठबंधन का जजपा को न के बराबर लाभ मिला। दिग्विजय व आप के प्रदेशाध्यक्ष की तो खुद की जमानत तक जब्त हो गई। दुष्यंत के अलावा जजपा और आप गठबंधन के सभी उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई। शायद यही कारण था कि आप दिल्ली के साथ ही हरियाणा में कांग्रेस के साथ गठबंधन के लिए अंतिम समय तक आतुर रही। कांग्रेस और आप के बीच गठबंधन में कांग्रेस दिग्गजों के अलावा जजपा भी बड़ा रोड़ा बनी। अब जजपा-आप गठबंधन का भविष्य क्या होगा, यह यक्ष प्रश्न है।
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विधानसभा चुनाव के लिए प्रदेश में गठबंधन के नए समीकरण बनना तय है। चूंकि, लोकसभा चुनाव में करारी हार से कांग्रेस के साथ ही अन्य दल भी सबक लेंगे। बसपा-लोसुपा गठबंधन का हश्र भी लोकसभा चुनाव में किसी से छिपा नहीं है। बसपा उम्मीदवारों के लिए सुखद ये रहा कि उन्होंने कुछ सीटों पर इनेलो, जजपा व आप उम्मीदवारों से ज्यादा वोट हासिल किए हैं। बसपा ने लोकसभा चुनाव से ठीक पहले इनेलो के साथ गठबंधन तोड़कर राजकुमार सैनी की पार्टी लोसुपा के साथ हाथ मिलाया था।
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बसपा के लिए लोसुपा का साथ कोई करिश्मा नहीं दिखा पाया। गठबंधन उम्मीदवार वोट कटवा ही साबित हुए। दोनों दलों के बीच गठबंधन की गांठ कब खुल जाए, इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता। चूंकि, हरियाणा में बसपा का हाथी किसी का स्थायी दोस्त नहीं रहा है। ऐसे में बसपा विधानसभा चुनाव से पहले किसी और दल से भी हाथ मिला सकती है।