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लोकसभा चुनावः चंडीगढ़ से कांग्रेस के मनीष तिवारी ने पेश की दावेदारी, टिकट बनी नाक का सवाल
Mon, 28 Jan 2019 10:06 AM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 28 Jan 2019 10:06 AM IST
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मनीष तिवारी
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आगामी लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस में टिकट की लड़ाई दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गई है। पंजाब कांग्रेस की वरिष्ठ नेता व पंजाब के कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर सिद्धू के बाद अब पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने भी चंडीगढ़ लोकसभा सीट से टिकट के लिए अपना दावा पेश किया। रविवार को वह समर्थकों के साथ कांग्रेस भवन पहुंचे और प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप छाबड़ा को अपना आवेदन सौंपा। इस मौके पर उन्होंने कहा कि अपनी दावेदारी करना या इच्छा जाहिर करना हर कार्यकर्ता का अधिकार है। चंडीगढ़ से उनका पुराना नाता रहा है। यह उनकी जन्मभूमि है।
यह पूछे जाने पर कि यदि टिकट नहीं मिलता तो क्या करेंगे, इस पर उनका जवाब था कि कांग्रेस संगठित है। जो भी उम्मीदवार होगा, प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में जीतकर हासिल करेगा। बता दें कि मनीष तिवारी साल 2009 में लोकसभा सीट से संसद पहुंचे थे। वह यूपीए सरकार में सूचना एवं प्रसारण मंत्री रहे हैं। मनीष तिवारी की मां पीजीआई की डीन और नगर निगम की मनोनीत पार्षद भी रह चुकी हैं जबकि उनके पिता पंजाब यूनिवर्सिटी में पंजाबी भाषा विभाग के एचओडी थे। आतंकवादियों ने उनकी हत्या कर दी थी। केंद्र में राहुल और सोनिया गांधी के करीबी हैं। चंडीगढ़ से पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन बंसल भी टिकट के लिए दावेदार हैं। वह पिछले 40 साल से यहां पर सक्रिय हैं। सात बार चुनाव लड़ चुके हैं, जिनमें चार बार जीते और तीन बार हारे। एक बार केंद्रीय मंत्री भी रहे हैं।
नवजोत की सुगबुगाहट से बंसल का नाम हुआ था प्रस्तावित
शहरवासियों में चर्चा है कि आखिर कांग्रेसियों में टिकट के लिए इतनी हड़बड़ाहट क्यों है? दरअसल, नवजोत कौर ने गणतंत्र दिवस पर धनास में कार्यक्रम रखा था। इसकी भनक बंसल ग्रुप को लग गई। बंसल ग्रुप से जुड़े कांग्रेसियों को लगा कि नवजोत कौर अपनी सरगर्मियां बढ़ाएं, उससे पहले सर्वसम्मति से बंसल के नाम का प्रस्ताव कर दिया जाए। कांग्रेस भवन में एक मीटिंग हुई थी। मीटिंग किसी और मसले पर बुलाई गई थी, लेकिन पार्षद देविंदर सिंह बबला ने बंसल के नाम का प्रस्ताव रख दिया और उसके बाद सभी ने बंसल के नाम पर मुहर लगा दी। हालांकि कुछ कांग्रेसियों का कहना है कि वे इस प्रस्ताव से खुश नहीं थे, क्योंकि अब तक कांग्रेस की ओर से अधिकारिक तौर पर उम्मीदवारों के दावेदारों के लिए कोई भी निर्देश नहीं आए हैं। चंडीगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से बंसल का नाम प्रस्तावित होने के बाद नवजोत कौर और उसके बाद मनीष तिवारी ने भी आवेदन कर दिया।
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इसलिए दिखा रहे हड़बड़ाहट
यह सीट फिलहाल भाजपा के पास है। किरण खेर मौजूदा सांसद हैं। दरअसल, कांग्रेसियों को लग रहा है कि इस बार पंजाब में माहौल उनके पक्ष में है। मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान का चुनावी परिणाम ने भी जान फूंकने का काम किया है। दूसरी तरफ चंडीगढ़ में बीजेपी की गुटबाजी की भी काफी चर्चा रही है। ऐसे में कांग्रेसी मान रहे हैं कि इस बार उनके लिए कई सारी स्थिति अनुकूल है इसलिए कांग्रेसियों के लिए चंडीगढ़ हॉट सीट बन गई है।
गणतंत्र दिवस पर दावेदारों ने किए कार्यक्रम
कांग्रेस के टिकट के तीनों दावेदार गणतंत्र दिवस के मौके पर शहर में मौजूद रहे। टिकट भले ही फाइनल न हो, लेकिन उन्होंने अपने स्तर पर जनसंपर्क शुरू कर दिया है। नवजोत कौर ने धनास में जनसभा को संबोधित किया, जबकि पवन बंसल ने शिवालिक गार्डन के सामने पिपली वाला टाउन वेलफेयर एसोसिएशन के कार्यक्रम में शिरकत की। मनीष तिवारी ने मौलीजांगरा में कार्यक्रम किया। तीनों की सभा में अच्छी खासी भीड़ थी।
टिकटों के आवेदन करने की अब तक कोई तारीख फाइनल नहीं हुई है और न ही हाईकमान की ओर से कोई निर्देश आए हैं। जो भी आवेदन आएंगे, उन्हें आलाकमान के पास भेज दिया जाएगा। टिकट का फैसला हाईकमान ही करेगा।
- प्रदीप छाबड़ा, अध्यक्ष चंडीगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी
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यह पूछे जाने पर कि यदि टिकट नहीं मिलता तो क्या करेंगे, इस पर उनका जवाब था कि कांग्रेस संगठित है। जो भी उम्मीदवार होगा, प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में जीतकर हासिल करेगा। बता दें कि मनीष तिवारी साल 2009 में लोकसभा सीट से संसद पहुंचे थे। वह यूपीए सरकार में सूचना एवं प्रसारण मंत्री रहे हैं। मनीष तिवारी की मां पीजीआई की डीन और नगर निगम की मनोनीत पार्षद भी रह चुकी हैं जबकि उनके पिता पंजाब यूनिवर्सिटी में पंजाबी भाषा विभाग के एचओडी थे। आतंकवादियों ने उनकी हत्या कर दी थी। केंद्र में राहुल और सोनिया गांधी के करीबी हैं। चंडीगढ़ से पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन बंसल भी टिकट के लिए दावेदार हैं। वह पिछले 40 साल से यहां पर सक्रिय हैं। सात बार चुनाव लड़ चुके हैं, जिनमें चार बार जीते और तीन बार हारे। एक बार केंद्रीय मंत्री भी रहे हैं।
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नवजोत की सुगबुगाहट से बंसल का नाम हुआ था प्रस्तावित
शहरवासियों में चर्चा है कि आखिर कांग्रेसियों में टिकट के लिए इतनी हड़बड़ाहट क्यों है? दरअसल, नवजोत कौर ने गणतंत्र दिवस पर धनास में कार्यक्रम रखा था। इसकी भनक बंसल ग्रुप को लग गई। बंसल ग्रुप से जुड़े कांग्रेसियों को लगा कि नवजोत कौर अपनी सरगर्मियां बढ़ाएं, उससे पहले सर्वसम्मति से बंसल के नाम का प्रस्ताव कर दिया जाए। कांग्रेस भवन में एक मीटिंग हुई थी। मीटिंग किसी और मसले पर बुलाई गई थी, लेकिन पार्षद देविंदर सिंह बबला ने बंसल के नाम का प्रस्ताव रख दिया और उसके बाद सभी ने बंसल के नाम पर मुहर लगा दी। हालांकि कुछ कांग्रेसियों का कहना है कि वे इस प्रस्ताव से खुश नहीं थे, क्योंकि अब तक कांग्रेस की ओर से अधिकारिक तौर पर उम्मीदवारों के दावेदारों के लिए कोई भी निर्देश नहीं आए हैं। चंडीगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से बंसल का नाम प्रस्तावित होने के बाद नवजोत कौर और उसके बाद मनीष तिवारी ने भी आवेदन कर दिया।
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इसलिए दिखा रहे हड़बड़ाहट
यह सीट फिलहाल भाजपा के पास है। किरण खेर मौजूदा सांसद हैं। दरअसल, कांग्रेसियों को लग रहा है कि इस बार पंजाब में माहौल उनके पक्ष में है। मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान का चुनावी परिणाम ने भी जान फूंकने का काम किया है। दूसरी तरफ चंडीगढ़ में बीजेपी की गुटबाजी की भी काफी चर्चा रही है। ऐसे में कांग्रेसी मान रहे हैं कि इस बार उनके लिए कई सारी स्थिति अनुकूल है इसलिए कांग्रेसियों के लिए चंडीगढ़ हॉट सीट बन गई है।
गणतंत्र दिवस पर दावेदारों ने किए कार्यक्रम
कांग्रेस के टिकट के तीनों दावेदार गणतंत्र दिवस के मौके पर शहर में मौजूद रहे। टिकट भले ही फाइनल न हो, लेकिन उन्होंने अपने स्तर पर जनसंपर्क शुरू कर दिया है। नवजोत कौर ने धनास में जनसभा को संबोधित किया, जबकि पवन बंसल ने शिवालिक गार्डन के सामने पिपली वाला टाउन वेलफेयर एसोसिएशन के कार्यक्रम में शिरकत की। मनीष तिवारी ने मौलीजांगरा में कार्यक्रम किया। तीनों की सभा में अच्छी खासी भीड़ थी।
टिकटों के आवेदन करने की अब तक कोई तारीख फाइनल नहीं हुई है और न ही हाईकमान की ओर से कोई निर्देश आए हैं। जो भी आवेदन आएंगे, उन्हें आलाकमान के पास भेज दिया जाएगा। टिकट का फैसला हाईकमान ही करेगा।
- प्रदीप छाबड़ा, अध्यक्ष चंडीगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी