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लोकसभा चुनावः गुरदासपुर में किसी अभिनेता पर दांव खेल सकती है बीजेपी, 3 ने ठोंका दावा
Sun, 10 Feb 2019 10:06 AM IST
खुशबू गोयल
मनन सैनी/अमर उजाला, गुरदासपुर(पंजाब)
मनन सैनी/अमर उजाला, गुरदासपुर(पंजाब)
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sun, 10 Feb 2019 10:06 AM IST
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BJP
- फोटो : social media
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आगामी लोकसभा चुनाव में लोकसभा हलका गुरदासपुर से अपनी जीत सुनिश्चित बनाने के लिए भारतीय जनता पार्टी किसी अभिनेता पर दांव खेल सकती है। चर्चा है कि अक्षय खन्ना या अक्षय कुमार को मैदान में उतारा जा सकता है। हालांकि हलके से विनोद खन्ना की पत्नी कविता खन्ना, स्वर्ण सलारिया और पूर्व मंत्री मास्टर मोहन लाल सीट से अपनी दावेदारी जता चुके है। कांग्रेस का गढ़ माने जाने वाले इस लोकसभा हलके से पांच बार सांसद रह चुकी स्वर्गीय सुखबंस कौर भिंडर को हराने के लिए भाजपा ने 1998 में सिने स्टार विनोद खन्ना को मैदान में उतारा था।
खन्ना ने भिंडर को पहली बार 1 लाख 6 हजार 833 मतों से पराजित किया। वर्ष 1999 के चुनावों में खन्ना महज 1399 मतों से विजेता रहे। उसके बाद 2004 के चुनावों में दोबारा सुखबंस कौर भिंडर को उतारा गया। वह फिर 24 हजार 983 मतों से पराजित हुई। खन्ना कांग्रेस का गढ़ ध्वस्त करने में कामयाब हो गए थे। वर्ष 2006 में भिंडर के निधन के उपरांत कांग्रेस ने 2009 के चुनावों में प्रताप सिंह बाजवा को खन्ना के खिलाफ मैदान में उतारा। प्रताप सिंह बाजवा ने खन्ना को 8342 मतों से पराजित किया।
2014 के चुनावों में विनोद खन्ना ने 1 लाख 36 हजार 065 मतों से बाजवा को हराया। इसके बाद विनोद खन्ना का अप्रैल 2017 में निधन होने बाद 2017 में ही उपचुनाव करवाए गए। 2017 के उपचुनाव में कांग्रेस ने प्रदेश प्रधान सुनील जाखड़ और भाजपा की ओर से स्वर्ण सलारिया मैदान में उतारा। सलारिया को कुल 1 लाख 93 हजार 219 मतों से पराजित कर कांग्रेस के सुनील जाखड़ ने जीत हासिल की। तीन राज्यों में करारी हार ने भाजपा को फूंक फूंक कर कदम रखने को मजबूर कर दिया है। इसके चलते भाजपा ने उम्मीदवारों का मूल्यांकन करना शुरू कर दिया है।
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दावेदारों की सूची में से नाम छांट कर राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के समक्ष 24 फरवरी को अमृतसर दौरे के दौरान पेश किए जाएगी। गुरदासपुर में कांग्रेस का किला दोबारा न बन सके इसी रणनीति के चलते भाजपा विनोद खन्ना की ही तरह किसी बॉलीवुड स्टार के नाम पर भी विचार कर रही है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस की पंजाब इंचार्ज आशा कुमारी की तरफ से सुनील जाखड़ को हरी झंडी मिल चुकी है। फिलहाल बाजवा ने अपनी दावेदारी पेश नही की।
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खन्ना ने भिंडर को पहली बार 1 लाख 6 हजार 833 मतों से पराजित किया। वर्ष 1999 के चुनावों में खन्ना महज 1399 मतों से विजेता रहे। उसके बाद 2004 के चुनावों में दोबारा सुखबंस कौर भिंडर को उतारा गया। वह फिर 24 हजार 983 मतों से पराजित हुई। खन्ना कांग्रेस का गढ़ ध्वस्त करने में कामयाब हो गए थे। वर्ष 2006 में भिंडर के निधन के उपरांत कांग्रेस ने 2009 के चुनावों में प्रताप सिंह बाजवा को खन्ना के खिलाफ मैदान में उतारा। प्रताप सिंह बाजवा ने खन्ना को 8342 मतों से पराजित किया।
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2014 के चुनावों में विनोद खन्ना ने 1 लाख 36 हजार 065 मतों से बाजवा को हराया। इसके बाद विनोद खन्ना का अप्रैल 2017 में निधन होने बाद 2017 में ही उपचुनाव करवाए गए। 2017 के उपचुनाव में कांग्रेस ने प्रदेश प्रधान सुनील जाखड़ और भाजपा की ओर से स्वर्ण सलारिया मैदान में उतारा। सलारिया को कुल 1 लाख 93 हजार 219 मतों से पराजित कर कांग्रेस के सुनील जाखड़ ने जीत हासिल की। तीन राज्यों में करारी हार ने भाजपा को फूंक फूंक कर कदम रखने को मजबूर कर दिया है। इसके चलते भाजपा ने उम्मीदवारों का मूल्यांकन करना शुरू कर दिया है।
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दावेदारों की सूची में से नाम छांट कर राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के समक्ष 24 फरवरी को अमृतसर दौरे के दौरान पेश किए जाएगी। गुरदासपुर में कांग्रेस का किला दोबारा न बन सके इसी रणनीति के चलते भाजपा विनोद खन्ना की ही तरह किसी बॉलीवुड स्टार के नाम पर भी विचार कर रही है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस की पंजाब इंचार्ज आशा कुमारी की तरफ से सुनील जाखड़ को हरी झंडी मिल चुकी है। फिलहाल बाजवा ने अपनी दावेदारी पेश नही की।