फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Lockdown Affected Businessman are waiting for relief announced by Chandigarh Administration 

इंतजार: 17 मई को मिला था लॉकडाउन प्रभावितों को राहत का आश्वासन, 17 जून आया... कोई घोषणा तक नहीं 

Thu, 17 Jun 2021 12:59 PM IST
निवेदिता वर्मा रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 17 Jun 2021 12:59 PM IST
सार

कारोबारियों की मांग है कि कोरोना और मिनी लॉकडाउन की वजह से व्यापारियों का समय अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है। इसे ध्यान में रखते हुए कम से कम 6 महीने के समय को अनिश्चितता का दौर मानते हुए व्यापारियों की सभी प्रकार की सरकारी देनदारियों को निरस्त कर दिया जाना चाहिए।

विज्ञापन
Lockdown Affected Businessman are waiting for relief announced by Chandigarh Administration 
अधिकारियों के साथ बैठक करते प्रशासक वीपी सिंह बदनौर। - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

कोरोना वायरस की वजह से पहली बार लगे लॉकडाउन के घाटे से अभी चंडीगढ़ के लोग, व्यापारी व उद्योग उबरे नहीं थे कि दूसरी लहर ने फिर कारोबार चौपट कर दिया। इसे देखते हुए प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने 17 मई को वॉर रूम की बैठक में लोगों को कुछ राहत देने की बात कही थी, लेकिन 17 जून आ गया है और अभी तक लोग उस 'राहत' का इंतजार कर रहे हैं। 

विज्ञापन


प्रशासक ने डीसी मनदीप सिंह बराड़ की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई थी। करीब एक हफ्ते बाद डीसी ने विभिन्न व्यापारियों, बाजार संघों और उद्योग संघों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की और उनसे लिखित में सुझाव मांगे। कुछ ही दिनों बाद सभी ने लिखित में प्रॉपर्टी टैक्स, बिजली के फिक्स चार्जेस, कर्ज पर ब्याज, कर्मियों को तनख्वाह देने में मदद करने, सरकारी लीज मनी, किराया आदि को माफ करने का आग्रह किया। 
विज्ञापन



प्रतिनिधियों को आश्वासन तो मिला, लेकिन अभी तक प्रशासन की तरफ से राहत नहीं दी गई है। चैंबर ऑफ चंडीगढ़ इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष नवीन मंगलानी का कहना है कि उद्योग जगत कोरोना की वजह से काफी प्रभावित हुआ है, तुरंत राहत की दरकार है। उन्होंने कहा कि प्रॉपर्टी टैक्स जो कि एक कनाल के प्लॉट का साल का करीब 20 हजार रुपये होता है और बिजली के फिक्स चार्जेस को तो प्रशासन माफ कर ही सकता है, क्योंकि इस बारे में चंडीगढ़ के स्तर पर फैसला लिया जाना है। मंगलानी ने बताया कि उन्हें 200 रुपये प्रति किलोवॉट फिक्स चार्जेस देने पड़ते हैं। पिछली बार प्रशासन ने 25 प्रतिशत माफ किया था, लेकिन इस बार सिर्फ बातें ही हुई हैं। धरातल पर कोई राहत नहीं मिली है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

बैंक कर्ज के ब्याज से प्रभावित हो रहे हैं लोग

लॉकडाउन की वजह से आमदनी आधी हो गई, जिसकी वजह से जिन लोगों ने बैंक से कर्ज लेकर कोई काम शुरू किया है, वह सबसे ज्यादा परेशान हैं। इसकी वजह से आम लोग, छोटे दुकानदार, युवा उद्यमी, छोटे-बड़े व्यापारी, उद्योगपति प्रभावित हैं। उद्योग व्यापार मंडल (चंडीगढ़) ने लिखित में प्रशासन से बैंक कर्ज के ब्याज से राहत की मांग की थी। हालांकि, यह प्रशासन के हाथ में नहीं है, लेकिन व्यापारियों व उद्योगपतियों का कहना है कि प्रशासन केंद्र के समक्ष इस मुद्दे को प्रमुखता से उठा सकता है। संयोजक कैलाश चंद जैन का कहना है कि कोरोना महामारी और मिनी लॉकडाउन की वजह से व्यापारियों का समय अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है। इसे ध्यान में रखते हुए कम से कम 6 महीने के समय को अनिश्चितता का दौर मानते हुए व्यापारियों की सभी प्रकार की सरकारी देनदारियों को निरस्त कर दिया जाना चाहिए।

दूसरों से किराया माफ करने का आग्रह, खुद वसूल रहे जुर्माना
17 मई को ही प्रशासक बदनौर ने शहरवासियों से आग्रह किया था कि अगर उनके पास कोई किराये पर रहता है तो उससे आधा ही किराया लें, क्योंकि लॉकडाउन की वजह से सभी व्यक्तियों की आमदनी पर काफी असर पड़ा है। दूसरी ओर, चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड समेत कई सरकारी विभाग किराया माफ करना तो दूर जो किराया जमा नहीं करा पा रहे हैं, उनसे जुर्माना भी वसूल रहे हैं। उदाहरण के लिए स्मॉल फ्लैट में रहने वाले हजारों लोगों से सीएचबी किराया तो वसूल ही रहा है, लॉकडाउन में जो किराया नहीं जमा कर पा रहे हैं, उनसे जुर्माने के तौर पर 12 प्रतिशत का ब्याज भी वसूल रहा है। लोगों की मांग है कि सीएचबी की तरफ से कोरोना काल में कम से कम किराये पर ब्याज न वसूला जाए।

विभिन्न व्यापारियों, बाजार संघों और उद्योग संघों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर उनके सुझाव लिए थे। उन्होंने जिन-जिन मदों में राहत की मांग की थी, उनकी एक रिपोर्ट बनाकर प्रशासक को भेज दी है। अब प्रशासक ही राहत देने संबंधी कोई फैसला लेंगे।  - मनदीप सिंह बराड़, डीसी
 

हमारे पास सभी के सुझाव आ गए हैं। लोगों ने प्रॉपर्टी टैक्स, बिजली बिल आदि को माफ करने का आग्रह किया है, लेकिन चंडीगढ़ एक केंद्र शासित प्रदेश हैं। ऐसे में हम ज्यादा कुछ राहत नहीं दे सकते हैं।  -  मनोज परिदा, सलाहकार, यूटी प्रशासक

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed