घाटे का बजट : पंजाब में जन्म लेने वाले हर बच्चे पर 82 हजार रुपये से अधिक का कर्ज
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सरकारें आईं और गईं लेकिन पंजाब कर्जदार होता रहा। धीरे-धीरे 10 साल में पंजाब राज्य 2.73 लाख करोड़ रुपये के कर्ज में दब चुका है। इस बार भी बजट में सूबे के कर्ज को उतारने के लिए कोई भी ठोस योजना वित्तमंत्री मनप्रीत बादल ने पेश नहीं की है। 2021-22 में अब यह कर्ज 273703 पहुंचने का अनुमान है। 2010-11 में 74777 करोड़ रुपये राज्य पर कर्ज था।
हालात इस कदर खराब हो चुके हैं कि सूबे में पैदा होने वाला प्रत्येक बच्चा 82 हजार रुपये से अधिक का कर्जदार है। वित्त मंत्री ने सदन में अपने भाषण के दौरान यह दावा जरूर किया है कि इस बार उन्होंने कुल देनदारी में 300 करोड़ रुपये की कमी है लेकिन उनका यह दावा सिर्फ आंकड़ों तक ही है। धरातल पर हालात कुछ और ही हैं। पिछले वित्तीय वर्ष 2020-21 में भी राज्य के कर्ज में 20823 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई थी, वैसे ही इस वित्तीय वर्ष में भी हालात बन गए हैं। इस वित्तीय वर्ष 2021-22 में भी पंजाब पर 20 हजार करोड़ से अधिक का कर्ज लद जाएगा।
कर्ज के आंकड़ों पर नजर डालें तो दस सालों में कर्ज 74777 करोड़ से बढ़कर 273703 करोड़ होने जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि वर्ष 1986 में पंजाब का बजट सरप्लस था, इसके बाद अभी तक सूबे में सरप्लस बजट पेश नहीं किया जा सका है। सबसे भयावह हालात यह हैं कि पंजाब सरकार को कर्ज की किस्तें चुकाने के लिए भी कर्ज ही लेना पड़ रहा है।
सात साल में हुई 10 हजार करोड़ की किस्त
सूबे में कर्ज के साथ ही कर्ज के ब्याज की किस्त में भी इजाफा हुआ है। 2015-16 में पंजाब पर 128835 हजार करोड़ रुपये कर्ज था, जब राज्य इस कर्ज की अदायगी के लिए 9782 करोड़ रुपये की किस्त की अदायगी करता था। सात साल के आंकड़ों की यदि हम बात करें तो अब यह किस्त बढ़कर 20316 रुपये तक पहुंच गई है, यानि 10534 करोड़ रुपये की किस्त में वृद्धि हुई है।
- वित्त वर्ष कर्ज का बोझ दिया
- 2015-16 128835 9782
- 2016-17 182526 11642
- 2017-18 195152 15334
- 2018-19 211917 16306
- 2019-20 228906 17625
- 2020-21 252880 18589
- 2021-22 273703 20316
नोट: पंजाब में कर्ज और ब्याज की दर करोड़ रुपये में दी गई है।