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शराब घोटाला: विजिलेंस जांच की सिफारिश पर सीएमओ में मंथन, विद्यार्थी के पक्ष में उतरे दुष्यंत
Wed, 12 Aug 2020 04:10 PM IST
खुशबू गोयल
प्रवीण पाण्डेय, चंडीगढ़
प्रवीण पाण्डेय, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 12 Aug 2020 04:10 PM IST
सार
- प्रतीक्षा गोदारा ने रविवार को चंडीगढ़ पहुंच सीएमओ में दी अपनी दलील
- जांच सौंपने से पहले खींचतान, दुष्यंत शेखर विद्यार्थी के पक्ष में उतरे
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फाइल फोटो
विस्तार
हरियाणा के बहुचर्चित शराब घोटाले की जांच विजिलेंस को दी जा सकती है। इसके पहले ही खींचतान शुरू हो गई है। आईएएस लॉबी जहां शेखर विद्यार्थी के पक्ष में है। वहीं उपमुख्यमंत्री भी विद्यार्थी को शराब घोटाले की आंच से दूर रखने पर अड़े हैं। अब मंथन तत्कालीन एसपी प्रतीक्षा गोदारा की जांच को लेकर चल रहा है।
जांच से पहले ही गोदारा ने सीएमओ में अपनी सफाई पेश कर दी है। सूत्रों के मुताबिक रविवार रात साढ़े नौ बजे के करीब प्रतीक्षा गोदारा ने अपनी दलील सीएमओ के अधिकारियों के समक्ष रखी और खुद को इस मामले से अलग बताया। आईएएस लाबी के कुछ अधिकारी शेखर विद्यार्थी के पक्ष में आ गए हैं।
मुख्यमंत्री को भी कुछ अधिकारियों ने इस विषय में ब्रीफ किया है कि शेखर की कार्यप्रणाली इस तरह की नहीं है। उनके पुराने ट्रैक रिकार्ड का भी हवाला दिया गया है। डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला इस पूरे मामले में शुरू से शेखर विद्यार्थी के पक्ष में खड़े हैं। वे स्वयं भी इस जांच की आंच से शेखर विद्यार्थी को अलग रखना चाहते हैं।
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ऐसे में प्रतीक्षा गोदारा को विजिलेंस के कठिन सवालों का सामना करना पड़ सकता है। उन्हें यह बताना होगा कि किन परिस्थितियों में आरोपी भूपेंद्र को गनमैन दिए गए हैं।
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जांच से पहले ही गोदारा ने सीएमओ में अपनी सफाई पेश कर दी है। सूत्रों के मुताबिक रविवार रात साढ़े नौ बजे के करीब प्रतीक्षा गोदारा ने अपनी दलील सीएमओ के अधिकारियों के समक्ष रखी और खुद को इस मामले से अलग बताया। आईएएस लाबी के कुछ अधिकारी शेखर विद्यार्थी के पक्ष में आ गए हैं।
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मुख्यमंत्री को भी कुछ अधिकारियों ने इस विषय में ब्रीफ किया है कि शेखर की कार्यप्रणाली इस तरह की नहीं है। उनके पुराने ट्रैक रिकार्ड का भी हवाला दिया गया है। डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला इस पूरे मामले में शुरू से शेखर विद्यार्थी के पक्ष में खड़े हैं। वे स्वयं भी इस जांच की आंच से शेखर विद्यार्थी को अलग रखना चाहते हैं।
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ऐसे में प्रतीक्षा गोदारा को विजिलेंस के कठिन सवालों का सामना करना पड़ सकता है। उन्हें यह बताना होगा कि किन परिस्थितियों में आरोपी भूपेंद्र को गनमैन दिए गए हैं।
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दोनों अधिकारियों भूमिका पर हो रहा मंथन
सीएमओ में इस मामले में दोनों अधिकारियों की भूमिका पर मंथन चल रहा है। इसके बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा। इस बारे में भी वरिष्ठ अधिकारियों से पूछा गया है कि डिस्टलरी की जांच के लिए मना क्यों किया गया था। साथ ही शराब ठेके बंद करने के आर्डर लिखित में क्यों नहीं दिए गए।
सरकार लगातार जांच पर जांच करवाए जा रही है। इसका क्या मतलब है। पहले अनिल विज एसआईटी बनवाने के लिए अड़े थे, लेकिन सरकार ने एसईटी बनाई। जिसे शक्तियां ही नहीं दी। जिसके कारण उसे डिस्टलरी में घुसने से रोक दिया गया। फिर जांच का फायदा क्या हुआ।
- भूपेंद्र सिंह हुड्डा, पूर्व सीएम
सरकार लगातार जांच पर जांच करवाए जा रही है। इसका क्या मतलब है। पहले अनिल विज एसआईटी बनवाने के लिए अड़े थे, लेकिन सरकार ने एसईटी बनाई। जिसे शक्तियां ही नहीं दी। जिसके कारण उसे डिस्टलरी में घुसने से रोक दिया गया। फिर जांच का फायदा क्या हुआ।
- भूपेंद्र सिंह हुड्डा, पूर्व सीएम