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दीये व मोमबत्ती का उजाला कोरोना से लड़ने की ताकत देगा, रिफ्रेशनेस व अलर्टनेस बढ़ेगी
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चंडीगढ़। कोरोना के खौफ ने लोगों का तनाव बढ़ा दिया है। कहीं न कहीं बीमारियों से लड़ने का आत्मविश्वास भी कम हो गया है। लॉकडाउन के कारण बंद कमरे में रहने से तमाम तरह के ख्याल आ रहे हैं। इन सभी के बीच पीएम नरेंद्र मोदी का दीये व मोमबत्ती जलाने का कार्यक्रम सभी लोगों को एक नई एनर्जी देगा। यह बात पंजाब विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग के प्रो. रोशन लाल व चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय भिवानी हरियाणा के मनोविज्ञान विभाग के प्रो. राधेश्याम ने कही।
उन्होंने कहा, ‘यह लोगों में आत्मविश्वास जगाने का काम करेगा। लोगों को महसूस होगा कि वह कोरोना का डटकर मुकाबला करेंगे, इतनी जान उनमें है।’ उन्होंने बताया कि कोविड को सीमित करने का यह मैकेनिज्म है। इसके जरिये लोगों की रिफ्रेशनस व एलर्टनेस बढ़ेगी।
भय होगा दूर, अच्छी नींद आएगी : प्रो. रोशन लाल
फोटो--
प्रो. रोशन लाल कहते हैं कि दीये व मोमबत्ती जलाना हमारी परंपरा रही है। कोविड-19 का लोगों के दिमाग पर इतना नकारात्मक प्रभाव हो गया है कि वह दबाव महसूस कर रहे हैं। इससे तनाव बढ़ रहा है। एक ही घर में बंद रहकर बार-बार कोरोना की ही खबरें आ रही हैं। ऐसे में उन लोगों की एनर्जी वापस लाने के लिए दीये व मोमबत्ती काम करेंगे। इसके अलावा लोगों कों दीये व मोमबत्ती की लाइटें अधिक पसंद होती हैं। ऐसे में वह जलाएंगे तो उन्हें ऊर्जा का संचार होगा। हर व्यक्ति को कोई न कोई कलर पसंद होता है। यदि कम रोशनी देने वाली ऑरेंज लाइट जलाएंगे तो इससे सकारात्मक एनर्जी आएगी। रेड व ब्लू लाइट से अच्छी नींद आएगी। मूड अच्छा बना रहेगा।
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मायूसी से निकलेंगे बाहर, ऊर्जा का होगा संचार : प्रो. राधेश्याम
फोटो-----
प्रो. राधे श्याम कहते हैं कि कोविड-19 का कोई इलाज नहीं है। इस कारण लॉकडाउन चल रहा है ताकि लोग संपर्क में न आएं। वह घरों में रहने से मायूसी महसूस कर रहे हैं। उनमें ऊर्जा का संचार करने के लिए दीये व मोमबत्ती अच्छा काम करेंगी। इसके जरिये एकजुटता का भी संदेश जाएगा। जैसे ही अलग रोशनी लोग देखेंगे तो वह अपने को आइसोलेशन से बाहर महसूस करेंगे। इससे उनका हौसला व ताकत बढ़ेगी। ऐसा होने से लोग फिर से फ्रेश महसूस करेंगे जैसे कोविड के आगमन से पहले थे। यह दीये व मोमबत्ती का उजाला कोविड से लड़ने की ताकत देगा।
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उन्होंने कहा, ‘यह लोगों में आत्मविश्वास जगाने का काम करेगा। लोगों को महसूस होगा कि वह कोरोना का डटकर मुकाबला करेंगे, इतनी जान उनमें है।’ उन्होंने बताया कि कोविड को सीमित करने का यह मैकेनिज्म है। इसके जरिये लोगों की रिफ्रेशनस व एलर्टनेस बढ़ेगी।
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भय होगा दूर, अच्छी नींद आएगी : प्रो. रोशन लाल
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प्रो. रोशन लाल कहते हैं कि दीये व मोमबत्ती जलाना हमारी परंपरा रही है। कोविड-19 का लोगों के दिमाग पर इतना नकारात्मक प्रभाव हो गया है कि वह दबाव महसूस कर रहे हैं। इससे तनाव बढ़ रहा है। एक ही घर में बंद रहकर बार-बार कोरोना की ही खबरें आ रही हैं। ऐसे में उन लोगों की एनर्जी वापस लाने के लिए दीये व मोमबत्ती काम करेंगे। इसके अलावा लोगों कों दीये व मोमबत्ती की लाइटें अधिक पसंद होती हैं। ऐसे में वह जलाएंगे तो उन्हें ऊर्जा का संचार होगा। हर व्यक्ति को कोई न कोई कलर पसंद होता है। यदि कम रोशनी देने वाली ऑरेंज लाइट जलाएंगे तो इससे सकारात्मक एनर्जी आएगी। रेड व ब्लू लाइट से अच्छी नींद आएगी। मूड अच्छा बना रहेगा।
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मायूसी से निकलेंगे बाहर, ऊर्जा का होगा संचार : प्रो. राधेश्याम
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प्रो. राधे श्याम कहते हैं कि कोविड-19 का कोई इलाज नहीं है। इस कारण लॉकडाउन चल रहा है ताकि लोग संपर्क में न आएं। वह घरों में रहने से मायूसी महसूस कर रहे हैं। उनमें ऊर्जा का संचार करने के लिए दीये व मोमबत्ती अच्छा काम करेंगी। इसके जरिये एकजुटता का भी संदेश जाएगा। जैसे ही अलग रोशनी लोग देखेंगे तो वह अपने को आइसोलेशन से बाहर महसूस करेंगे। इससे उनका हौसला व ताकत बढ़ेगी। ऐसा होने से लोग फिर से फ्रेश महसूस करेंगे जैसे कोविड के आगमन से पहले थे। यह दीये व मोमबत्ती का उजाला कोविड से लड़ने की ताकत देगा।