फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   life imprisonment to Sajjan Kumar in 1984 anti-Sikh riots case, HS Phoolka Tweet to Express Emotions

सज्जन कुमार को उम्रकैद, इस वकील ने दिलाया 1984 का इंसाफ, बोले- जिंदगी का सबसे बड़ा दिन

Tue, 18 Dec 2018 12:10 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Tue, 18 Dec 2018 12:10 PM IST
विज्ञापन
life imprisonment to Sajjan Kumar in 1984 anti-Sikh riots case, HS Phoolka Tweet to Express Emotions
एचएस फूल्का
दिल्ली में 1984 में हुए सिख कत्लेआम के केसों में दोषियों को सजा दिलाने के लिए लड़ाई लड़ रहे सीनियर वकील एचएस फूलका ने ट्वीट करके अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि उनके लिए आज का दिन खास था। दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा एक केस में सज्जन कुमार को उम्र कैद की सजा सुनाना फूलका के लिए वह पल था, जिसका वह सालों से इंतजार कर रहे थे। अदालत के फैसले के बाद उन्होंने ट्वीट कर अपने जज्बातों का इजहार भी किया। फूलका ने लिखा कि आज उनकी जिंदगी का बड़ा दिन है। यह उनके 34 साल के संघर्ष का नतीजा है।
विज्ञापन


इस केस की पैरवी करने के लिए उन्होंने पंजाब के नेता प्रतिपक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्हें पता था कि मजबूत सबूतों के कारण उन्हें जरूर जीत मिलेगी। फूलका ने 2014 लोकसभा चुनाव के दौरान आप की लहर के बीच लुधियाना से पार्टी टिकट पर चुनाव लड़ा था, पर कामयाब नहीं हुए। 2017 विधानसभा चुनाव में वह लुधियाना जिले की ही दाखा सीट से जीते। प्रमुख विपक्षी दल के रूप में उभरी आम आदमी पार्टी ने तब उन्हें नेता प्रतिपक्ष बनाया था। लेकिन दिल्ली बार काउंसिल ने इस पद पर रहते हुए उनके केस लड़ने पर एतराज जताया था। काउंसिल का कहना था कि वह कैबिनेट मंत्री की सुविधाएं ले रहे हैं, ऐसे में केसों की पैरवी नहीं कर सकते। अगर वह विधायक या सांसद होते तो कर सकते थे।
विज्ञापन


फूलका की दलील थी कि वह तीस सालों से बिना फीस लिए 1984 के कत्लेआम के केस लड़ रहे हैं। इसी तरह केसों की पैरवी की इजाजत दी जाए। लेकिन काउंसिल का कहना था कि इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि वह फीस लेते हैं या नहीं, फर्क उनके कैबिनेट मंत्री पद पर होने से पड़ता है। जिसके बाद फूलका ने 1984 के कत्लेआम के केसों की पैरवी के लिए नेता प्रतिपक्ष पद का त्याग कर दिया। उनका कहना था कि सभी केस निर्णायक स्थिति में हैं। इस समय अगर वह इनकी पैरवी के लिए नेता प्रतिपक्ष का पद छोड़ते हैं तो न्यायपालिका से लेकर सभी पक्षों में साफ संदेश जाएगा कि इतने साल बाद भी सिख उस कत्लेआम को भूले नहीं हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed