Rohtak: बेटी की हत्या के दोषी माता-पिता और भाई को उम्रकैद, गला घोंट मारा था, चिता से पुलिस ने उठाया था शव
अदालत ने तीनों दोषियों को आईपीसी की धारा 302 के तहत उम्रकैद व 20-20 हजार रुपये जुर्माना, जुर्माना न देने पर एक-एक साल की अतिरिक्त सजा, जबकि सबूत मिटाने की धारा 201 के तहत सात-सात साल की कैद व 5-5 हजार रुपये जुर्माना, जुर्माना न देने पर छह-छह माह की अतिरिक्त सजा सुनाई गई है।
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हरियाणा के रोहतक में बेटी की हत्या के मामले में माता-पिता और भाई को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। जिला अदालत ने दोषियों पर 47-47 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना न भरने पर करीब डेढ़-डेढ़ साल की अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी। पुलिस ने जलती चिता से युवती का शव निकलवाया था। हत्या व सबूत मिटाने का मामला दर्ज कर उसके माता-पिता को गिरफ्तार किया था। युवती के भाई की उम्र 17 साल के करीब थी। उसे बाल सुधार गृह भेजा था और प्रिंसिपल कोर्ट में केस चला था। अब वह बालिग हो चुका है।
घटना सितंबर 2018 की है। गिरफ्तारी के बाद युवती के पिता ने बताया था कि बेटी ने दूध में कुछ मिला दिया था, जिससे उसे व उसके बेटे को चक्कर आने लगे थे। पूछने पर बेटी ने बताया कि उसने दूध में नींद की गोलियां मिलाई थी। इस बात को लेकर बेटी व बेटे के बीच झगड़ा भी हुआ था। इसी दौरान बेटी ने कुछ खा लिया। इसके बाद बेटे ने बेटी के हाथ व पैर पकड़ लिए, जबकि उसने परने से गला घोंट दिया।
सूचना पाकर बेटी की मां भी आ गई। उसने कहा कि यह ठीक किया, नहीं तो यह सभी को कुछ खिलाकर मार देती। थोड़ी देर बाद बेटी की मौत हो गई। सुबह परिवार वालों को बता दिया कि रात को बेटी ने उल्टी व सीने में दर्द की शिकायत की थी। इसके बाद उसका अंतिम संस्कार कर दिया।
निर्भया कांड के बाद हुआ था कानून में संशोधन
जिला अदालत के वरिष्ठ वकील एडवोकेट दीपक भारद्वाज ने बताया कि दिल्ली में हुए निर्भया हत्याकांड के बाद कानून में संशोधन हुआ था। तय हुआ था कि अगर वारदात के समय नाबालिग की उम्र 16 साल से ऊपर है तो वह अच्छा व बुरा समझने की समझ रखता है। उसे बालिग मानकर केस चलाया जा सकता है।
किसी ने पुलिस को सूचना दी थी कि गांव में युवती की मौत हो गई है, उसका जल्दबाजी में परिजनों ने अंतिम संस्कार किया गया है। चिता श्मशान में जल रही है। पुलिस तत्काल गांव में पहुंची, जहां श्मशान में जल रही चिता को फायर ब्रिगेड को बुलाकर बुझवाया। युवती के शव को बाहर निकाला गया। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी करवाई गई। एफएसएल की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच पड़ताल की।
तीनों को उम्रकैद की सजा, 47-47 हजार रुपये जुर्माना भी भरना होगा
अदालत ने तीनों दोषियों को आईपीसी की धारा 302 के तहत उम्रकैद व 20-20 हजार रुपये जुर्माना, जुर्माना न देने पर एक-एक साल की अतिरिक्त सजा, जबकि सबूत मिटाने की धारा 201 के तहत सात-सात साल की कैद व 5-5 हजार रुपये जुर्माना, जुर्माना न देने पर छह-छह माह की अतिरिक्त सजा सुनाई गई है। इसके अलावा धारा 203 के तहत 2-2 साल कैद व दो-दो हजार रुपये जुर्माना, जुर्माना न भरने पर एक-एक माह की अतिरिक्त सजा और साजिश में शामिल होने की धारा 120बी, 34 के तहत उम्रकैद व 20-20 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी है।
हत्या के समय नाबालिग था भाई, बालिग मानकर सुनाई गई सजा
मामले में युवती के माता-पिता के अलावा उसके भाई को भी उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। वारदात सितंबर 2018 में हुई थी, उस समय मृतका के भाई की उम्र 17 साल के करीब थी। उसे बाल सुधार गृह भेजा गया था। उसके खिलाफ प्रिंसिपल कोर्ट में केस चला। फैसले के समय अब वह बालिग हो चुका है। अदालत ने माता-पिता के साथ उसे भी उम्रकैद की सजा दी है।