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पानीपत के जेल अधीक्षक को उम्र कैद
सुमेश ठाकुर/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 27 Feb 2014 01:09 AM IST
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 2006 में प्लाईवुड व्यवसायी नरेंद्र अरोड़ा और उसके कर्मचारी की हत्या के मामले में कैथल कोर्ट के फैसले को बदल दिया है।
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जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस फतेहदीप सिंह पर आधारित खंडपीठ ने इस मामले में तत्कालीन करनाल के डिप्टी जेल अधीक्षक धर्मपाल मलिक, जेल अधिकारी अशोक कुमार और गैंग के सरगना सुरेंद्र जोंग समेत अन्य 8 लोगों को हत्या के मामले में दोषी ठहराते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई है।
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धर्मपाल मलिक अभी पानीपत जेल में जेल अधीक्षक के पद पर तैनात हैं। इस मामले पर जेल अधिकारियों की संलिप्ता पर हाईकोर्ट ने कहा कि जेल अधिकारियों ने अपने कर्तव्य के विपरीत काम किया है।
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हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में जिस तरह जेल अधिकारी धर्मवीर और अशोक कुमार ने किया, उससे साफ जाहिर है कि वह भी इस षडयंत्र में शामिल थे।
उन्होंने अपने कर्तव्य के बाहर जाकर हत्या के मुख्य दोषी को जेल में मोबाइल फोन तक की सुविधा उपलब्ध करवाई। मामला 17 मार्च 2006 का है।
सुरेंद्र जोंग की गैंग ने कैथल शहर में मैसर्ज अरोड़ा प्लाइवुड के मालिक से 50 लाख रुपये की मांग की। गैंग को जब यह रकम नहीं मिली, तो उन्होंने नरेंद्र अरोड़ा और उसके कर्मचारी की हत्या कर दी।