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नहीं दिया क्लेम, LIC दोषी करार, बीमा समेत भरेगी मुआवजा
ब्यूरो, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 19 Jun 2016 09:05 PM IST
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कोर्ट, कंज्यूमर फोरम
- फोटो : फाइल फोटो
चंडीगढ़ की मिल्क कॉलोनी धनास निवासी एक महिला के बेटे के मौत के बाद बीमा क्लेम न देना भारतीय जीवन बीमा निगम को महंगा पड़ गया। उपभोक्ता फोरम ने भारतीय जीवन बीमा निगम को निर्देश दिया है कि वह शिकायतकर्ता को ढाई लाख रुपये बीमा क्लेम अदा करे। इस राशि पर नौ प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज भी अदा करे।
सेवा में कोताही के लिए एक लाख रुपये मुआवजा और 15 हजार रुपये मुकदमा खर्च अदा करना होगा।
यह निर्देश जिला उपभोक्ता विवाद निवारण फोरम-2 के सदस्य जसविंदर सिंह सिद्धू ने सुनवाई के बाद दिया है। शिकायतकर्ता कविता राणा निवासी मिल्क कालोनी धनास ने सेक्टर-17 चंडीगढ़ स्थित भारतीय जीवन बीमा निगम के खिलाफ उपभोक्ता फोरम में शिकायत दी थी। शिकायतकर्ता कविता राणा ने उपभोक्ता फोरम को दी शिकायत में कहा कि उन्होंने अपने नाबालिग बेटे विशाल राणा के नाम पर दो अलग अलग ढाई लाख रुपये की पॉलिसी ली थी। इसके लिए उन्होंने 50 हजार रुपये का प्रीमियम जमा कराया।
शिकायतकर्ता ने फोरम को बताया कि अचानक उनके बेटे ने 19 सितंबर 2012 की रात को नौ बजे कुछ केमिकल खा लिया। उसके बाद वह बेहोश हो गया। उसे सेक्टर-16 के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। अगले दिन 20 सितंबर को उनके बेटे की मौत हो गई। इस संबंध में डीडीआर भी दर्ज कराई गई। पोस्टमार्टम भी कराया गया। इसके बाद वह और उनके पति ने बीमा क्लेम के लिए आवेदन किया। शिकायतकर्ता ने उपभोक्ता फोरम को बताया कि 20 जुलाई 2014 को अचानक उनके पति की भी मौत हो गई। शिकायतकर्ता ने उपभोक्ता फोरम को बताया कि भारतीय जीवन बीमा निगम ने बीमा क्लेम यह कहकर रद्द कर दिया कि उनका बेटा ड्रग एडिक्ट था।
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सेवा में कोताही के लिए एक लाख रुपये मुआवजा और 15 हजार रुपये मुकदमा खर्च अदा करना होगा।
यह निर्देश जिला उपभोक्ता विवाद निवारण फोरम-2 के सदस्य जसविंदर सिंह सिद्धू ने सुनवाई के बाद दिया है। शिकायतकर्ता कविता राणा निवासी मिल्क कालोनी धनास ने सेक्टर-17 चंडीगढ़ स्थित भारतीय जीवन बीमा निगम के खिलाफ उपभोक्ता फोरम में शिकायत दी थी। शिकायतकर्ता कविता राणा ने उपभोक्ता फोरम को दी शिकायत में कहा कि उन्होंने अपने नाबालिग बेटे विशाल राणा के नाम पर दो अलग अलग ढाई लाख रुपये की पॉलिसी ली थी। इसके लिए उन्होंने 50 हजार रुपये का प्रीमियम जमा कराया।
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शिकायतकर्ता ने फोरम को बताया कि अचानक उनके बेटे ने 19 सितंबर 2012 की रात को नौ बजे कुछ केमिकल खा लिया। उसके बाद वह बेहोश हो गया। उसे सेक्टर-16 के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। अगले दिन 20 सितंबर को उनके बेटे की मौत हो गई। इस संबंध में डीडीआर भी दर्ज कराई गई। पोस्टमार्टम भी कराया गया। इसके बाद वह और उनके पति ने बीमा क्लेम के लिए आवेदन किया। शिकायतकर्ता ने उपभोक्ता फोरम को बताया कि 20 जुलाई 2014 को अचानक उनके पति की भी मौत हो गई। शिकायतकर्ता ने उपभोक्ता फोरम को बताया कि भारतीय जीवन बीमा निगम ने बीमा क्लेम यह कहकर रद्द कर दिया कि उनका बेटा ड्रग एडिक्ट था।
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