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हरियाणा: पुस्तकालयों में लाइब्रेरियन नहीं, करोड़ों की किताबें हो रहीं बर्बाद, 189 पद मंजूर, 10 ही भरे

Sun, 22 Aug 2021 11:01 AM IST
ajay kumar यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sun, 22 Aug 2021 11:01 AM IST
सार

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल से 4 अगस्त 2021 को वॉयस ऑफ लाइब्रेरियंस एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने डॉ. नरेंद्र के नेतृत्व में चंडीगढ़ में मुलाकात की थी। उन्होंने सर्विस रूल्स, पुस्तकालयों की स्थिति, खाली पदों व किताबों की खुर्द-बुर्द का मामला संज्ञान में लाया था।

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Librarian posts vacant in Haryana libraries
पुस्तकालय। - फोटो : पेक्सेल्स

विस्तार

हरियाणा के सैकड़ों पुस्तकालय बिना लाइब्रेरियन के चल रहे हैं। वर्षों से पद नहीं भरे जाने के कारण करोड़ों की किताबें हर साल बर्बाद हो रही हैं। स्कूलों में लाइब्रेरियन के 189 पद मंजूर हैं, जिनमें से 10 ही भरे हैं। कॉलेजों में अटेंडेंट, बुक बाइंडर व री-स्टोरर पुस्तकालय का काम देख रहे हैं।

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यह मामला मुख्यमंत्री मनोहर लाल के पास पहुंचने पर इसमें सुधार की कुछ उम्मीद जगी है। स्कूलों और कॉलेजों में सीनियर-जूनियर लाइब्रेरियन हैं ही नहीं। कॉलेजों में तो लाइब्रेरियन की नियुक्ति को लेकर एक अलग-अलग योग्यता है। ऐडिड कॉलेजों में लाइब्रेरियन की नियुक्ति के लिए शैक्षणिक योग्यता नेट व पीएचडी है, जबकि सरकारी कॉलेजों में इसे लागू नहीं किया गया है। 
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स्कूल, कॉलेजों और पब्लिक लाइब्रेरी में किताबें प्रदेश स्तर से खरीदकर भेजी जाती हैं। वहीं हर साल किताबें खरीदने के लिए लाखों रुपये का बजट स्वीकृत हो रहा है। मगर पद खाली होने से इनका उचित रखरखाव नहीं हो रहा और दो-तीन साल में किताबें खराब हो रही हैं। वहीं हर हाई, सीनियर सेकेंडरी स्कूल, आईटीआई, पॉलिटेक्निक में लाइब्रेरी हैं लेकिन किताबों को सहेजने और बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करने वाला कोई नहीं।
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1989 में बना एक्ट आज तक लागू नहीं
वॉयस ऑफ लाइब्रेरियंस एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. नरेंद्र कुमार चिमनी ने बताया कि वर्ष 1989 में हरियाणा पब्लिक लाइब्रेरी एक्ट बना था। यह आज तक पूरी तरह लागू नहीं हुआ। किताबें हर वर्ष खरीदी जाती हैं लेकिन थोड़े समय बाद कहां गईं इसका पता नहीं चलता। प्रदेश में हर जिले में एक पब्लिक लाइब्रेरी व अंबाला कैंट में स्टेट लाइब्रेरी है।

25 हजार डिग्रीधारक लाइब्रेरियन प्रदेश में हैं लेकिन इनकी सेवाएं लेने के लिए सर्विस रूल्स ही नहीं हैं। 1983 में बने सर्विस रूल्स ही आज तक लागू हैं, जिनमें लाइब्रेरियन के पद के लिए डिग्री की जगह डिप्लोमा ही योग्यता रखी हुई है। अब डिप्लोमा बंद हो चुका है। इसलिए सरकार अगर लाइब्रेरियन के पद भरना चाहे तो उसे पहले सर्विस रूल्स में बदलाव करना होगा, चूंकि डिप्लोमा के आधार पर न के बराबर अभ्यर्थी मिलेंगे।

मुख्यमंत्री ने व्यवस्था में सुधार के दिए आदेश
मुख्यमंत्री मनोहर लाल से 4 अगस्त 2021 को वॉयस ऑफ लाइब्रेरियंस एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने डॉ. नरेंद्र के नेतृत्व में चंडीगढ़ में मुलाकात की थी। उन्होंने सर्विस रूल्स, पुस्तकालयों की स्थिति, खाली पदों व किताबों की खुर्द-बुर्द का मामला संज्ञान में लाया था। साथ ही नियुक्तियों के लिए शैक्षणिक योग्यता में बदलाव की मांग की थी। 

मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने मामले की गंभीरता को समझते हुए उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव आनंद मोहन शरण व स्कूल शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव महाबीर सिंह को व्यवस्था में सुधार के आदेश दिए हैं। साथ ही कहा है कि पुस्तकालयों में लाइब्रेरियन की नियुक्ति, सर्विस रूल्स में संशोधन व किताबों के रखरखाव पर तुरंत काम शुरू करें।

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