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Chandigarh News: अंबाला और सोनीपत नगर निगमों के रिक्त हुए मेयर पद का उपचुनाव कराने पर फंसा कानूनी पेच

Mon, 02 Dec 2024 01:23 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 02 Dec 2024 01:23 AM IST
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Legal entanglement in holding by-election for the vacant post of Mayor of Ambala and Sonipat Municipal Corporations.
नवंबर, 2020 में नगर निगम कानून में हुए संशोधन के बाद मेयर पद के लिए नहीं हो सकता उप चुनाव
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नगर निगम निर्वाचन नियमों में ऐसी कोई रोक नहीं
एडवोकेट की याचिका के बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने शहरी स्थानीय निकाय विभाग से मांगा जवाब
चंडीगढ़। हरियाणा में करीब दो माह पूर्व अंबाला और सोनीपत नगर निगम में खाली हुए मेयर पदों के लिए चुनाव कराने को लेकर कानूनी पेंच फंसा है। नवंबर, 2020 में नगर निगम कानून में हुए संशोधन के बाद कार्यकाल के बीच में खाली हुए मेयर पद के लिए उप चुनाव नहीं हो सकता। वहीं, नगर निगम निर्वाचन नियमों में ऐसी कोई रोक नहीं है। इसलिए चुनाव कानूनी पेंच में फंस गया है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट हेमंत की याचिका के बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने शहरी स्थानीय निकाय विभाग से जवाब मांगा है।
गौर हो कि हाल ही में आठ अक्तूबर को अंबाला नगर निगम की तत्कालीन मेयर शक्ति रानी शर्मा पंचकूला जिले की कालका विधानसभा सीट से भाजपा विधायक निर्वाचित हुई हैं। वहीं, सोनीपत नगर निगम के तत्कालीन मेयर निखिल मदान भी सोनीपत विस क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार के तौर पर चुनाव जीत कर विधायक बने हैं।
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इसी बीच पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में एडवोकेट और म्युनिसिपल कानून के जानकार हेमंत कुमार ने हरियाणा नगर निगम कानून, 1994 की धारा 8ए का हवाला देते हुए बताया कि इसके अंतर्गत प्रदेश के किसी नगर निगम का मेयर या नगर निगम सदस्य एक ही समय पर मेयर या न.नि. सदस्य एवं साथ-साथ विधायक या सांसद नहीं रह सकता है। अगर कोई व्यक्ति नगर निगम के मेयर पद या सदस्य होते हुए प्रदेश की विधानसभा या संसद के लिए निर्वाचित हो जाता है, तो विधायक या सांसद के तौर पर निर्वाचित घोषित होने की तारीख से वह नगर निगम का मेयर या सदस्य नहीं रहेगा। एडवोकेट ने शहरी स्थानीय निकाय विभाग के सामने नया मेयर चुनने की प्रक्रिया आरम्भ करने का मामला उठाया था। अब इस मामले में राज्य निर्वाचन आयोग ने एडवोकेट हेमंत के पत्र के साथ शहरी स्थानीय निकाय विभाग से स्पष्टीकरण मांगा है।
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