फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Lectures of eminent journalist and writer Mark Tully

बीबीसी के बारे में ये क्या बोल गए मार्क टली?

Mon, 15 Sep 2014 01:08 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 15 Sep 2014 01:08 PM IST
विज्ञापन
Lectures of eminent journalist and writer Mark Tully

मार्क टली ने चंडीगढ़ के श्रोताओं के साथ अपना एक और दर्द साझा किया। उन्होंने कहा कि सत्तर के दशक तक भारतीय श्रोताओं में बीबीसी की जबर्दस्त पैठ थी।

विज्ञापन


लोग बीबीसी के समाचारों पर पक्का विश्वास करते थे। लेकिन बाद में नब्बे का दशक आते-आते टीवी चैनलों की न्यूज और रेडियो पर समाचारों के इतने कार्यक्रम बढ़ गए और न्यूज पेपर इंडस्ट्री में ऐसा विस्फोट हुआ कि बीबीसी की बादशाहत खत्म हो चली है।
विज्ञापन


उन्होंने परिहास में यह भी कहा कि उस जमाने में लोग बहुत सी अफवाहें भी यह कहकर उड़ा देते थे कि यह बात तो उन्होंने बीबीसी पर सुनी है। उन्होंने कहा कि वह दौर ऐसा था कि बीबीसी के नाम से किसी भी बात पर यकीन करवाया जा सकता था।
विज्ञापन
विज्ञापन

'भारत के लिए मध्यमार्ग अपनाना जरूरी'

Lectures of eminent journalist and writer Mark Tully

सुविख्यात पत्रकार और लेखक मार्क टली का मानना है कि भारतीय अर्थतंत्र अमीर देशों के विकास के रास्ते पर चलेगा तो बहुत नुकसान में रहेगा। उन्होंने कहा कि पूंजीवादी अर्थतंत्र लालच और उपभोक्तावाद के बूते पर जिंदा रहता है और अंतत: वह मुल्कों को पर्यावरण की बरबादी और आर्थिक असमानता की तरफ धकेल देता है।

मार्क टली रविवार को यूटी गेस्ट हाउस के सभागार में चंडीगढ़ साहित्य अकादमी के हैरीटेज फेस्टिवल के तहत आयोजित कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। ‘भारत : एक अंतहीन यात्रा...’ विषय पर आधारित व्याख्यान में उन्होंने कहा कि विकास के समाजवादी मॉडल में गलती यह हुई कि सरकार के हाथ में जरूरत से ज्यादा शक्ति और अधिकार दे दिए गए।

इसी तरह पूंजीवादी मॉडल में बाजार को हद से ज्यादा अधिकार मिल जाते हैं। सही रास्ता मध्यमार्ग का है। शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में सरकार की भूमिका बनी रहनी चाहिए। भारत जैसे जनबहुल, विराट और विकासशील देश के लिए यही मध्यमार्ग अपनाना ठीक है।

खचाखच भरे सभागार में मार्क टली ने एक अन्य संदर्भ में कहा कि भारत को अपने रेलवे नेटवर्क के विकास पर ज्यादा फोकस करना चाहिए। लेकिन देश में सड़क परिवहन और मोटरकार पर ज्यादा संसाधन खर्च किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि रेलवे कम प्रदूषणकारी, किफायती और अधिक तेज परिवहन साधन है।

'अर्थशास्त्र और आध्यात्मिकता का गहरा संबंध'

Lectures of eminent journalist and writer Mark Tully

मार्क टली ने कहा कि अर्थशास्त्र और आध्यात्मिकता का गहरा संबंध है और भारत सदियों से इनके बीच सही संतुलन बनाता रहा है। भारत को तथाकथित विकसित देशों की नकल करने की बजाय अपने पारंपरिक अर्थतंत्र के सिद्धांतों को कायम रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि शाकाहार, सादा जीवन और प्राकृतिक साधनों का न्यूनतम दोहन ही सही रास्ता है।

मार्क टली ने अपने व्याख्यान में कई रोचक संस्मरण भी साझा किए। उन्होंने बताया कि शिमला समझौते के वक्त जब पाकिस्तान और भारत की उच्चस्तरीय वार्ता हुई थी तो वे चंडीगढ़ में ठहरे थे और तब से कई यादें सिटी ब्यूटीफुल से जुड़ी हैं। अभी हाल ही में वे शिमला गए थे तो कालका-शिमला ट्रेन का प्रयोग किया था और बड़ा आनंद उठाया था, लेकिन वापसी में सड़क के रास्ते आए और भयानक ट्रैफिक जाम में फंस गए।

उन्होंने कहा कि कालका-शिमला रेल सफर का मौका वे कभी नहीं चूकते और यह सफर उन्हें हमेशा यही अहसास कराता है कि भारत की ट्रांसपोर्ट संबंधी सभी समस्याओं का समाधान रेल परिवहन में ही है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed