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Chandigarh News: लीज का लॉक खुलेगा... 8600 संपत्तियां फ्रीहोल्ड करने का प्रस्ताव एमएचए पहुंचा
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चंडीगढ़। शहर की लीजहोल्ड इंडस्ट्रियल और कॉमर्शियल प्रॉपर्टी को फ्री होल्ड में बदलने की लंबे समय से चली आ रही मांग के बीच चंडीगढ़ प्रशासन ने नया प्रस्ताव तैयार किया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) की मंजूरी मिली तो शहर के औद्योगिक और व्यावसायिक क्षेत्र को बड़ा बूस्ट मिल सकता है। प्रशासन ने अलॉटमेंट के जरिए मिली लीज होल्ड संपत्तियों को फ्री होल्ड करने के लिए मौजूदा कलेक्टर रेट का करीब 50 फीसदी कन्वर्जन शुल्क लेने का प्रस्ताव रखा है। प्रस्ताव मंजूरी के लिए एमएचए भेज दिया गया है। मंजूरी के बाद ही इसे लागू करने की प्रक्रिया शुरू होगी।यूटी रिकॉर्ड के मुताबिक शहर में करीब 15,016 इंडस्ट्रियल और कॉमर्शियल प्रॉपर्टी हैं। इनमें लगभग 8,600 संपत्तियां लीज होल्ड हैं। ये 99 साल की लीज पर हैं और मालिकों को हर साल प्रशासन को ग्राउंड रेंट देना पड़ता है। प्रशासन ने ग्राउंड सर्वे और वित्तीय आकलन के आधार पर प्रस्ताव तैयार किया है।
नीलामी वाली प्रॉपर्टी पर 25% शुल्क
प्रशासन ने नीलामी के जरिये अलॉट प्लॉट या संपत्तियों के लिए अलग व्यवस्था प्रस्तावित की है। इन्हें फ्री होल्ड कराने के लिए लागू कलेक्टर रेट का 25 फीसदी कन्वर्जन चार्ज लेने की बात कही गई है। इसके अलावा इंडस्ट्रियल और कॉमर्शियल लीज होल्ड संपत्तियों पर लागू प्रीमियम और ग्राउंड रेंट भी वसूला जाएगा।
एकमुश्त या किस्तों में भुगतान का विकल्प
प्रस्ताव में संपत्ति मालिकों को दो विकल्प देने की बात है। पूरा कन्वर्जन शुल्क एकमुश्त जमा किया जा सकेगा। दूसरा विकल्प किस्तों का होगा। इसमें 20 फीसदी रकम शुरुआत में जमा करनी होगी, जबकि बाकी 80 फीसदी चार बराबर सालाना किस्तों में चुकाने की सुविधा होगी। किस्तों पर 10 फीसदी सालाना चक्रवृद्धि ब्याज लगेगा।
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करोड़ों में बैठेगा शुल्क का हिसाब
प्रशासन ने वित्तीय आकलन के लिए इंडस्ट्रियल प्रॉपर्टी का कलेक्टर रेट 83,100 रुपये प्रति वर्ग गज और कॉमर्शियल प्रॉपर्टी का 4,47,300 रुपये प्रति वर्ग गज आधार बनाया है। एमएचए इन दरों में बदलाव कर सकता है या अन्य शुल्क लगाने-हटाने की सिफारिश कर सकता है।
बिक्री और इस्तेमाल का रास्ता आसान होने की उम्मीद
एस्टेट ऑफिस, नगर निगम और चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के अधीन कई लीज होल्ड संपत्तियां वर्षों से खाली पड़ी हैं। प्रशासन का मानना है कि लीजहोल्ड होने के कारण इनकी बिक्री में दिक्कत आती है। फ्री होल्ड व्यवस्था बनने से संपत्तियों के इस्तेमाल और बिक्री का रास्ता आसान हो सकता है। इससे सरकारी राजस्व बढ़ने की भी उम्मीद है।
अब एमएचए के फैसले का इंतजार
प्रस्ताव फिलहाल केंद्रीय गृह मंत्रालय की मंजूरी के इंतजार में है। मंजूरी के बाद शुल्क, भुगतान और पात्रता के आधार पर औपचारिक योजना तैयार होगी। शहर के करीब 8,600 लीज होल्ड संपत्ति मालिकों की नजर अब एमएचए के फैसले पर है। बीते दिनों मुख्य सचिव एच राजेश प्रसाद की दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के साथ इस प्रस्ताव और शहर से जुड़े अन्य मुद्दों पर चर्चा होनी थी लेकिन एक जरूरी बैठक के कारण यह चर्चा स्थगित करनी पड़ी थी।
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नीलामी वाली प्रॉपर्टी पर 25% शुल्क
प्रशासन ने नीलामी के जरिये अलॉट प्लॉट या संपत्तियों के लिए अलग व्यवस्था प्रस्तावित की है। इन्हें फ्री होल्ड कराने के लिए लागू कलेक्टर रेट का 25 फीसदी कन्वर्जन चार्ज लेने की बात कही गई है। इसके अलावा इंडस्ट्रियल और कॉमर्शियल लीज होल्ड संपत्तियों पर लागू प्रीमियम और ग्राउंड रेंट भी वसूला जाएगा।
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एकमुश्त या किस्तों में भुगतान का विकल्प
प्रस्ताव में संपत्ति मालिकों को दो विकल्प देने की बात है। पूरा कन्वर्जन शुल्क एकमुश्त जमा किया जा सकेगा। दूसरा विकल्प किस्तों का होगा। इसमें 20 फीसदी रकम शुरुआत में जमा करनी होगी, जबकि बाकी 80 फीसदी चार बराबर सालाना किस्तों में चुकाने की सुविधा होगी। किस्तों पर 10 फीसदी सालाना चक्रवृद्धि ब्याज लगेगा।
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करोड़ों में बैठेगा शुल्क का हिसाब
प्रशासन ने वित्तीय आकलन के लिए इंडस्ट्रियल प्रॉपर्टी का कलेक्टर रेट 83,100 रुपये प्रति वर्ग गज और कॉमर्शियल प्रॉपर्टी का 4,47,300 रुपये प्रति वर्ग गज आधार बनाया है। एमएचए इन दरों में बदलाव कर सकता है या अन्य शुल्क लगाने-हटाने की सिफारिश कर सकता है।
बिक्री और इस्तेमाल का रास्ता आसान होने की उम्मीद
एस्टेट ऑफिस, नगर निगम और चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के अधीन कई लीज होल्ड संपत्तियां वर्षों से खाली पड़ी हैं। प्रशासन का मानना है कि लीजहोल्ड होने के कारण इनकी बिक्री में दिक्कत आती है। फ्री होल्ड व्यवस्था बनने से संपत्तियों के इस्तेमाल और बिक्री का रास्ता आसान हो सकता है। इससे सरकारी राजस्व बढ़ने की भी उम्मीद है।
अब एमएचए के फैसले का इंतजार
प्रस्ताव फिलहाल केंद्रीय गृह मंत्रालय की मंजूरी के इंतजार में है। मंजूरी के बाद शुल्क, भुगतान और पात्रता के आधार पर औपचारिक योजना तैयार होगी। शहर के करीब 8,600 लीज होल्ड संपत्ति मालिकों की नजर अब एमएचए के फैसले पर है। बीते दिनों मुख्य सचिव एच राजेश प्रसाद की दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के साथ इस प्रस्ताव और शहर से जुड़े अन्य मुद्दों पर चर्चा होनी थी लेकिन एक जरूरी बैठक के कारण यह चर्चा स्थगित करनी पड़ी थी।