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Hindi News ›   Chandigarh ›   Last Letter of Kargil Martyr to Parents, Read Emotional Letter

'हिंदू' कैप्टन के अंतिम शब्द, 'बेटी रुखसाना पढ़ लिख जाए'

Wed, 18 Feb 2015 04:18 PM IST
मोहित धुपड़/अमर उजाला, अंबाला कैंट
मोहित धुपड़/अमर उजाला, अंबाला कैंट Updated Wed, 18 Feb 2015 04:18 PM IST
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Last Letter of Kargil Martyr to Parents, Read Emotional Letter

28 जून 1999 में पाक के साथ कारगिल युद्ध शुरू हो चुका था। 2 राजपूताना राइफल्स के कैप्टन विजयंत थापर को आदेश हो चुके थे कि वे अब कुपवाड़ा के बाद कारगिल के द्रास सेक्टर में तोलोलिंग पहाड़ियों का मोर्चा संभालें। युद्ध के मैदान में निकलने से पहले 22 वर्षीय कैप्टन थापर को ध्यान आया कि क्यों न परिजनों के लिए संभावित आखिरी संदेश छोड़ दिया जाए।

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यही सोचकर उन्होंने पत्र लिखकर साथी लेफ्टिनेंट तोमर को यह कहकर दिया कि ‘युद्ध के  मैदान से यदि मैं जिंदा लौट आया तो खुद इसे फाड़ दूंगा, वरना यह पत्र मेरे मां-बाप को सौंप देना।’ परिजनों के प्रति कैप्टन विजयंत ने पत्र में बिंदास ढंग से कई बातों का जिक्र किया, लेकिन पत्र के आखिरी में एक छोटे से सपने को पूरा करने की मार्मिक अपील भी कर डाली।
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यह अपील थी कारगिल के कुपवाड़ा इलाके की पांच साल की मुसलिम अनाथ बच्ची रुखसाना की पढ़ाई जारी रखने की। शहीद बेटे के इसी छोटे से सपने को पूरा करने के लिए बुजुर्ग बाप रिटायर्ड कर्नल वीएन थापर और रिटायर्ड टीचर तृप्ता थापर पूरी शिद्दत के साथ जुटे हुए हैं।
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शहीद की मां ने अमर उजाला साझा की अपील

Last Letter of Kargil Martyr to Parents, Read Emotional Letter

बेटे की अंतिम मार्मिक अपील को शहीद की मां तृत्पा थापर ने वर्ल्ड साइकिल टूरिस्ट एवं सलाम सैनिक पुस्तक के रचनाकार हीरालाल यादव के सामने ‘अमर उजाला’ से सांझा किया।

जम्मू से कन्याकुमारी तक साइकिल यात्रा पर निकले हीरालाल मंगलवार को अंबाला पहुंचे। तृप्ता थापर ने बताया कि इस पत्र को लिखकर बेटा युद्ध में चला गया और और 29 जून 1999 को दुश्मनों से लोहा लेते हुए शहीद हो गया।

बेटा तो चला गया, लेकिन उसके सपने को आज हम जी रहे हैं। रुखसाना बिटिया आज ग्यारहवीं कक्षा में पढ़ रही है। पढ़ाई और उसका अन्य खर्च उस तक नियमित पहुंच रहा है। इंसानियत हमेशा इंसान के काम आने का पाठ पढ़ाती है, इसमें मजहब, जात-पात की कोई जगह नहीं।

जब यह खत पढ़ोगे, मैं आपको आसमां से निहारूंगा

Last Letter of Kargil Martyr to Parents, Read Emotional Letter

शहीद कैप्टन विजयंत कितने बिंदास थे ? यह उनके आखिरी खत की पहली पंक्ति से मालूम चल जाता है जो उन्होंने मरने से कुछ घंटे पहले मां-बाप, दादी व भाई के नाम लिखा।

उन्होंने कहा ‘जब आप यह खत पढ़ रहे होंगे, तो मैं आसमान से आपको निहार रहा होऊंगा, यहां अप्सराएं मेरा ख्याल रख रही होंगी...मुझे कोई गम नहीं कि मैं दुनिया से चला गया...मगर हां यदि मैं दोबारा इंसान बनकर धरती पर आया तो दोबारा आर्मी ज्वॉइन करूंगा और देश के लिए लड़ूंगा...अगर आज आप लोग यहां कारगिल में होते तो देखते मुझ जैसे कितने सपूत देशवासियों के उज्ज्वल कल के लिए कैसे आज जान न्यौछावर कर रहे हैं...मेरे छोटे भाई जवानों के बलिदान को मत भूलना, मम्मा, पापा आपको भी अपने बेटे पर गर्व होगा...दादी आपका भी दिल दुखाया हो तो माफ कर देना...बेस्ट ऑफ लक...लिव लाइफ किंग साइज...।’

यह है रुखसाना

Last Letter of Kargil Martyr to Parents, Read Emotional Letter

कारगिल शहीद कैप्टन विजयंत थापर उन दिनों कुपवाड़ा में थे। आतंकियों को तलाशने के ऑपरेशन के बाद वहां खेल रहे छोटे बच्चों के बीच चले गए और खेलने लगे। नजदीक ही पांच साल की मुसलिम बच्ची रुखसाना गुमसुम बैठी खेलते हुए बच्चों को निहार रही थी।

शहीद कैप्टन रुखसाना के पास गए, उससे बात की, रुखसाना फिर भी नहीं बोली। तब बच्चों ने कैप्टन थापर को बताया कि रुखसाना के पिता को उसके सामने ही आतंकवादियों ने गोलियों से भून डाला था। तभी से रुखसाना चुप है। कैप्टन जब तक कुपवाड़ा में रहे, रोजाना पांच साल की बच्ची रुखसाना से मिलने जाते।

कई दिनों बाद रुखसाना ने कैप्टन से बात करना शुरू किया, तब कैप्टन ने रुखसाना से कहा कि वे चाहते हैं कि वे स्कूल जाकर पढ़े। तब रुखसाना के परिजनों ने आर्थिक दिक्कत बताते हुए पढ़ाई जारी रखने में असमर्थता जताई। शहीद कैप्टन ने उन्हें आश्वस्त किया कि वे कहीं भी रहेंगे हर माह रुखसाना की पढ़ाई का खर्च जरूर भेजेंगे।

अपने आखिरी खत में कैप्टन ने रुखसाना की पढ़ाई जारी रखने को अपना छोटा सा सपना बताते हुए कहा कि ‘मम्मा, पापा मैं रहूं न रहूं, देखना रुखसाना की पढ़ाई न रुके, हर माह उसकी फीस व अन्य खर्च उस तक जरूर पहुंचते रहें।’ बस, शहीद बेटे का यह छोटा सा सपना आज बुजुर्ग थापर दंपति के जीवन का लक्ष्य बना हुआ है।

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