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यू्क्रेन युद्ध: देश के सैकड़ों विद्यार्थी सीमा पर फंसे, सिग्नल भी ना के बराबर, दूतावास के नंबर भी नहीं लग रहे

Sun, 27 Feb 2022 10:12 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sun, 27 Feb 2022 10:12 PM IST
सार

सेजल ने बताया कि जब यूक्रेन में युद्ध जैसे हालात बने उस दौरान हम कॉलेज छात्रावास में ही थे। सुरक्षा के लिहाज से कॉलेज की मदद से हम छात्रावास के नीचे बने बंकर में छिपे थे। हालांकि ल्वीव में हालात ज्यादा गंभीर नहीं थे क्योंकि ल्वीव पश्चिमी यूक्रेन में पड़ता है। इस इलाके में सबसे कम रूसी मूल के लोग रहते हैं। 

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Large number of Indian students stranded at Ukraine border
भारतीय छात्र - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मैं सुरक्षित 23 फरवरी को शहर में पहुंच गई थी, क्योंकि युद्ध के हालातों में यूक्रेन में ठहरना सही नहीं था। हालांकि मैं ल्वीव नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी के छात्रावास में रह रही थी और तीन महीने पहले ही यूक्रेन एमबीबीएस की पढ़ाई करने गई थी। मेरे कई दोस्त अभी यूक्रेन के सीमावर्ती इलाकों में फंसे हैं।

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वह भारतीय दूतावास के हेल्पलाइन नंबर पर भी संपर्क कर रहे हैं लेकिन फोन नहीं लग रहा है। छात्रों के पास भी बॉर्डर इलाके में सिग्नल की दिक्कतें आ रही हैं। सीमावर्ती इलाके में सैकड़ों भारतीय और यूक्रेनी छात्र बिना खाने के रहने को मजबूर हैं और उनके पास रहने के लिए भी छत नहीं है। सेक्टर-41 निवासी सेजल ने यूक्रेन से लौटने के बाद वहां के हालातों के बारे में बताया। 
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एमबीबीएस पहले वर्ष की छात्रा सेजल ने बताया कि उच्च शिक्षा के लिए तीन माह पहले ही यूक्रेन के ल्वीव शहर गईं थीं लेकिन युद्ध जैसे हालात बनने और भारतीय दूतावास की सलाह के बाद उन्हें वतन लौटना बेहतर लगा। उन्होंने अपने स्तर पर एयर इंडिया की टिकट बुक की। एयर इंडिया ने टिकट के दाम दो से तीन गुणा बढ़ा दिए थे। उन्हें सामान्य दिनों की 30 हजार की टिकट 60 हजार में पड़ी। 

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कई छात्रों जिन्हें टिकट करने में देरी हो गई थी, उन्हें 80 हजार रुपये की पड़ रही थी। महंगी टिकट के कारण भी छात्र समय पर देश नहीं लौट सके। 22 फरवरी को यूक्रेन से फ्लाइट ली और 23 को दिल्ली पहुंचे। फ्लाइट में सभी भारतीय विद्यार्थी थे। उनके आने के बाद वहां हालात बिगड़े हैं। यूक्रेन सरकार की मदद से छात्र स्कूल में बने शेल्टरों में रह रहे हैं। कई सीमावर्ती क्षेत्रों में भारतीय दूतावास खाने और रहने की व्यवस्था कर रहा है। बहुत से विद्यार्थी दूतावास से संपर्क करने में असमर्थ हैं। 

पहले दिन यूक्रेन में फंसे 19 लोगों के परिजनों ने मांगी मदद
यूक्रेन में फंसे लोगों के परिजनों के लिए प्रशासन ने हेल्पलाइन नंबर 112 जारी की है। रविवार को पहले दिन 19 लोगों ने हेल्पलाइन नंबर पर फोन कर प्रशासन से मदद मांगी। किसी ने अपने परिजन को वापस लाने के लिए रास्ता बताने को कहा तो किसी ने वहां फंसे अपने परिजन तक जरूरत का सामान पहुंचाने में मदद मांगी। 

प्रशासन की विशेष टीम ने लोगों के पते के साथ ही उनकी समस्याओं को नोट कर लिया है। डिप्टी कमिश्नर विनय प्रताप सिंह ने बताया कि चंडीगढ़ के जो लोग यूक्रेन में फंसे हैं, उनके लिए शनिवार को 24 घंटे हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया था। लोग परेशान न हों इसके लिए विशेष डेस्क भी बनाई गई है, जो केवल इन्हीं शिकायतों को देखेंगे। इसमें यूक्रेन गए व्यक्ति का नाम, पिता का नाम, पासपोर्ट नंबर, विश्वविद्यालय/कॉलेज का नाम लेकर विदेश मंत्रालय तक जानकारी उपलब्ध करा देंगे ताकि लोगों को राहत मिल सके।

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