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चंडीगढ़ में पुरातत्व महत्व की सबसे बड़ी खोज
अरविंद बाजपेयी/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 25 Feb 2014 02:34 PM IST
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बीस लाख साल पुराना जीवाश्म बद्दी के आसपास मिला है। चंडीगढ़ के पास स्थित यह इलाका शिवालिक रेंज का हिस्सा है। भारत में मिला यह अब तक का सबसे पुराना जीवाश्म बताया जा रहा है।
आर्कियोलॉजिस्टों के मुताबिक जीवाश्म पर रिसर्च शुरू हो गई है। फिलहाल बद्दी स्थित इस साइट का खुलासा खास कारणों से नहीं किया जा रहा है। चंडीगढ़ में पुरातत्व महत्व की 33 साइट्स हैं। इनकी खुदाई में प्रतिहार काल से लेकर हड़प्पा और उससे भी प्राचीन सभ्यताओं के अवशेष मिले है।
एक बड़ी खोज हो सकती है यह:
शिवालिक की टेट्रोट फॉरमेशन से मिला यह जीवाश्म एक बड़ी खोज बन सकता है। इससे पहले यहां 19वीं शताब्दी में भी एक खोज हुई थी जिसमें एप (वानर) और मानव के बीच की कड़ी की जानकारी मिली थी। यहां एप जब मानव जैसा बन रहा था तभी के फॉसिल मिले थे। यह फॉसिल 1982 में डेविड पिलबीम ने खोजा था। इसे शिवापिथिकस का नाम दिया गया जो 1.5 मीटर का था।
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शिवापिथिकस ऑरेंगउटान के काफी करीब था। यह चिंपांजी जैसा था लेकिन उसका चेहरा एक ऑरेंगउटान जैसा था। ऐसा माना गया है कि जब एप और मानव के बीच की कड़ी का जन्म हो रहा था, उस समय उसका ज्यादा समय जमीन पर ही बीतता था। यह फॉसिल 12.5 लाख साल से 10.5 लाख साल पुराना का है।
दो लाख साल पहले के हथियार मिले थे:
होशियारपुर के पास तखड़ी गांव में चंडीगढ़ के आर्कियोलॉजिस्ट केके ऋषि को नॉर्थ इंडिया में पहली बार नुकीले हथियार मिले थे। केके ऋषि ने कहा कि यह स्टोंस टूल की एक वैरायटी है।
उनको कुल 108 टूल्स मिले थे। उन्होंने कहा कि यह टूल्स, एप व मानव के बीच की कड़ी और अब बीस लाख साल पहले के जीवाश्म का मिलना एक से दूसरी कड़ी को बांधते हैं।
बदल सकती है थ्योरी:
अब तक ऐसा माना जा रहा था कि एप से मानव बनने की प्रक्रिया सबसे पहले अफ्रीका में हुई और वहीं से यह मानव अन्य जगह और शिवालिक की तरफ आया। लेकिन अब अफ्रीका में मिले जीवाश्म से भी पुराना जीवाश्म मिलने से पूरी थ्योरी ही बदल सकती है।
शिवालिक पहाड़ियों पर इस जीवाश्म के मिलने के बाद ऐसा माना जा रहा है कि भारत में इससे जुड़ी अन्य परतें भी खुलेंगी। चंडीगढ़ के पास मिले इस जीवाश्म पर कट का निशान मिला है। इससे इस संभावना को बल मिला है कि उस वक्त का इंसान औजार बना चुका था और वह शिकार करता था।
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आर्कियोलॉजिस्टों के मुताबिक जीवाश्म पर रिसर्च शुरू हो गई है। फिलहाल बद्दी स्थित इस साइट का खुलासा खास कारणों से नहीं किया जा रहा है। चंडीगढ़ में पुरातत्व महत्व की 33 साइट्स हैं। इनकी खुदाई में प्रतिहार काल से लेकर हड़प्पा और उससे भी प्राचीन सभ्यताओं के अवशेष मिले है।
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एक बड़ी खोज हो सकती है यह:
शिवालिक की टेट्रोट फॉरमेशन से मिला यह जीवाश्म एक बड़ी खोज बन सकता है। इससे पहले यहां 19वीं शताब्दी में भी एक खोज हुई थी जिसमें एप (वानर) और मानव के बीच की कड़ी की जानकारी मिली थी। यहां एप जब मानव जैसा बन रहा था तभी के फॉसिल मिले थे। यह फॉसिल 1982 में डेविड पिलबीम ने खोजा था। इसे शिवापिथिकस का नाम दिया गया जो 1.5 मीटर का था।
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शिवापिथिकस ऑरेंगउटान के काफी करीब था। यह चिंपांजी जैसा था लेकिन उसका चेहरा एक ऑरेंगउटान जैसा था। ऐसा माना गया है कि जब एप और मानव के बीच की कड़ी का जन्म हो रहा था, उस समय उसका ज्यादा समय जमीन पर ही बीतता था। यह फॉसिल 12.5 लाख साल से 10.5 लाख साल पुराना का है।
दो लाख साल पहले के हथियार मिले थे:
होशियारपुर के पास तखड़ी गांव में चंडीगढ़ के आर्कियोलॉजिस्ट केके ऋषि को नॉर्थ इंडिया में पहली बार नुकीले हथियार मिले थे। केके ऋषि ने कहा कि यह स्टोंस टूल की एक वैरायटी है।
उनको कुल 108 टूल्स मिले थे। उन्होंने कहा कि यह टूल्स, एप व मानव के बीच की कड़ी और अब बीस लाख साल पहले के जीवाश्म का मिलना एक से दूसरी कड़ी को बांधते हैं।
बदल सकती है थ्योरी:
अब तक ऐसा माना जा रहा था कि एप से मानव बनने की प्रक्रिया सबसे पहले अफ्रीका में हुई और वहीं से यह मानव अन्य जगह और शिवालिक की तरफ आया। लेकिन अब अफ्रीका में मिले जीवाश्म से भी पुराना जीवाश्म मिलने से पूरी थ्योरी ही बदल सकती है।
शिवालिक पहाड़ियों पर इस जीवाश्म के मिलने के बाद ऐसा माना जा रहा है कि भारत में इससे जुड़ी अन्य परतें भी खुलेंगी। चंडीगढ़ के पास मिले इस जीवाश्म पर कट का निशान मिला है। इससे इस संभावना को बल मिला है कि उस वक्त का इंसान औजार बना चुका था और वह शिकार करता था।