पीजीआई में जीवनरक्षक दवाओं की ‘इमरजेंसी’, मरीज परेशान, प्रशासन नहीं दे रहा ध्यान
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पीजीआई में इन दिनों जीवनरक्षक दवाओं की इमरजेंसी पड़ गई है। पीजीआई की इमरजेंसी में पिछले 15 दिनों से लगभग आधा दर्जन से ज्यादा महत्वपूर्ण दवाएं व इंजेक्शन की आपूर्ति ठप है। बार-बार मांग करने की बावजूद पीजीआई प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा। आपूर्ति न होने वाली दवाओं व इंजेक्शन में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण एंटी बायोटिक शामिल हैं, जिनके न देने से मरीज में संक्रमण नियंत्रित न होने पर मरीज की मौत हो सकती है।
पीजीआई के 100 बेड की इमरजेंसी बिल्डिंग में इन दिनों सभी बेड फुल हैं। लगभग डेढ़ सौ मरीजों को स्ट्रेचर पर भर्ती कर उनका इलाज किया जा रहा है। इन मरीजों में आयुष्मान भारत के लाभार्थी भी शामिल हैं। इमरजेंसी में भर्ती अन्य मरीजों के परिजनों का कहना है कि आयुष्मान के मरीजों को तो वे दवाएं लोकल पर्चेज करके दी जा रही हैं, लेकिन हमारे मरीजों के लिए कोई व्यवस्था नहीं है।
एंटीबायोटिक से लेकर गैस तक का इंजेक्शन यहां उपलब्ध नहीं हैं। मरीजों को बेहतर इलाज देने के नाम पर सरकार हर साल अरबों रुपये खर्च कर रही है लेकिन स्थिति बदतर है। वहीं पीजीआई के कर्मचारियों ने बताया कि दवाओं की कमी होना यहां के लिए सामान्य बात है। अपने मरीज की जान बचाने के लिए परिजन सरकारी दवा मिलने का इंतजार नहीं करते, जिसका लाभ दवा की दुकान वाले उठा रहे हैं।
इस दवाओं की आपूर्ति ठप
- लाइनजोलिड 600 एमजी- एंटीबायोटिक
- मन्निटोल 100 एमएल - डायरिया में
- एमिकासीन सल्फेट इंजेक्शन -एंटीबायोटिक
- लीग्नोकैन हाइड्रोक्लोराइड -लोकल एनेस्थिसिया
- ओरल रीहाइड्रेशन साल्ट -ओआरएस
- मेरोपेनेम इंजेक्शन -एंटीबायोटिक
- पैटाप्रोजाल इंजेक्शन - गैस के लिए
- वेनकोमाइसीन इंजेक्शन -एंटीबायोटिक
इमरजेंसी में दवाओं की आपूर्ति न होने संबंधी कोई सूचना अब तक मुझे नहीं मिली है। इसे चेक कराकर शीघ्र आपूर्ति सुनिश्चित कराई जाएगी। जहां तक दवाओं की कमी की बात है तो उसके लिए 24 घंटे लोकल पर्चेज की प्रक्रिया चलती है। -डॉ. अशोक कुमार, प्रवक्ता, पीजीआई