सुविधाओं का अभाव: कैसे निखरेंगी नई प्रतिभाएं, अभ्यास के लिए चंडीगढ़ के शूटर पटियाला और दिल्ली पर निर्भर
शूटिंग रेंज में सुविधाओं का अभाव होने के कारण बाहर जाने में सक्षम खिलाड़ी तो दिल्ली पटियाला जाकर प्रशिक्षण ले लेते हैं। बाकी खिलाड़ियों को पटियाला की राव शूटिंग रेंज के पुराने उपकरणों पर ही निर्भर रहना पड़ता है।
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चंडीगढ़ सेक्टर- 25 स्थित पटियाला की राव शूटिंग रेंज में बेहतर आधारभूत संरचना और आधुनिक सुविधा के अभाव में शहर की प्रतिभा निखर नहीं पा रही है। आलम यह है कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के निशानेबाजों को अभ्यास के लिए पटियाला-दिल्ली जाना पड़ रहा है। सक्षम खिलाड़ी तो प्रशिक्षण के लिए इन शहरों में चले जाते हैं, लेकिन बाकी खिलाड़ियों को इसी में काम चलाना पड़ रहा है। देश का प्रतिनिधित्व करने वाले शहर के खिलाड़ियों के लिए शूटिंग रेंज में स्कीट व ट्रैप की निशानेबाजी रेंज तक नहीं है।
इसी महीने पेरू की राजधानी लीमा में हुई आईएसएसएफ जूनियर विश्व शूटिंग चैंपियनशिप में शहर की स्टार शूटर गनीमत सेखों ने स्कीट निशानेबाजी स्पर्धा के टीम इवेंट में स्वर्ण पदक के साथ एकल वर्ग में रजत पदक जीता है। स्कीट की निशानेबाजी रेंज नहीं होने के कारण उन्हें अभ्यास के लिए सप्ताह में पांच दिन पटियाला जाना पड़ता है।
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शूटिंग रेंज में ये खेल होते हैं
पटियाला की राव स्थित शूटिंग रेंज में रेंज-1 में 10 मीटर की निशानेबाजी, रेंज-2 पर 25 मीटर की, रेंज-3 और 4 में 50 मीटर की और रेंज पांच में 300 बिग बोर और 50 मीटर थ्री पोजीशन (बैठकर, खड़े होकर, लेटकर) निशानेबाजी के खेल होते हैं। इन सभी निशानेबाजी रेंज में फिलहाल मैनुअल टारगेट हैं।
ये सुविधा नदारद
किसी में भी इलेक्ट्रॉनिक टारगेट नहीं है। वहीं, स्कीट और ट्रैप की रेंज यहां मौजूद नहीं हैं। इसके लिए खिलाड़ियाें को पटियाला और दिल्ली ही जाना पड़ता है।
कॉमनवेल्थ खेलों की मेजबानी मिलने से शुरू हुई थी हलचल
वर्ष 2022 जनवरी-फरवरी में चंडीगढ़ को कॉमनवेल्थ खेलों में शूटिंग की मेजबानी मिली थी। इसके मुकाबले सेक्टर- 25 की शूटिंग रेंज में कराए जाने थे। मेजबानी मिलने पर जोश के साथ इसे संवारने की तैयारियां शुरू हो गई थीं। लेकिन भारत में कोरोना के बढ़ते केसों की वजह से कॉमनवेल्थ गेम्स इंडिया ने कॉमनवेल्थ गेम्स फेडरेशन के सहयोग से शूटिंग मेजबानी को रद्द कर दिया। इसके बाद निर्माण कार्य सुस्त राह पर चल रहा हैं।
देश में इतनी बड़ी कहीं भी शूटिंग रेंज नहीं है, जिसमें एक समय में अलग-अलग रेंज में शूटिंग प्रतियोगिताएं कराई जा सकें। हम इसमें जल्द ही डिजिटल टारगेट लगाने जा रहे हैं। स्कीट और बोर की शूटिंग रेंज का भी इंतजाम होगा। यहां के खिलाड़ियों को बाहरी राज्यों में अभ्यास के लिए नहीं जाना पड़ेगा। आने वाले समय में ऐसा बेहतरीन संघीय ढांचा तैयार होगा जिससे यह देश की नंबर -1 शूटिंग बनेगी। -विजयपाल सिंह, सीनियर वाइस प्रेसीडेंट, चंडीगढ़ राइफल एसोसिएशन