हरियाणा: लापरवाही से बढ़ रहा जच्चा-बच्चा की जान को जोखिम, मरीजों के लिए बेड सहित डाॅक्टरों और स्टाफ नर्स की भी कमी
हरियाणा के अलग-अलग जिलों से लापरवाही के चलते जच्चा-बच्चा की मौत के मामले सामने आ रहे हैं। अस्पतालों में प्रसव के दौरान लापरवाही के मामले बढ़ते जा रहे हैं। अस्पतालों में मरीजों के लिए बेड, डाॅक्टरों और स्टाफ नर्स समेत संसाधनों की कमी भी इस रिस्क को बढ़ा रही है।
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हरियाणा के सरकारी अस्पतालों में प्रसव के दौरान लापरवाही के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इस कारण जच्चा और बच्चा की जान के लिए जोखिम लगातार बढ़ रहा है। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से लापरवाही के चलते जच्चा-बच्चा की मौत के मामले सामने आ रहे हैं। औसतन हर माह 10 से 15 शिकायतें विभाग के पास आ रही हैं। अस्पतालों में मरीजों के लिए बेड, डाॅक्टरों और स्टाफ नर्स समेत संसाधनों की कमी भी इस रिस्क को बढ़ा रही है।
आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में रोजाना करीब 1350 और औसतन हर माह 40 हजार बच्चे जन्म लेते हैं। प्रति एक हजार बच्चों के जन्म पर 30 बच्चों की जान चली जाती है। इसी प्रकार एक लाख माताओं में से 91 की मौत हो जाती है।
जिला अस्पतालों से लेकर मेडिकल काॅलेजों तक में प्रसूताओं के लिए बेडों की संख्या कम है और यहां दाखिल महिलाओं की संख्या अधिक है। गायनी विभाग में डाॅक्टरों की संख्या भी कम है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर को और कम करने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।
बढ़ रहे हैं लापरवाही के मामले
पिछले दिनों पानीपत के अग्रवाली मंडी निवासी ज्योति को वीरवार को प्रसव पीड़ा हुई तो उसे सिविल अस्पताल में दाखिल कराया गया। स्टाफ ने उसकी कोई मदद नहीं की और नवजात नीचे रखे डस्टबिन में गिर गया, जिससे उसकी मौत हो गई। 6 सितंबर को करनाल के मेडिकल कालेज में प्रसव के दौरान बच्चे की मौत हो गई थी। सभी मामलों में डाक्टरों पर लापरवाही के आरोप हैं। इसी प्रकार 6 जून को चरखीदादरी और हिसार में जच्चा-बच्चा की मौत की घटना सामने आई है।
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डाक्टर्स, नर्सों की संख्या कम
प्रदेश में कुल छोटे-बड़े 3294 सरकारी अस्पताल हैं। इसमें से बड़े अस्पताल 59, सीएचसी (सेकेंडरी हेल्थ सेंटर) 119, पीएचसी (प्राइमरी हेल्थ सेंटर) 486 और सब सेंटर 2630 हैं। स्वास्थ्य विभाग में कुल 23607 पद हैं। इनमें से 14561 पद भरे हुए हैं। खाली 9046 पदों में से सबसे अधिक स्टाफ नर्स के 2260, डॉक्टर के 980, एमपीएचडब्ल्यू के 552, फार्मासिस्ट के 366, लैब टेक्नीशियन के 711 और नर्सिंग सिस्टर के 228 पद काफी समय से खाली हैं।
विभाग की ओर से बेहतर सेवाएं दी जा रही हैं। कहीं भी कोई लापरवाही का मामला सामने आता है तो जांच के बाद कार्रवाई की जाती है। कोरोना काल में स्टाफ ने जिस प्रकार से सेवाएं दी हैं, वो सराहनीय रही हैं। -डाॅ. वीना सिंह, महानिदेशक, स्वास्थ्य विभाग।