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शिक्षण्ा से राजनीति तक सब जगह इसकी धाक

Sun, 10 Aug 2014 12:53 PM IST
राजेश शांडिल्य/अमर उजाला, कुरुक्षेत्र
राजेश शांडिल्य/अमर उजाला, कुरुक्षेत्र Updated Sun, 10 Aug 2014 12:53 PM IST
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Kurukshetra University Position Review in Politics

शिक्षण से राजनीतिक रण तक कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के कुलपति, कुलसचिव, शिक्षक और गैरशिक्षकों की धमक दिखती रही है। हरियाणा के बहुचर्चित शिक्षाविद् हरद्वारी लाल हों या केयू के कुलपति भीम सिंह दहिया और एमएल रंगा, इन्हें देवीलाल की पार्टी से टिकट देकर विधानसभा तक का रास्ता बनाया गया।

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केयू के उक्त तीन कुलपतियों में डॉ. दहिया केयू में अंग्रेजी विभाग के प्रोफेसर रह चुके हैं और उन्होंने शिक्षण के दौरान ही चुनाव लड़ा था। हालांकि केयू के इन तीन पूर्व कुलपतियों में हर्दवारी लाल ने देवीलाल की टिकट से पहले 1967 और 1968 में चुनाव लड़े और उन्होंने दूसरे में जीत हासिल की। इसके बाद देवीलाल ने हरद्वारी लाल को 1977 में टिकट दिया और वे बादली से विधायक चुने गए।
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तीन शिक्षक लड़ सकते हैं 2014 का विधानसभा चुनाव

Kurukshetra University Position Review in Politics

इस बार केयू के यूनिवर्सिटी कॉलेज कुरुक्षेत्र में कार्यरत शिक्षक रविंद्र सिंह को रतिया और डॉ. संतोष दहिया को बेरी विधानसभा क्षेत्र से इनेलो ने टिकटें देकर चुनाव मैदान में उतारा है। यहां रोचक पहलू ये है कि जिस क्षेत्र से डॉ. दहिया को चुनाव मैदान में उतारा गया है, वहां आज तक किसी भी राजनैतिक दल की महिला उम्मीदवार विनर या रनरअप नहीं रहीं।

इनेलो के ये दोनों उम्मीदवार जहां शिक्षण से अवकाश लेकर चुनावी क्षेत्र में पसीना बहा रहे हैं, वहीं केयू के उक्त कॉलेज में पढ़ाने वाले दूसरे शिक्षक डा. प्रदीप चौहान भी भाजपा से टिकट पाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं।

केयू शिक्षक संघ (कुटा) के पूर्व अध्यक्ष डा. प्रदीप चौहान, जहां कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता रहे, वहीं डा. चौहान पिछले दिनों बीजेपी ज्वाइन कर चुके हैं और भाजपा से टिकट पाने की कोशिश में जुटे हैं। केयू कुलसचिव डा. केेएस रल्हाण भी कांग्रेस की टिकट की जुगत में हैं, वे थानेसर विधानसभा सीट से टिकट पाने के इच्छुक हैं।

गुरु तो गुरु चेले भी कम नहीं

Kurukshetra University Position Review in Politics

केयू छात्र संघ के 1974 में अध्यक्ष रह चुके देवेंद्र शर्मा 1977 में थानेसर से विधायक चुने गए। जेपी आंदोलन में छात्र संघर्ष समिति के सदस्य रहे केयू के छात्र नेता रोशनलाल आर्य बाद में छछरौली से विधायक रहे। वहीं तीसरे छात्र नेता अजीत सिंह ने 1980 में हलका बेरी सेपहली बार उप चुनाव लड़े और जीत हासिल कर विधानसभा पहुंचे।

केयू के शेर सिंह गुट के नेता शेर सिंह बड़शामी 2009 में विधायक चुने गए। हालांकि इससे पहले बड़शामी इनेलो प्रदेशाध्यक्ष रह चुके थे और 2000 से 2005 तक हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला के राजनैतिक सलाहकार के पद पर रहे।

ये पूर्व वीसी हैं एमएलए, एमपी बनने के इंतजार में
रिटायर्ड आईएएस आरएस चौधरी पहली बार इनेलो सरकार के दौरान वर्ष 2000 से 2003 तक वायस चांसलर बने और इस समय वे इनेलो के राष्ट्रीय प्रवक्ता के पद पर हैं। वहीं आरएस चौधरी के बाछ केयू के कुलपति बने जींद के राजकीय कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. अविनाश चावला भी इस समय इनेलो बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ के प्रधान महासचिव पद पर हैं, जबकि केयू गैर शिक्षक कर्मचारी संघ के पूर्व अध्यक्ष बाबू राम गुप्ता एवं पूर्व महासचिव मदन गोपाल शर्मा भी इनेलो के पदाधिकारी हैं। 

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केयू के वर्तमान रजिस्ट्रार भी टिकट की दौड़ में

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डा. जेएस यादव का रहा असफल प्रयास
प्रख्यात पर्यावरणविद् एवं केयू के डीन रह चुके डा. जेएस यादव ने 1996 में सर्व जातीय पंचायत मंच के बैनर तले विधानसभा का चुनाव लड़ा, मगर वे सफल नहीं हुए। वे तीसरे नंबर पर रहे थे। कांग्रेसी नेता वीरेंद्र सिंह के करीबी रहे डा.जेएस यादव का दो साल पहले निधन हो चुका है और वे कुरुक्षेत्र में यादव समाज धर्मशाला के संस्थापक अध्यक्ष भी रहे।

पिछले वर्ष तक पूंडरी डीएवी कॉलेज शिक्षक रहे डॉ. केसी रल्हाण कांग्रेस बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक रहे और राजनीतिक प्रभाव से केयू के महत्वपूर्ण रजिस्ट्रार पद तक पहुंच चुके हैं। इनेलो से भाजपा और फिर इनेलो और बाद में कांग्रेस में शामिल हुए डा. रल्हाण को मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से नजदीकी होने के कारण पूरी उम्मीद है कि इस बार थानेसर विधानसभा की सीट उन्हें ही मिल सकती है। इसी के चलते डॉ. रल्हाण थानेसर विधानसभा क्षेत्र में जनसंपर्क अभियान भी शुरू कर चुके हैं।  

केयू के तीनों खंभों की राजनीतिक बिसात
शिक्षा में राजनीति नहीं, बल्कि राजनेताओं में शिक्षा का सबक लेते हुए केयू के तीनों खंभे प्रशासन, शिक्षक और गैर शिक्षक तीनों ही राजनीति की क्लास का अव्वल नंबर हासिल करने को आतुर हैं। इसी के चलते इन्होंने अपनी राजनीतिक बिसात बिछा दी है, ताकि राजनीति में वह धमाल कर सकें, जो शायद वे केयू में करने में असहज हैं।

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