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Hindi News ›   Chandigarh ›   Kurukshetra Geeta Festival: International Geeta Mahotsav starts today

गीता के 18 अध्यायों की तर्ज पर 18 दिन चलेगा गीता महोत्सव, खामियों के बीच आज शुभांरभ

Sat, 23 Nov 2019 01:34 AM IST
ajay kumar राजेश शांडिल्य, अमर उजाला, रोहतक (हरियाणा)
राजेश शांडिल्य, अमर उजाला, रोहतक (हरियाणा) Published by: ajay kumar Updated Sat, 23 Nov 2019 01:34 AM IST
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Kurukshetra Geeta Festival: International Geeta Mahotsav starts today
अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव। - फोटो : अमर उजाला

गीता के 18 अध्यायों की तर्ज पर यह महोत्सव भी पूरे 18 दिन तक चलेगा। अगर आप महोत्सव का आनंद उठाना चाहते हैं तो इसकी ब्रांडिंग को देख गुमराह न हों। आयोजकों ने इस आयोजन का शेड्यूल 23 नवंबर से 10 दिसंबर तक किया है और इस अंतरराष्ट्रीय महोत्सव की रौनक 10 दिसंबर तक बरकार होगी। 

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दरअसल आनन-फानन में हो रहे प्रबंध और आयोजकों ने इस अंतरराष्ट्रीय महोत्सव की ब्रांडिंग के लिये जिस एजेंसी को हायर किया है, उसने अनेक जगहों पर तारीखों में झोल पैदा कर दिया है। वैसे आयोजकों को अगले 10 साल क्या, भविष्य के 100 साल में होने वाली गीता जयंती की तारीखों को अगर आज पता करना हो तो चंद मिनटों में पता कर सकते हैं। जैसे 2019 में गीता जयंती 8 दिसंबर को मोक्षदायिनी एकादशी के दिन होगी।
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जाहिर है 2016 से गीता जयंती महोत्सव को अंतरराष्ट्रीय महोत्सव का दर्जा दिया जा चुका है। इस बार चौथा अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव आयोजित किया जा रहा है। इतने बड़े उत्सव की तैयारियां महीनों पहले शुरू हो जाती हैं। कुछ मामलों में तो सालभर पहले ही अगले गीता जयंती महोत्सव को लेकर आयोजक चौकस रहते होंगे। बावजूद इसके प्रबंधों में बार-बार झोल सामने आता है। हालांकि इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि आयोजक गीता महोत्सव को भव्य रूप में मनाने में किसी तरह से कम हैं। 

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क्षमता के अनुरूप तैयारियां और कार्यक्रम की रुपरेखा में आयोजकों की मेहनत दिखाई भी दे रही है। यकीनन इस बार भी गीता महोत्सव भव्य रुप में मनाया जाएगा। मगर हैरानी का विषय यह है कि इन सबके बावजूद कई चीजों को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस अंतरराष्ट्रीय उत्सव का आगाज आज 23 नवंबर से होने जा रहा है,जो कि तय शेड्यूल के अनुसार 10 दिसंबर को संपन्न होगा। 

सरकारी बसों से लेकर राष्ट्रीय राजमार्गों पर कुछ दिन पहले ही इस अंतरराष्ट्रीय महोत्सव के होर्डिंग एवं प्रचार सामग्री दिखाई भी देने लगी है। वहीं आयोजन स्थल से लेकर ब्रह्मसरोवर के इर्दगिर्द, शहर के मुख्य प्रवेश द्वारों और अन्य कई विशेष जगहों पर आयोजकों द्वारा मुख्य झलकियों की सुंदर तस्वीरों के साथ आयोजन की तारीखें भी प्रिंट की गई हैं, इन तारीखों में भी झोल दिखाई देता है। 

सरकार ने जिस एजेंसी को यह एंट्री गेट बनाने का टेंडर दिया था, उस के द्वारा तैयार किये गये इन सुंदर स्वागत द्वारों पर अगर नजर दौड़ाई जाए तो यहां आने वाले लोग इन्हें देखकर गुमराह हो सकते हैं, क्योंकि इसके कुछ हिस्सों पर अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव 23 नवंबर से 10 दिसंबर तक लिखा है, जबकि इसी के ऊपर 23 नवंबर से 9 दिसंबर तक प्रिंट हुआ है।       

आनन-फानन में मेले के प्रबंधों पर उठ रहे हैं सवाल

अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव से पहले ही पिछले कई दिनों से ब्रह्मसरोवर के आसपास काफी भीड़ रहने लगी है और  23 नवंबर से महोत्सव शुरू हो रहा है, इसके बाद भी 22 नवंबर को अर्जुन चौक सहित कई जगहों पर सड़क और फुटपाथ के पत्थरों का निर्माण जारी रहा।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह हालात सिर्फ इस बार ही नहीं, पिछले वर्षो में भी सामने आते रहे हैं, फिर चाहे इनेलो की चौटाला सरकार रही हो या फिर 2005 से 2014 तक हुड्डा की सरकार। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि आनन-फानन में इस तरह के विकास कार्य ज्यादा दिन तक नहीं टिक पाते और पब्लिक के पैसे की भी बर्बादी होती है। आयोजकों को चाहिये की समय रहते ऐसे प्रबंध करे। 

भक्ति गीत संगीत के क्षेत्र का नहीं होगा इस बार कोई बड़ा चेहरा
इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि इस बार आयोजकों ने कुमार विश्वास जैसे बड़े कवि,बॉलीवुड और अमीषा पटेल, गुरदास मान, दलेर मेहंदी, सतिंदर सरताज जैसे चेहरों को आमंत्रित किया है। जिनकी प्रस्तुति से भीड़ लामिजी खीचेंगी, मगर इन कलाकारों के बराबर या इनसे बड़ा चेहरा जो विशुद्ध रुप से भारतीय भक्ति गीत संगीत के क्षेत्र का विश्वविख्यात चेहरा हो वह 23 नवंबर से 10 दिसंबर तक गीता जयंती में आमंत्रित नहीं है। ऐसे चेहरों के अभाव में गीता महोत्सव में रौनक तो रहेगी, मगर इस महोत्सव को आयोजित करने का जो मकसद है, वो शायद पूरा नहीं होगा। 

आज तक नहीं मिली नेपाल की सहमति
अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में पड़ोसी देश नेपाल इस भव्य आयोजन में सहभागी होगा या नहीं ? इस पर चंद घंटे पहले तक भी सहमति नहीं मिली है। ऐसे में इस अंतरराष्ट्रीय महोत्सव में कंट्री पार्टनर इस बार कौन होगा?  यह बंदोबस्त अब तक नहीं हो सका। हालांकि शिल्प मेले में थाईलैंड के शिल्पकार जरूर नजर आएंगे। आयोजकों के अनुसार इनके तीन स्टालों का रजिस्ट्रेशन हो चुका है। 

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