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श्री राम मंदिर: कुमार विश्वास बोले- पिता की बात पर कभी टिप्पणी नहीं की, शंकराचार्य तो सनातन परंपरा के पितामह

Wed, 17 Jan 2024 01:20 AM IST
ajay kumar नीरज कुमार, संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
नीरज कुमार, संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Wed, 17 Jan 2024 01:20 AM IST
सार

चंडीगढ़ पहुंचे कवि कुमार विश्वास ने अयोध्या में श्रीराम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा पर छिड़ी बहस पर अपनी प्रतिक्रिया दी। इस दौरान उन्होंने भगवान श्री राम और सनातन परंपरा पर बेबाकी से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा का मजाक उड़ाने वाले सनातन में ही निहित विज्ञान का सहारा लेकर नए अनुसंधान कर रहे हैं।

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Kumar Vishwas said Never commented on father's words, Shankaracharya is pitamah of Sanatan tradition
चंडीगढ़ में राम कथा सुनाते कुमार विश्वास। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विख्यात कवि व राम कथावाचक डॉ. कुमार विश्वास ने अयोध्या में श्रीराम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर छिड़ी बहस और शंकराचार्यों के मत को लेकर कहा कि मैं उस घर में पैदा हुआ, जहां पिता की कही किसी बात पर कोई टिप्पणी नहीं करता, शंकराचार्य तो हमारी सनातन परंपरा के पितामह हैं। उन्होंने कहा कि कभी किसी से बहस नहीं करनी चाहिए। राममंदिर को लेकर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आया, जिसकी मैंने भी प्रतीक्षा की। कुमार विश्वास ने यह बात रामकथा से पहले मीडिया से विशेष बात में कही।

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कुमार विश्वास ने कहा कि सनातन परंपरा का मजाक उड़ाने वाले सनातन में ही निहित विज्ञान का सहारा लेकर नए अनुसंधान कर रहे हैं। अमेरिका की स्पेस एजेंसी नासा भी भारत की डिसअपीयरिंग थ्योरी का अध्ययन कर रही है, जिसमें देवता अंतर्ध्यान हो जाते थे। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी इस बात की साक्षी होगी, जब एक व्यक्ति एक स्थान से अंतर्ध्यान होकर दूसरी जगह दिखेगा। यह सब भारतीय पुरातन परंपरा में विद्यमान था। उन्होंने कहा कि राम के विषय में शंका का सवाल ही नहीं उठता। रामकथा में केवल भक्त बैठ सकते हैं विभक्त नहीं।
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कुमार विश्वास ने कहा कि एक बार मेरी बेटी ने संशय किया तो रामकथा शुरू कर दी। आज तक कई कविताएं लिखीं और पढ़ीं लेकिन जिह्वा और वाणी तब धन्य हुई जब रामकथा कही। उन्होंने कहा कि हिंदी से विमुख हो रही युवा पीढ़ी को हिंदी की ओर मोड़ने के लिए 10 से 15 वर्ष लगे। आज डिजिटल मंच हिंदी की गाथा गा रहा है।

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