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कोटकपूरा गोलीकांड में एसआईटी का बड़ा दावा- सिख संगत के खिलाफ पुलिस ने गढ़ी थी झूठी कहानी
Tue, 18 Jun 2019 10:36 AM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फरीदकोट(पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फरीदकोट(पंजाब)
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 18 Jun 2019 10:36 AM IST
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कोटकपूरा कांड
- फोटो : फाइल फोटो
बहिबल कलां व कोटकपूरा गोलीकांड की पड़ताल कर रही एसआईटी ने पुलिस द्वारा केस से जुड़े अहम तथ्य व सबूत नष्ट किए जाने का खुलासा किया है। इस आधार पर केस में कोटकपूरा के तत्कालीन डीएसपी बलजीत सिंह सिद्धू व थाना सिटी प्रभारी एसआई गुरदीप सिंह को नामजद किया गया है।
साथ ही एसआईटी ने पड़ताल में पाया है कि वारदात वाले दिन पुलिस की ओर से सिख संगत के खिलाफ झूठी कहानी गढ़ी गई और शांतिपूर्ण धरने पर बैठी संगत की अगुवाई कर रहे सिख प्रचारकों के खिलाफ झूठा व बेबुनियाद केस दर्ज किया गया था। ये सभी दावे एसआईटी ने कोटकपूरा गोलीकांड मामले में अदालत में दायर चार्जशीट में किए हैं।
कोटकपूरा कांड 14 अक्टूबर 2015 को हुआ था। इसमें पुलिस के बल उपयोग करने पर करीब 100 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। सिख संगत को जबरन उठवाने के बाद पुलिस ने अपने बचाव के लिए उल्टा सिख संगत पर ही केस दर्ज किया था। सरकार के आदेश पर गोलीकांड की जांच कर रही एसआईटी ने पुलिस की तरफ से प्रदर्शनकारियों पर दर्ज केसों की भी पड़ताल की गई।
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इसमें कोई सच्चाई नहीं मिली, बल्कि एसआईटी ने जांच में पाया कि पुलिस ने यह एफआईआर अपना बचाव करने के लिए दर्ज की थी, जिसमें न सिर्फ झूठे तथ्य शामिल किए गए, बल्कि पुलिस के खिलाफ गवाही भरने वाले सुबूतों को भी नष्ट कर दिया गया। इसके अलावा पुलिस की गोली व लाठी से घायल लोगों की एमएलआर जारी होने के बावजूद उनके बयान दर्ज करना जरूरी नहीं समझा गया।
पुलिस ने केस में जिन मुलाजिमों का जिक्र किया था कि उस दिन उनके द्वारा राउंड फायर किए गए थे। उनमें से चार मुलाजिमों ने एसआईटी को ब्यान दिया कि उन्होंने कोई फायर ही नहीं किए थे।
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साथ ही एसआईटी ने पड़ताल में पाया है कि वारदात वाले दिन पुलिस की ओर से सिख संगत के खिलाफ झूठी कहानी गढ़ी गई और शांतिपूर्ण धरने पर बैठी संगत की अगुवाई कर रहे सिख प्रचारकों के खिलाफ झूठा व बेबुनियाद केस दर्ज किया गया था। ये सभी दावे एसआईटी ने कोटकपूरा गोलीकांड मामले में अदालत में दायर चार्जशीट में किए हैं।
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कोटकपूरा कांड 14 अक्टूबर 2015 को हुआ था। इसमें पुलिस के बल उपयोग करने पर करीब 100 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। सिख संगत को जबरन उठवाने के बाद पुलिस ने अपने बचाव के लिए उल्टा सिख संगत पर ही केस दर्ज किया था। सरकार के आदेश पर गोलीकांड की जांच कर रही एसआईटी ने पुलिस की तरफ से प्रदर्शनकारियों पर दर्ज केसों की भी पड़ताल की गई।
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इसमें कोई सच्चाई नहीं मिली, बल्कि एसआईटी ने जांच में पाया कि पुलिस ने यह एफआईआर अपना बचाव करने के लिए दर्ज की थी, जिसमें न सिर्फ झूठे तथ्य शामिल किए गए, बल्कि पुलिस के खिलाफ गवाही भरने वाले सुबूतों को भी नष्ट कर दिया गया। इसके अलावा पुलिस की गोली व लाठी से घायल लोगों की एमएलआर जारी होने के बावजूद उनके बयान दर्ज करना जरूरी नहीं समझा गया।
पुलिस ने केस में जिन मुलाजिमों का जिक्र किया था कि उस दिन उनके द्वारा राउंड फायर किए गए थे। उनमें से चार मुलाजिमों ने एसआईटी को ब्यान दिया कि उन्होंने कोई फायर ही नहीं किए थे।
डेरा प्रमुख को माफी मामले में घिरा बादल परिवार
उधर, कोटकपूरा गोलीकांड मामले की चार्जशीट में एसआईटी ने तख्त श्री पटना साहिब के जत्थेदार रहे भाई इकबाल सिंह खालसा के 7 पेज के एक पत्र को भी शामिल किया था। इसमें भाई इकबाल सिंह खालसा का दावा है कि राम रहीम को 24 सितंबर 2015 को अकाल तख्त से माफी देने लिए उस समय के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने दबाव डाला था।
भाई इकबाल सिंह का दावा है कि उस दिन माफी देने के फैसले पर उनसे जबरन हस्ताक्षर कराए गए थे और डेरा प्रमुख के पत्र पर क्षमा याचना का शब्द भी बाद में शामिल किया गया। हालांकि बेअदबी व गोलीकांड की घटनाएं सामने आने के बाद 16 अक्टूबर 2015 को डेरा मुखी को माफी का फैसला वापिस ले लिया गया था।
मालूम हो कि एसआईटी द्वारा गोलीकांड की घटनाओं की जांच करने वाली एसआईटी द्वारा इन घटनाओं के पीछे डेरा सच्चा सौदा सिरसा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को श्री अकाल तख्त साहिब से मिले माफीनामे से जोड़ कर देखा जा रहा है। इसके लिए एसआईटी रोहतक की सुनारिया जेल में बंद डेरा प्रमुख से पूछताछ करने की कोशिशें भी कर रही है।
भाई इकबाल सिंह का दावा है कि उस दिन माफी देने के फैसले पर उनसे जबरन हस्ताक्षर कराए गए थे और डेरा प्रमुख के पत्र पर क्षमा याचना का शब्द भी बाद में शामिल किया गया। हालांकि बेअदबी व गोलीकांड की घटनाएं सामने आने के बाद 16 अक्टूबर 2015 को डेरा मुखी को माफी का फैसला वापिस ले लिया गया था।
मालूम हो कि एसआईटी द्वारा गोलीकांड की घटनाओं की जांच करने वाली एसआईटी द्वारा इन घटनाओं के पीछे डेरा सच्चा सौदा सिरसा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को श्री अकाल तख्त साहिब से मिले माफीनामे से जोड़ कर देखा जा रहा है। इसके लिए एसआईटी रोहतक की सुनारिया जेल में बंद डेरा प्रमुख से पूछताछ करने की कोशिशें भी कर रही है।
जमानत के लिए हाईकोर्ट पहुंचे एसपी बलजीत सिंह सिद्धू
उधर, कोटकपूरा गोलीकांड मामले में नामजद तत्कालीन डीएसपी कोटकपूरा व वर्तमान में एसपी फिरोजपुर बलजीत सिंह सिद्धू ने अग्रिम जमानत के लिए पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी है। केस में नामजद होने के बाद उन्होंने जिला और सेशन जज फरीदकोट की अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी।
इस याचिका को 13 जून 2019 को यहां के अतिरिक्त जिला व सेशन जज एचएस लेखी की अदालत में सुनवाई के दौरान खारिज कर दिया था। उन पर घटना वाले दिन से संबंधित सीसीटीवी फुटेज, वीडियोग्राफी समेत अन्य अहम सुबूत नष्ट करने के साथ घायल व्यक्तियों की एमएलआर पर कार्रवाई न करने के आरोप हैं।
इसके अलावा उन पर केस के मुख्य शिकायतकर्ता अजीत सिंह की गोली लगने के बावजूद पिटाई करने के भी गंभीर आरोप हैं, जिसकी एसआईटी के पास वीडियो फुटेज भी है।
इस याचिका को 13 जून 2019 को यहां के अतिरिक्त जिला व सेशन जज एचएस लेखी की अदालत में सुनवाई के दौरान खारिज कर दिया था। उन पर घटना वाले दिन से संबंधित सीसीटीवी फुटेज, वीडियोग्राफी समेत अन्य अहम सुबूत नष्ट करने के साथ घायल व्यक्तियों की एमएलआर पर कार्रवाई न करने के आरोप हैं।
इसके अलावा उन पर केस के मुख्य शिकायतकर्ता अजीत सिंह की गोली लगने के बावजूद पिटाई करने के भी गंभीर आरोप हैं, जिसकी एसआईटी के पास वीडियो फुटेज भी है।