{"_id":"571910674f1c1bcf4f8b4ad3","slug":"kohinoor-dimond-issue-congress-leader-surjewala-big-statement","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोहेनूर पर घमासान, कांग्रेस ने की इंग्लैंड से वापस लाने की मांग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोहेनूर पर घमासान, कांग्रेस ने की इंग्लैंड से वापस लाने की मांग
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 21 Apr 2016 11:10 PM IST
विज्ञापन
रणदीप सुरजेवाला, कांग्रेस प्रवक्ता
- फोटो : file photo
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सिख राज के कोहेनूर को इंग्लैंड से भारत लाने के मामले में कांग्रेस भी खुल कर सामने आ गई है। कांग्रेस ने कहा है कि हीरा वापस आ सकता है तो इसे भारत वापस लाया जाना चाहिए। 108 कैरेट का यह कोहेनूर इंग्लैंड की महारानी विक्टोरिया को महाराजा रणजीत सिंह के बेटे महाराजा दलीप सिंह ने भेंट किया था। एनजीओ ऑल इंडिया ह्यूमन राइट्स ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर करके हीरा वापस भारत लाने की मांग की है।
विज्ञापन
ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा है कि विदेशों में पड़ी भारत की जो धरोहरें वापस लाई जा सकती हैं, उन्हें लाया जाना चाहिए। कोहेनूर हीरा भारत लाने के लिए केंद्र सरकार को प्रयास करना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट में याचिका की सुनवाई अभी विचाराधीन है, लेकिन इससे पहले राजनीतिक दलों में श्रेय लेने की होड़ शुरू हो चुकी है।
विज्ञापन
केंद्र की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल रणजीत कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि ईस्ट इंडिया कंपनी यह हीरा स्वयं नहीं लेकर गई थी, बल्कि इसे सिख राज के आखिरी राजा महाराजा रणजीत सिंह ने स्वयं भेंट किया था। इसके बाद विवाद छिड़ गया था और केंद्र सरकार को स्थिति संभालते हुए यह कहना पड़ा था कि आपसी सहमति से हीरा भारत लाने का हर संभव प्रयास किया जाएगा।
विज्ञापन
इसी बीच बुधवार को पंजाब के उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल ने यहां तक कह दिया था कि महाराजा दलीप सिंह से यह हीरा हथिया लिया गया था। उन्होंने कहा था कि दलीप सिंह को ईसाई बनाया गया था और उन्होंने मजबूरी में यह हीरा महारानी विक्टोरिया को भेंट किया था। हालांकि सुखबीर ने कहा था कि इसमें कोई शक नहीं है कि कोहेनूर के मालिक महाराजा रणजीत सिंह थे।
सिख राज के आखिरी महाराजा दलीप सिंह थे और उस वक्त सिखों के संचालन के लिए कोई संस्था नहीं थी, लिहाजा अब एसजीपीसी सिखों का प्रतिनिधित्व कर रही है। ऐसे में सिख राज से जुड़ी धरोहरों पर एसजीपीसी का हक है। उन्होंने कहा था कि एसजीपीसी इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में केविएट दायर करेगी ताकि सिख राज से जुड़ी धरोहर पर फैसले से पहले सिखों का पक्ष भी सुना जाए। इसके अलावा उन्होंने एसजीपीसी की ओर से केंद्रीय विदेश मंत्री सुष्मा स्वराज को सुप्रीम कोर्ट में एसजीपीसी के पक्ष में पैरवी कराने के लिए भेंट करने की बात भी कही थी।
पाक और ईरान भी जता चुके हैं हक
1850 में अंग्रेजों ने एंग्लो सिख वार के बाद पंजाब में सिख राज पर नियंत्रण कर लिया था। अंतिम महाराजा दलीप सिंह ने तत्कालीन महारानी विक्टोरिया को यह हीरा भेंट किया था। इसे टावर ऑफ लंदन में कड़ी सुरक्षा के बीच रखा गया है। भारत के अलावा हीरे पर अफगानिस्तान, पाकिस्तान और ईरान भी अपना हक जताता आया है। भारत के स्वतंत्र होने के बाद से ही हीरे को लेकर राजनीति चली आ रही है। केंद्रीय सांस्कृतिक मंत्री ने यहां तक बयान दिया था कि 1956 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने कहा था कि दोनों देशों में संबंध अच्छे रहने चाहिए और जो वस्तु भेंट की जा चुकी है, उसे वापस लाने की इच्छा सही नहीं है।