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Anjum Modgil: मां ने पहली बार थमाई थी पिस्टल, अब दुनिया मान रही चंडीगढ़ की निशानेबाज के निशाने का लोहा
Mon, 05 Jun 2023 01:34 PM IST
निवेदिता वर्मा
संजीव पंगोत्रा, संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
संजीव पंगोत्रा, संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Mon, 05 Jun 2023 01:34 PM IST
सार
अंजुम की मां शुभ मोदगिल जब एनसीसी की ऑफिसर और निशानेबाज थीं तो उन्हें बचपन में अपने साथ सेक्टर-25 स्थित शूटिंग रेंज लेकर जाती थीं। मां को रेंज पर निशानेबाजी करते देख उन्हें भी इस खेल के प्रति लगाव हो गया।
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अंजुम मोदगिल।
- फोटो : फाइल
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विस्तार
निशानेबाजी में देश को पहला ओलंपिक कोटा दिलाने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी हैं अंजुम मोदगिल। चंडीगढ़ की इस बेटी ने अपने शानदार खेल की बदौलत प्रतिष्ठित अर्जुन अवार्ड भी अपने नाम किया है। देश-विदेश में आयोजित प्रतियोगिताओं में वह ढेरों पुरस्कार जीत चुकी हैं, हालांकि यहां तक पहुंचने के लिए उन्हें कड़ी मेहनत करनी पड़ी।
अंजुम मोदगिल ने निशानेबाजी की प्राथमिक कोचिंग अपनी मां शुभ मोदगिल से ली। मां ने ही उन्हें हौसला दिया, जिसके बाद अंजुम ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। पहले राष्ट्रीय और फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। अंजुम ने चंडीगढ़ के सेक्टर-26 स्थित सेक्रेड हार्ट सीनियर सेकेंडरी स्कूल से पढ़ाई की, लेकिन उनकी रुचि शुरू से ही निशानेबाजी में थी, इसलिए स्कूली स्तर पर ही एनसीसी में शूटिंग का अभ्यास शुरू कर दिया। इसके बाद डीएवी कॉलेज से आर्ट्स में स्नातक और स्पोर्ट्स साइकोलॉजी में मास्टर्स की डिग्री हासिल की।
यह भी पढ़ें: PU में हिस्सेदारी: हरियाणा और पंजाब के सीएम के बीच नहीं बन पाई सहमति, अब तीन जुलाई को होगी बैठक
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अंजुम ने बताया कि उनकी मां शुभ मोदगिल जब एनसीसी की ऑफिसर और निशानेबाज थीं तो उन्हें बचपन में अपने साथ सेक्टर-25 स्थित शूटिंग रेंज लेकर जाती थीं। मां को रेंज पर निशानेबाजी करते देख उन्हें भी इस खेल के प्रति लगाव हो गया। जब वह आठवीं कक्षा में थीं तो उन्होंने स्कूल में एनसीसी ज्वाइन कर ली। शूटिंग के बारे में पहली जानकारी मां ने ही दी। उन्होंने ही निशाना लगाना सिखाया। शूटिंग की बारीकियों के बारे में बताया, जिसके बाद इस खेल में आगे बढ़ने की हिम्मत जागी।
ओलंपिक कोटा दिलाना सबसे यादगार पल
अंजुम मोदगिल ने बताया कि वर्ष 2018 में दक्षिण कोरिया के चांगवोन में इंटरनेशनल शूटिंग स्पोर्ट्स फेडरेशन विश्व चैंपियनशिप का आयोजन किया गया था, जिसमें उन्होंने 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में रजत पदक जीतने के साथ ही टोक्यो ओलंपिक कोटा हासिल किया था। इसके साथ ही महिला वर्ग में भारत को ओलंपिक में कोटा दिलाने वाली वह पहली भारतीय निशानेबाज बन गईं। उन्होंने कहा कि यह उनके जीवन का सबसे यादगार पल था।
ओलंपिक में पदक जीतना लक्ष्य
अंजुम ने बताया कि वह इन दिनों आगामी अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट की तैयारियों में जुटी हुई हूं। खुद को मानसिक रूप से मजबूत बनाने की भी ट्रेनिंग पर अधिक फोकस कर रही हूं ताकि आने वाले दिनों में एशियन गेम्स, वर्ल्ड चैंपियनशिप में बेहतर प्रदर्शन कर सकूं। उन्होंने बताया कि उनका बड़ा लक्ष्य अगले वर्ष होने वाले ओलंपिक गेम्स में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतना है।
अंजुम मोदगिल की उपलब्धियां
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अंजुम मोदगिल ने निशानेबाजी की प्राथमिक कोचिंग अपनी मां शुभ मोदगिल से ली। मां ने ही उन्हें हौसला दिया, जिसके बाद अंजुम ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। पहले राष्ट्रीय और फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। अंजुम ने चंडीगढ़ के सेक्टर-26 स्थित सेक्रेड हार्ट सीनियर सेकेंडरी स्कूल से पढ़ाई की, लेकिन उनकी रुचि शुरू से ही निशानेबाजी में थी, इसलिए स्कूली स्तर पर ही एनसीसी में शूटिंग का अभ्यास शुरू कर दिया। इसके बाद डीएवी कॉलेज से आर्ट्स में स्नातक और स्पोर्ट्स साइकोलॉजी में मास्टर्स की डिग्री हासिल की।
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अंजुम ने बताया कि उनकी मां शुभ मोदगिल जब एनसीसी की ऑफिसर और निशानेबाज थीं तो उन्हें बचपन में अपने साथ सेक्टर-25 स्थित शूटिंग रेंज लेकर जाती थीं। मां को रेंज पर निशानेबाजी करते देख उन्हें भी इस खेल के प्रति लगाव हो गया। जब वह आठवीं कक्षा में थीं तो उन्होंने स्कूल में एनसीसी ज्वाइन कर ली। शूटिंग के बारे में पहली जानकारी मां ने ही दी। उन्होंने ही निशाना लगाना सिखाया। शूटिंग की बारीकियों के बारे में बताया, जिसके बाद इस खेल में आगे बढ़ने की हिम्मत जागी।
ओलंपिक कोटा दिलाना सबसे यादगार पल
अंजुम मोदगिल ने बताया कि वर्ष 2018 में दक्षिण कोरिया के चांगवोन में इंटरनेशनल शूटिंग स्पोर्ट्स फेडरेशन विश्व चैंपियनशिप का आयोजन किया गया था, जिसमें उन्होंने 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में रजत पदक जीतने के साथ ही टोक्यो ओलंपिक कोटा हासिल किया था। इसके साथ ही महिला वर्ग में भारत को ओलंपिक में कोटा दिलाने वाली वह पहली भारतीय निशानेबाज बन गईं। उन्होंने कहा कि यह उनके जीवन का सबसे यादगार पल था।
ओलंपिक में पदक जीतना लक्ष्य
अंजुम ने बताया कि वह इन दिनों आगामी अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट की तैयारियों में जुटी हुई हूं। खुद को मानसिक रूप से मजबूत बनाने की भी ट्रेनिंग पर अधिक फोकस कर रही हूं ताकि आने वाले दिनों में एशियन गेम्स, वर्ल्ड चैंपियनशिप में बेहतर प्रदर्शन कर सकूं। उन्होंने बताया कि उनका बड़ा लक्ष्य अगले वर्ष होने वाले ओलंपिक गेम्स में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतना है।
अंजुम मोदगिल की उपलब्धियां
- 2016 विश्व कप, म्यूनिख में 9वां स्थान और विश्व विश्वविद्यालय चैम्पियनशिप में रजत पदक प्राप्त किया। दक्षिण एशियाई खेलों में भी स्वर्ण पदक जीता
- साल 2017 में उन्होंने 10 मीटर एयर राइफल सरदार सज्जन सिंह सेठी मेमोरियल मास्टर्स में रजत पदक जीता
- साल 2018 में उन्होंने मैक्सिको में आईएसएसएफ विश्व कप में महिलाओं की 50 मीटर राइफल थ्री पोजिशन स्पर्धा में रजत पदक जीता और राष्ट्रमंडल खेलों में 455.7 अंक हासिल कर रजत पदक हासिल किया
- 2019 में अंजुम ने महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल आईएसएसएफ रैंकिंग में दुनिया में नंबर-2 स्थान का प्राप्त कर महिलाओं की 50 मीटर 3पी में भारत की नंबर-1 शूटर बन गईं
- 2019 में अर्जुन पुरस्कार से नवाजा गया
- 2022 में कोरिया में शूटिंग चैंपियनशिप में 50 मीटर में कांस्य पदक जीता