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देखिए, चौटाला परिवार की चौथी पीढ़ी की सियासत
महेंद्र घणघस/अमर उजाला, सिरसा
Updated Wed, 17 Sep 2014 02:37 PM IST
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दादा चौधरी ओमप्रकाश चौटाला व ताऊ अजय सिंह चौटाला के जेल में जाने के बाद राजनीति की जिम्मेदारी संभालने की बारी आई तो पढ़ाई बीच में छोड़कर भाई दुष्यंत सिंह चौटाला व दिग्विजय के साथ कंधे से कंधा मिलाकर जनता के बीच उतर गए। लोकसभा चुनाव के दौरान शुरू राजनीतिक सफर इस विधानसभा चुनाव में बदस्तूर जारी है।
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जी हां हम बात कर रहे हैं चौधरी देवीलाल की चौथी पीढ़ी में सबसे कम उम्र के युवा नेता कर्ण चौटाला की। लोकसभा चुनाव के दौरान सिरसा लोक सभा क्षेत्र के प्रभारी बनाए गए कर्ण चौटाला ने अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभाया और जिले के नौ में से सात हलकों में न सिर्फ पार्टी को बढ़त दिलाई बल्कि सिरसा से लोकसभा प्रत्याशी चरणजीत सिंह रोड़ी को जीत भी दिलाई।
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युवा एवं ऊर्जावान इस युवक ने जीतोड़ मेहनत कर पार्टी के भरोसे से पर खरा उतर कर जनता में भी लोक प्रियता हासिल की। कर्ण चौटाला खुद कहते हैं कि जब उनके दादा ओमप्रकाश चौटाला व ताऊ अजय सिंह चौटाला को कोर्ट ने सजा सुनाई थी तो वह बीकॉम के विद्यार्थी थे लेकिन परिवार पर आए संकट को देखते हुए पढ़ाई से ज्यादा परिवार की मदद को बेहतर समझा।
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उन्होंने बताया कि मुझे 12 से 14 घंटे तक प्रचार करने के बाद किसी प्रकार की थकावट महसूस नहीं होती बल्कि जनता का समर्थन देख कर उत्साह होता है। उनका दावा है कि एक दिन में 12 से 15 गांवों का दौरा करते हैं। वह बताते हैं कि मेरा दिन सुबह सात बजे उठ कर एक कप चाय के साथ शुरू होता है। करीब आधे घंटे व्यायाम के बाद साढ़े आठ से नौ बजे के बीच नाश्ता करता हूं।
नाश्ते में हलका आहार ही लेता हूं नौ बजे के बाद बाहर आ जाता हूं। सबसे पहले बाहर से आए लोगों से मिलता हूं फिर चुनाव प्रचार में निकल पड़ता हूं। हर अगले दिन का दौरा पहले ही निर्धारित होता है। दिन का भोजन फील्ड में ही होता है। रात के नौ बजे के बाद घर लौटता हूं।
करीब एक घंटे तक लोगों से मिलने के बाद अंदर चले जाता हूं और पिता अभय सिंह चौटाला, भाई दुष्यंत चौटाला, दिग्विजय चौटाला के अलावा पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से फोन पर चर्चा करता हूं। कहीं जरूरत पड़ती है तो मार्ग दर्शन भी लेता हूं। उसके बाद रात का भोजन और फिर सो जाता हूं। नियमित छह से सात घंटे के नींद के बाद वे फिर से इसी दिनचर्या को दोहराते हैं।