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Kisan Andolan: आज चार घंटे ट्रेन रोकेंगे किसान, एमएसपी पर केंद्र का प्रस्ताव किया खारिज

Sun, 10 Mar 2024 10:01 AM IST
ajay kumar अमर उजाला/संवाद न्यूज एजेंसी, पटियाला/अमृतसर (पंजाब)
अमर उजाला/संवाद न्यूज एजेंसी, पटियाला/अमृतसर (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Sun, 10 Mar 2024 10:01 AM IST
सार

किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि हमने आज पूरे देश में 'रेल रोको' का आह्वान किया है। हम सभी किसानों, मजदूरों और आम लोगों से आग्रह करते हैं देश के लोग बड़ी संख्या में आज 'रेल रोको' में हमारा समर्थन करें। हम उन लोगों से भी आग्रह करते हैं, जो आज दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच ट्रेन यात्रा करना चाहते हैं, वे आज चार घंटे तक ऐसा न करें। लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। 

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Kisan Andolan News: Farmers will stop trains for four hours today
किसान आंदोलन। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एमएसपी की कानूनी गारंटी समेत विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलनरत किसान रविवार को पंजाब में 61 स्थानों पर दोपहर 12 बजे से शाम चार बजे तक ट्रेनें रोक कर प्रदर्शन करेंगे। वहीं हरियाणा में पांच जगह पर ट्रेनें रोकी जाएंगी। संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) के नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा कि रेल रोको आंदोलन का असर पंजाब के अलावा देश के बाकी राज्यों उत्तर प्रदेश, बिहार, केरल, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु व आंध्रप्रदेश में भी देखने को मिलेगा। 

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इन राज्यों में भी उनके समर्थन में कई किसान संगठनों ने रेल रोकने का फैसला लिया है। डल्लेवाल ने साफ किया कि फिलहाल शंभू व खन्नौरी बॉर्डरों पर बैठे किसान आगे नहीं बढ़ेंगे लेकिन लगातार इसी तरह से अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ रोष व्यक्त करते रहेंगे ताकि केंद्र सरकार पर दबाव बनाकर रखा जा सके। 
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उन्होंने कहा कि किसान संगठनों का मकसद ट्रैक्टर-ट्रालियों के साथ दिल्ली जाना नहीं है बल्कि शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करते हुए किसानों की लंबे समय से लटकी मांगों को हल कराना है। रेल रोको के बाद जल्द ही आगे के संघर्ष की रूपरेखा का एलान किया जाएगा।

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केंद्र का प्रस्ताव खारिज

भारतीय किसान मजदूर संघर्ष कमेटी ने केंद्र सरकार की ओर से पांच फसलों कपास, मक्का के अलावा अरहर, मसूर व उड़द की दालों पर पांच सालों के लिए एमएसपी की कानूनी गारंटी देने के फैसले को खारिज कर दिया है। अमृतसर में किसान देवीदासपुरा, मजीठा, रईया, कत्थूनंगल, जैंतीपुर, कोटला गुजरां, पंधेर फाटक और जहांगीर में रेल ट्रैक में धरना देंगे। भाकियू डल्लेवाल की ओर से गांव वल्ला के पास रेलवे फाटक पर रेल यातायात रोका जाएगा।

आंदोलनरत किसान जत्थेबंदियों ने केंद्र के फैसले को सिरे से किया रद्द

आंदोलनरत संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) और भारतीय किसान मजदूर संघर्ष कमेटी ने केंद्र सरकार की ओर से पांच फसलों कपास, मक्का के अलावा अरहर, मसूर व उड़द की दालों पर पांच सालों के लिए एमएसपी की कानूनी गारंटी देने के फैसले को सिरे से रद्द कर दिया है।

किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा है कि केंद्र सरकार का फैसला किसान संगठनों को मंजूर नहीं है। संगठनों की मांग के मुताबिक केंद्र की ओर से 23 फसलों पर एमएसपी की कानूनी गारंटी दी जाए। डल्लेवाल ने कहा कि सात लाख के करीब किसान आत्महत्याएं कर चुके हैं फिर भी केंद्र सरकार केवल पांच फसलों पर पांच सालों के लिए एमएसपी की कानूनी गारंटी देकर अपनी जिम्मेदारी से भाग रही है। 

डल्लेवाल ने कहा कि सरकार कहती है कि इससे खजाने पर अतिरिक्त बोझ पड़ जाएगा लेकिन यहां एक बड़ी बात यह है कि केंद्र एक लाख 38 हजार करोड़ का पाम ऑयल बाहर से मंगवा सकती है, पर किसानों को फसलों पर एमएसपी देने पर पौने दो लाख करोड़ रुपये खर्च नहीं कर सकती। जबकि पाम ऑयल एक तरह का जहर है, जो मानव सेहत के लिए बहुत खतरनाक है। ऐसे में लोगों को भी किसानों के साथ इस मामले में आगे आकर केंद्र सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद करनी चाहिए, क्योंकि जानकारी के मुताबिक सरकार इस साल पाम ऑयल के आयात में 29 फीसदी का इजाफा करने जा रही है। यही नहीं दालें भी बाहर से मंगवाई जा रही हैं।

इस मौके पर डल्लेवाल ने बताया कि रेल रोको आंदोलन के लिए पूरी तैयारियां हो चुकी हैं। पंजाब के सभी जिलों में कई जगहों पर रेलें रोकी जानी हैं। किसानों के समर्थन में ट्रक यूनियन भी आगे आया है। पंजाब के अलावा देश के अन्य कई राज्यों में किसानों की ओर से रविवार को रेलें रोकी जाएंगी। 

उन्होंने केंद्र से किसानों की सभी जायज मांगों को जल्द पूरा करने की मांग की, जिसमें खास तौर से एमएसपी की कानूनी गारंटी समेत कर्जा मुक्ति व भूमि अधिग्रहण कानून को लागू करने की मांग की। डल्लेवाल ने कहा कि केंद्र ने चार दौर की बैठकों में किसानों की इन मांगों को पूरा नहीं किया। इसके चलते मजबूरीवश किसानों को संघर्ष का रास्ता अपनाना पड़ रहा है। उन्होंने साफ किया कि जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी, आंदोलन जारी रहेगा, फिर चाहे इसमें कितना ही लंबा समय क्यों न लग जाए।

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