पीएम मोदी को प्रकाश सिंह बादल का पत्र, लिखा- इन कानूनों ने देश को गहरी उथल-पुथल में धकेला
पांच बार पंजाब के मुख्यमंत्री रह चुके प्रकाश सिंह बादल ने कहा कि प्रधानमंत्री उदारता दिखाएं और तीनों विवादास्पद किसान कानूनों को तुरंत रद्द करें। उन्होंने कहा कि पहले से दिए गए घावों के निशानों को ठीक होने में लंबा समय लगेगा। सोमवार शाम प्रधानमंत्री को लिखे चार पन्नों के पत्र में बादल ने कहा कि देश और सरकार को व्यापक विचार विमर्श व आम सहमति पर चलने की आवश्यकता है।
पिछले समय के दौरान विभाजनकारी और अस्थिरता पैदा करने वाले पलों में हमारी विफलता से छोड़े गए निशान को ठीक होने में लंबा समय लगेगा। बादल ने प्रधानमंत्री का ध्यान इस बात की तरफ दिलाया कि कैसे टकराव की राजनीति ने हमारे सामाजिक ताने-बाने को खंडित कर दिया है। उन्होंने कहा कि सलाह मशविरा, सहमति तथा सुलह ही किसी लोकतंत्र का आधार होते हैं। सलाह की प्रक्रिया के साथ ही आम सहमति हो सकती है और आम सहमति के साथ ही ऐसे टकराव से बचा जा सकता है।
बादल ने लिखा कि इन तीन कानूनों ने देश को गहरी उथल-पुथल में धकेल दिया है। इन कानूनों को वापस लेना चाहिए। यह मुद्दा सिर्फ किसानों का नहीं बल्कि इसका हमारे देश के समूचे आर्थिक स्वरूप पर भी असर पड़ा है। व्यापारी, दुकानदार, आढ़ती और श्रमिक भी इससे सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं।
हाल ही में लौटाया पद्म विभूषण
प्रकाश सिंह बादल ने हाल ही में किसानों के समर्थन में पद्म विभूषण सम्मान लौटाने का एलान किया था। इस दौरान बादल ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविद को तीन पन्नों की चिट्ठी लिखकर कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग की थी।
पद्म विभूषण लौटाते हुए पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने चिट्ठी में लिखा था कि मैं इतना गरीब हूं कि किसानों के लिए कुर्बान करने के लिए मेरे पास कुछ और नहीं है। मैं जो भी हूं किसानों की वजह से हूं। ऐसे में अगर किसानों का अपमान हो रहा है तो किसी तरह का सम्मान रखने का कोई फायदा नहीं है।
किसानों के साथ जिस तरह का धोखा किया गया है, उससे उन्हें काफी दुख पहुंचा है। किसानों के आंदोलन को जिस तरह से गलत नजरिए से पेश किया जा रहा है, वह उचित नहीं है। प्रकाश सिंह बादल को 2015 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था।
शिअद ने किसानों के भारत बंद को दिया समर्थन
शिअद अध्यक्ष सुखबीर बादल ने कार्यकर्ताओं के साथ-साथ पंजाबियों से अपील की है कि कृषि कानूनों को रद्द करवाने के लिए किसान संगठनों के साथ मिलकर काम करेंगे। उन्होंने केंद्र सरकार के खिलाफ अन्नदाता की लड़ाई बताते हुए कहा कि मुझे विश्वास है कि जन आंदोलन केंद्र को किसानों की मांगों के सामने झुकने के लिए मजबूर कर देगा।
Letter further says,"Three Acts in question that have pushed the country into deep turmoil must be withdrawn without making farmers & their families endure any more suffering in this biting cold. Issue doesn't concern farmers alone but affects entire economic fabric of country." https://t.co/TAyO5hoDi5
— ANI (@ANI) December 7, 2020