चुनावी राज्यों पर किसानों की नजर: बंगाल के बाद मिशन यूपी व उत्तराखंड की शुरुआत, मुजफ्फरनगर में होगी राष्ट्रीय महापंचायत
कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान बंगाल के बाद उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भाजपा के खिलाफ माहौल खड़ा करेंगे। संयुक्त किसान मोर्चा ने मिशन उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की शुरुआत कर दी। पांच सितंबर को मुजफ्फरनगर में राष्ट्रीय पंचायत होगी। इसके बाद उत्तर प्रदेश में 17 और उत्तराखंड में दो पंचायतों का मंडल स्तर पर आयोजन किया जाएगा। वहीं 26 जुलाई को किसान संगठन उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक सामान्य बैठक भी करेंगे।
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किसान मिशन उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड की शुरुआत मुजफ्फरनगर में राष्ट्रीय महापंचायत से करेंगे। यूपी व उत्तराखंड में 2022 में विधानसभा चुनावों को देखते हुए संयुक्त किसान मोर्चा ने यह फैसला लिया है और इन दोनों राज्यों में बताया जाएगा कि सरकार के फैसलों के कारण किसानों की किस तरह से हालत खराब है। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में पांच सितंबर को महापंचायत होगी और उसमें देशभर के किसान संगठनों के नेता शामिल होंगे।
संयुक्त किसान मोर्चा ने मिशन यूपी व उत्तराखंड को लेकर पूरी रणनीति तैयार की है, जिसके तहत दोनों राज्यों में आंदोलन चलाया जाएगा। इसके लिए भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत व युद्धवीर सिंह अग्रणी भूमिका में रहेंगे तो पंजाब व हरियाणा के किसान संगठन भी साथ खड़े दिखाई देंगे।
संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले मुजफ्फरनगर में पांच सितंबर को महापंचायत से पहले 25 अगस्त से सभी जिलों में बैठक शुरू की जाएगी। इसके साथ ही 26 जुलाई को लखनऊ में सामान्य कार्यक्रम होगा, जिसमें कृषि कानूनों के नुकसान व सरकार के किसानों के विरोध में लिए गए फैसलों के बारे में बताया जाएगा।
किसान नेताओं ने शुरुआती रणनीति में तय किया है कि सितंबर में महापंचायत करने के बाद अक्तूबर व नवंबर में उत्तर प्रदेश में 17 तो उत्तराखंड में दो पंचायतें की जाएंगी और इनमें से अधिकतर पंचायतों को मंडल स्तर पर किया जाएगा।
बंगाल से बड़ा होगा यूपी-उत्तराखंड में संयुक्त किसान मोर्चा का अभियान
संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने बंगाल में चुनाव के दौरान वहां जाकर भाजपा का विरोध भी किया था। इसके बाद से संयुक्त किसान मोर्चा को लगने लगा है कि चुनाव वाले राज्यों में भाजपा का विरोध करके बातचीत का रास्ता खोला जा सकता है। इसलिए यूपी व उत्तराखंड में अभियान शुरू करने का फैसला लिया गया है लेकिन संयुक्त किसान मोर्चा ने यह साफ कर दिया है कि यूपी व उत्तराखंड में किसानों का यह अभियान बंगाल के मुकाबले बड़ा होगा और उसे पूरी रणनीति के साथ चलाया जाएगा।
मिशन यूपी व उत्तराखंड को चलाने के लिए पूरी रणनीति तैयार हो चुकी है। अभी प्रथम चरण की रणनीति बनाई गई है और किसानों की मांग पूरी नहीं होती है तो यह मिशन यूपी व उत्तराखंड विधानसभा चुनाव तक चलता रहेगा। इसके लिए समय-समय पर रणनीति भी तय होती रहेगी। सरकार को हालात को देखते हुए किसानों की मांगों को मान लेना चाहिए। - युद्धवीर सिंह, सदस्य संयुक्त किसान मोर्चा।