किसान आंदोलन : दिल्ली घेरने की तैयारी, कॉरपोरेट घरानों के खिलाफ भी लड़ाई होगी तेज
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तीनों कृषि कानूनों पर सरकार का रुख देखते हुए आंदोलनकारी किसानों के तेवर भी तल्ख हो गए हैं। किसानों का यह गुस्सा सरकार की ओर से कानूनों में संशोधन के लिए प्रस्ताव आने के बाद और ज्यादा बढ़ गया है। किसान अब आंदोलन को बढ़ाने की रणनीति में जुट गए हैं।
सरकार के साथ-साथ किसानों ने कॉरपोरेट घरानों के खिलाफ भी लड़ाई तेज कर दी है। सबसे पहले एक नामी कंपनी का सिम पोर्ट कराने का अभियान चलाया जा रहा है। धरनारत किसानों का दावा है कि हजारों सिम पोर्ट कराने के लिए मैसेज भेजा गया है।
हरियाणा में नेशनल हाईवे-44 के सिंघु बॉर्डर पर किसानों ने पिछले 16 दिन से डेरा डाला हुआ है। सरकार से पहले कई दौर की बातचीत के बाद भी किसानों के तेवर ज्यादा तल्ख नहीं थे, लेकिन सरकार के संशोधन प्रस्ताव के बाद किसान नाराज हैं। किसान प्रतिनिधियों का कहना है कि सरकार आंदोलन व कृषि कानूनों के मुद्दे को लेकर अभी तक गंभीर नहीं है। सरकार को लगता है कि किसान कुछ दिन यहां बैठकर वापस चले जाएंगे, लेकिन किसान आखिर तक इस लड़ाई को लड़ेंगे।
किसानों ने दिल्ली को बाहर से घेरने के लिए सड़कों पर डेरा डाला हुआ है। वहीं अब सरकार का रुख देखकर दिल्ली में घुसने की तैयारी है। कॉरपोरेट घरानों के व्यापारिक व अन्य प्रतिष्ठानों के खिलाफ भी अभियान छेड़ दिया गया है। इनके अलावा टोल फ्री, नेशनल हाईवे जाम करने जैसी रणनीतियों पर भी काम किया जा रहा है। रेलवे ट्रैक पर धरने देने पर भी किसान विचार कर रहे हैं।
जो सिंघु बॉर्डर नहीं पहुंच सके, उनसे भी संपर्क साधने में जुटे किसान
किसान आंदोलन को तेज करने के लिए किसान प्रतिनिधि लगातार देशभर के अलग-अलग राज्यों में किसान नेताओं से बातचीत करने में लगे हैं। उनसे कहा जा रहा है कि अगर वह सिंघु बॉर्डर पर नहीं आ सकते हैं तो अपने यहां आंदोलन करते रहें। उन आंदोलन की वीडियो भी सोशल मीडिया पर डाली जाए।
सरकार ने प्रस्ताव भेजे थे, जिनमें कुछ नहीं था। सरकार कुछ देना नहीं चाहती है और वह हठधर्मिता पर अड़ी है। अब बातचीत बंद हो चुकी है। किसानों के आंदोलन को तेज करने की रणनीति तैयार हो रही है। इसके लिए पूरे देश को एकजुट होने की जरूरत है ताकि कॉरपोरेट घरानों से छुटकारा मिल सके। किसान केवल एक ही मांग कर रहा है कि कृषि कानूनों को रद्द करके एमएसपी गारंटी कानून बनाया जाए। - गुरनाम सिंह चढूनी, अध्यक्ष, भाकियू, हरियाणा
सरकार केवल खानापूर्ति कर रही है। वह किसानों की मांगों को गंभीरता से नहीं ले रही है। उन प्रस्ताव को खारिज करने के बाद आगे बातचीत बंद हो गई है। यह जरूर है कि सरकार आगे कोई प्रस्ताव देती है तो बातचीत शुरू की जाएगी। हमारी पहले भी यही मांग थी कि कृषि कानूनों को रद्द किया जाए और आगे भी यही मांग रहेगी। - दर्शनपाल, सदस्य, अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति