फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Kirpal Kazak awarded to sahitya akademi award for Punjabi

किरपाल कजाक को मिला साहित्य अकादमी पुरस्कार, प्रतिभा ऐसी कि 9वीं पास बने प्रोफेसर

Thu, 19 Dec 2019 01:29 AM IST
ajay kumar रिंपी गुप्ता, अमर उजाला, पटियाला (पंजाब)
रिंपी गुप्ता, अमर उजाला, पटियाला (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Thu, 19 Dec 2019 01:29 AM IST
विज्ञापन
Kirpal Kazak awarded to sahitya akademi award for Punjabi
कहानीकार प्रोफसर किरपाल कजाक

साहित्य अकादमी ने 2019 के पुरस्कारों की घोषणा कर दी है। इस बार पुरस्कार पाने वालों में पंजाब के 76 वर्षीय कहानीकार प्रोफसर किरपाल कजाक भी हैं। उन्हें यह पुरस्कार लघु कथा श्रेणी में पंजाबी के लिए दिया गया है। वे पाकिस्तान के शेखूपुरा में साल 1943 में एक गरीब परिवार में जन्मे थे। उनके पिता साधू सिंह पेशे से राजमिस्त्री थे। 

विज्ञापन


बंटवारे के बाद जब वे पटियाला आए तो परिवार के गुजारे के लिए किरपाल को साथ काम करने को कहा। इस पर वे नाराज होकर घर से भाग गए। उनका पढ़ाई में मन नहीं लगता था। उन्होंने सिर्फ नौवीं तक ही पढ़ाई की। घर से भागने बाद वे जेबकतरों, खानाबदोशों और देश के विभिन्न आदिवासी कबीलों के लोगों के साथ रहे। इस दौरान उन्हें उनके बारे में जानने का मौका मिला। इस बीच वे कभी घर आ जाते तो फिर दोबारा भाग जाते। यह सिलसिला लगभग 10 साल चला। वे इन सभी अनुभवों को कॉपी पर लिखते थे। 
विज्ञापन


वर्ष 1970 में पिता की मौत के बाद परिवार की जिम्मेदारी उन पर आई तो मजबूरन उन्हें कभी कारपेंटर का काम और कभी मजदूरी करनी पड़ी। लेकिन इसके साथ ही उन्होंने लिखना नहीं छोड़ा। एक बार वे अमृता प्रीतम से मिले और उनकी सलाह पर उन्होंने इन सभी को किताबों में ढालना शुरू किया। इस पर ऐसी रचनाएं सामने आईं कि सभी आश्चर्यचकित रह गए। उनकी प्रतिभा का लोहा मानते हुए नौवीं पास किरपाल कजाक को पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला ने प्रोफेसर नियुक्त कर दिया। 

विज्ञापन
विज्ञापन

जिंदगी जो सिखाती है, वह भी पढ़ाई है :

अमर उजाला से खास बातचीत करते हुए प्रोफेसर किरपाल कजाक ने कहा कि केवल किताबें-कॉपियों से पढ़ाई नहीं होती। जिंदगी जो सिखाती है या तजुर्बे देती है, वह भी पढ़ाई है। उन्होंने गुरबत में जीवन बिताते हुए अपनी कला को ऊपर ले जाने के लिए तपस्या की, साधना की। इसके अलावा उन्हें जीवन में कुछ अच्छे लोगों का भी साथ मिला। इसकी वजह से आज वह यह मुकाम हासिल कर पाए हैं। 

उन्होंने कहा कि साहित्य अकादमी पुरस्कार पाना उनके लिए बड़े गौरव की बात है। ऐसा लग रहा है कि आज तक जितनी भी मेहनत की, उसका फल मिल गया। उन्होंने कहा कि कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि वह लेखक बनेंगे। पिता राजमिस्त्री होने के साथ-साथ अरबी फारसी के विद्वान भी थे। पिता ने देखा कि पढ़ाई में उनकी रुचि नहीं है तो उन्होंने ही सबसे पहले साहित्यिक क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। 

33 से ज्यादा किताबें प्रकाशित 
किरपाल कजाक की 33 से ज्यादा पुस्तकें छप चुकी हैं। साथ ही पंजाबी यूनिवर्सिटी से प्रकाशित खोज पत्रिका के विशेष अंकों का भी उन्होंने संपादन किया है। बच्चों के लिए कहानियां लिखी हैं। उन्हें 2010 में परम साहित्य सत्कार सम्मान, 1984 में भाई वीर सिंह गलप पुरस्कार, 2016 में पंजाब सरकार की ओर से स्टेट अवार्ड, 1996 में पंजाबी रंगमंच पुरस्कार समेत अन्य कई अवार्ड मिले हैं। उन्होंने कई टेलीफिल्मों और डाक्युमेंट्री के लिए लेखन किया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed