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सबसे पहले इस व्यवस्था को बंद करेंगे खट्टर

Sun, 26 Oct 2014 01:18 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़/नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़/नई दिल्ली Updated Sun, 26 Oct 2014 01:18 PM IST
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Khattar will Close Firstly Job and Transfer Industry

रविवार को हरियाणा के पंचकूला में शपथ ले रही खट्टर सरकार राज्य में जड़ें जमा चुके नौकरी ओर ट्रांसफर उद्योग को सख्ती से साथ कुचलेगी।

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राज्य में भाजपा प्रभारी डॉ. अनिल जैन ने इस आशय का दावा करते हुए कहा कि नई सरकार के अपने कामकाज के तरीके से सूबे में बदलाव की बयार जल्द ही महसूस की जा सकेगी।
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उन्होंने ईमानदार और जनता के लिए प्रतिबद्घ सरकार देने का वादा करते हुए कहा कि नई सरकार अब तक की परिपाटी के अनुरूप धन्ना सेठों की नहीं जनता के हित में पूर्ण पारदर्शिता और ईमानदारी से काम करेगी।

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भ्रष्टाचार से सख्ती से निपटेंगे खट्टर

Khattar will Close Firstly Job and Transfer Industry

भाजपा प्रभारी डॉ. अनिल जैन ने बताया कि खट्टर सरकार खासतौर पर भ्रष्टाचार से सख्ती से निपटने के साथ साथ जनता की जरूरतों से सीधे तौर पर जुड़े बिजली, पानी और सड़क केमामले में नई सरकार तेजी से काम करेगी।

उल्लेखनीय है कि हरियाणा के गठन के करीब पांच दशक बाद भाजपा पहली बार अपने दम पर राज्य में रविवार को सरकार बनाने जा रही है। चुनाव जिताने में अहम भूमिका निभाने वाले जैन का पार्टी नेतृत्व ने सह प्रभारी से प्रभारी बना कर कद बढ़ाया है।

भाजपा पर बने जनता के विश्वास को कायर रखेंगे

Khattar will Close Firstly Job and Transfer Industry

‘अमर उजाला’ से खास बातचीत करते हुए जैन ने कहा कि हरियाणा में दशकों से भ्रष्टाचार का बोलबाला है। खासतौर पर राज्य की पूर्ववर्ती सरकारों ने नौकरी और स्थानांतरण को उद्योग बना दिया है।

भ्रष्टाचार से ऊबी जनता ने चूंकि भाजपा पर विश्वास व्यक्त किया है, इसलिए नई सरकार सबसे पहले नौकरशाही और राजनीति के घालमेल से तैयार किए गए नौकरी और स्थानांतरण उद्योग को सख्ती के साथ कुचलेगी। इसके अलावा भ्रष्टाचार के अन्य मामलों में भी नई सरकार बेहद सख्त रुख अपनाएगी।

सामंजस्य बिठाना बड़ी चुनौती

Khattar will Close Firstly Job and Transfer Industry

हरियाणा में मुख्यमंत्री पद की कुर्सी संभालते ही मनोहर लाल खट्टर के सामने एक नहीं, कई चुनौतियां होंगी। पहली बार विधायक के बाद सीएम बनने वाले खट्टर के सामने सबसे बड़ी चुनौती नान जाट नेता के तौर पर जातीय और सामाजिक संतुलन साधना होगा।

इस विधानसभा चुनाव में भूपेंद्र सिंह हुड्डा और ओम प्रकाश चौटाला जैसे दिग्गज जाट नेता सत्ता में नहीं आ सके हैं। राज्य की आबादी में करीब 23 फीसदी जाट हैं। उनके साथ सामंजस्य बिठाना बड़ी चुनौती होगी।

सभी क्षेत्रों का समान विकास करना चुनौती

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अब तक मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर सीमित क्षेत्र में विकास के आरोप लगे हैं। दक्षिण हरियाणा और सिरसा हिसार जैसे इलाकों ने हमेशा विकास की अनदेखी का रोना रोया है। विकास में हुई अनदेखी पर सबसे पहले कांग्रेस सरकार में आवाज उठाने वाले अहिरवाल के दिग्गज नेता राव इंद्रजीत रहे हैं।

अब वे भाजपा में केंद्रीय राज्य मंत्री हैं, लिहाजा अहिरवाल में समुचित विकास करवाना भी भाजपा की एक चुनौती होगी। भाजपा में मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार अब खट्टर की कैबिनेट का हिस्सा होंगे। मंत्रिमंडल में सामंजस्य बिठाना भी खट्टर की अहम जिम्मेदारी होगी।

हर तरफ से क्षत्रपों से घिरे खट्टर के सामने सरकार में सभी को साथ लेकर चलना और विकास के एजेंडे पर काम करना एक मुख्य मुद्दा है।

दिल्ली में इस समय भाजपा की सरकार है। अब हरियाणा में भी भाजपा सरकार है। पंजाब में अकाली भाजपा गठबंधन है। लिहाजा जल विवाद जैसे मुद्दे पर विपक्ष भाजपा को कटघरे में खड़ा करेगा।

खट्टर के सामने हैं ये चुनौतियां

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जाति आधारित राजनीति के प्रभाव में रहे हरियाणा प्रदेश में एक पंजाबी नेता के लिए मुख्यमंत्री पद पर चार सबसे चुनौतियां हैं।
1. राजनीतिक : खट्टर का बचपन भले ही रोहतक जैसे ठेठ हरियाणवी जिले में बीता हो, उन्हें जाट बहुल दक्षिणी हरियाणा के साथ-साथ जीटी रोड के किनारे बसे उत्तरी हरियाणा के लोगों की अपेक्षाओं पर भी खरा उतरना होगा।

2. प्रशासनिक :
चूंकि हुड्डा शासनकाल में सरकारी अधिकारियों पर क्षेत्रीय भेदभाव और मनमाने ढंग से काम करने के आरोप लगते रहे हैं।

3. आर्थिक :
निवर्तमान मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा जाते-जाते करीब 55 हजार करोड़ के विकास कार्यों, कर्मचारियों का ऐलान कर गए हैं लेकिन प्रदेश के खजाने में पैसा नहीं है।

4. विकास :
हुड्डा सरकार पर प्रदेश के एक खास हिस्से- रोहतक, झज्जर, सोनीपत का ही विकास करने के आरोप खुद कांग्रेसी भी लगाते रहे हैं। विधानसभा चुनाव में भाजपा को जनता का सबसे अधिक समर्थन भी बाकी प्रदेश से ही सर्वाधिक मिला है।

खट्टर के लिए सीएम बनने के बाद न सिर्फ भेदभाव रहित विकास का बीड़ा उठाना होगा, वहीं प्रदेश के खाली खजाने की भी चिंता करनी होगी।

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