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कठुआ मर्डर केस लड़ रहे वकील ने आतंकियों को लेकर किया चौंकाने वाला खुलासा, पढ़िए...

Wed, 26 Aug 2020 08:11 PM IST
ajay kumar मनन सैनी/अमर उजाला, गुरदासपुर(पंजाब)
मनन सैनी/अमर उजाला, गुरदासपुर(पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Wed, 26 Aug 2020 08:11 PM IST
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kathua murder case lawyer ashim sahani claim about terrorists
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : social media

कठुआ गैंगरेप व मर्डर केस लड़ रहे वकील असीम साहनी ने आतंकवादियों को लेकर बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया है, पढ़कर सैन्य अफसर दंग रह जाएंगे। वकील साहनी का दावा है कि आतंकी पंजाब के गुरदासपुर में सीमा से सटे गांव रसाना को आतंकी नया ठिकाना बनाने में लगे हैं।

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उनका दावा है कि गांव के कई लोगों ने संदिग्ध आतंकियों को इलाके में घूमते देखा है। लेकिन इस बेहद संवेदनशील सूचना को भी पुलिस हल्के में ले रही है। कठुआ कांड के एक आरोपी ने भी उन्हें बताया है कि 14 परिवारों के छोटे से गांव रसाना में गाय और ड्रग्स की तस्करी होती है और बार्डर पार करके पाकिस्तानी दहशतगर्द भी नाले के रास्ते यहां आते हैं।
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आसपास जंगल होने के नाते वे यहां आराम से छिप जाते हैं। संवाददाता ने इस बारे में एडीजीपी सिक्योरिटी से बात करनी चाही तो उन्होंने कुछ सुने बगैर एसएसपी से आगे बात करने को कह दिया। जबकि जेएंडके के डीजीपी एसपी वैद ने मामला कोर्ट में होने के चलते कोई भी टिप्पणी करने से इंकार कर दिया।
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वकील साहनी का आरोप है कि सरकार प्रायोजित आतंकवाद को बढ़ावा दे रही है। तभी तो ऐसे लोगों को सिक्योरिटी दी जा रही है जो कभी कोर्ट गए ही नहीं या फिर जिन पर खुद 307 के मामले चल रहे हैं।  जबकि कठुआ केस लेने के बाद जो सुरक्षा उनके पास बरसों से थी, उसे भी वापस ले लिया गया है। ऐसे में उनकी जान को खतरा है। जम्मू-कश्मीर सरकार हमें सपोर्ट नहीं कर रही है। जबकि उन्हें अभी बकरवाल समाज के कई गवाहों से जिरह करनी है और वे बवाल पैदा कर सकते हैं।

कठुआ रेप व हत्या के मामले में कई सवाल पूछने होते हैं, लेकिन इससे पहले ही धमकियों भरे फोन आ रहे हैं। मुझे सोशल मीडिया पर धमकाया जा रहा है कि तुम गुनाहगार हो, तुम्हारी टांगे काट देंगे। हकीकत भी यही है कि कूकर का प्रेशर सेशन जज पठानकोट की अदालत में बढ़ता है और उसकी सीटी कश्मीर में बजती है। दरअसल, बकरवाल समाज गर्मियों में कश्मीर चला जाता है। ऐसे में साहनी का मानना है कि केस पठानकोट में है तो वे सेफ फील कर रहे हैं। अगर यह केस जम्मू कश्मीर में होता तो उन्हें पत्थर मारकर ट्रक से उड़वा दिया जाता।


उन्होंने कहा कि 7 मई को सुप्रीम कोर्ट में गोपाल सुब्रहमण्यम ने स्टेट ऑफ जम्मू कश्मीर की तरफ से कहा था कि अगर किसी को खतरा होगा तो हम उनकी गारंटी लेते हैं। लेकिन अफसोस हमें अपनी पुलिस से है। कठुआ केस लेने के बाद जो सुरक्षा उनके पास बरसों से थी, उसे हटा लिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जम्मू कश्मीर पुलिस सब कुछ जानते हुए इस मामले में गलत उर्दू का अनुवाद पेश कर कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश कर रही है।

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