कठुआ सामूहिक दुष्कर्म व हत्याकांड में 10 जून को आएगा फैसला, जानिए शुरू से अब तक क्या हुआ
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कठुआ दुष्कर्म और हत्या मामले में बचाव पक्ष और अभियोजन पक्ष ने सोमवार अलग-अलग बयान दिए। बचाव पक्ष के वकील अंकुर के मुताबिक कठुआ दुष्कर्म मामले में 10 जून को फैसला सुनाया जाएगा। सोमवार को सेशन कोर्ट पठानकोट में दोनों पक्षों की बहस के साथ ही मामले का ट्रायल पूरा हो गया। कोर्ट ने एक सप्ताह के लिए फैसला सुरक्षित रखा है।
अब फैसला 10 जून को सुनाया जाएगा। जबकि सरकारी पक्ष का कहना है कि कोर्ट की कार्रवाई 4 जून को भी जारी रहेगी। इस दौरान अभियोजन पक्ष बचाव पक्ष की दलीलों का खंडन करेगा। अभियोजन पक्ष के मुताबिक न्यायाधीश ने फैसले के संबंध में कोई टिप्पणी नहीं की। 6 जून को क्लीयर होगा कि फैसला कब सुनाया जाना है।
बचाव पक्ष के वकील अंकुर शर्मा, विक्रम और मास्टर मोहन लाल ने बताया कि एक साल से पठानकोट सेशन कोर्ट में चल रहे कठुआ दुष्कर्म और हत्या मामले में पीड़ित और बचाव पक्ष की दलीलें, गवाह एवं अन्य कानूनी कार्रवाई पूरी को चुकी है। दुष्कर्म के आरोप में सात आरोपियों को लेकर कोर्ट दस जून को फैसला पेश करेगा।
न्यायाधीश डा. तेजविंद्र सिंह अब अगले सोमवार को केस का फैसला सुना सकते हैं। वकील अंकुर शर्मा ने बताया कि बहस हो चुकी है। आरोपी बनाए गए सभी सातों लोगों को झूठे केस में फंसाया गया है। जानकारी के मुताबिक मंगलवार को अभियोजन पक्ष मामले को लेकर रिवर्टल यानी संबंधित कागजी प्रक्रिया पेश करेगा।
सोमवार को करीब चार घंटे तक आरोपी प्रवेश कुमार के एडवोकेट अंकुर शर्मा, चंदन शर्मा और विक्रम ने अभियोजन पक्ष के वकीलों के साथ बहस की। बता दें, कठुआ दुष्कर्म मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर तक चर्चा में रहा है।
मामले में सांप्रदायिक रूप लेने पर इस केस को पठानकोट कोर्ट में शिफ्ट कर सुप्रीम कोर्ट ने विशेष न्यायाधीश की नियुक्ति की थी। तब से पिछले एक वर्ष से मामले की लगातार सुनवाई हो रही है। जबकि, आरोपियों की सुरक्षा को लेकर उन्हें गुरदासपुर की जेल में रखा गया है।
छुट्टियों के कारण 10 तक लटक सकता है फैसला
संभावना जताई जा रही है कि 4 को रिवर्टल के बाद 5 जून को ईद की छुट्टी रहेगी, इसके बाद 6 जून की सुनवाई के बाद 7 को शहीदी दिवस, 8 जून को दूसरा शनिवार और 9 को रविवार होने के चलते कोर्ट बंद रहेगा।
जम्मू के कठुआ में गांव रसाना की 8 साल की बच्ची 10 जनवरी 2018 को लापता हो गई थी। बच्ची को काफी तलाशने के बाद पिता ने 12 जनवरी को हीरानगर थाने में शिकायत दर्ज कराई। लापता होने के 7 दिनों बाद 17 जनवरी को जंगल में बच्ची की लाश क्षत-विक्षत हालत में मिली।
बच्ची अपने परिवार के साथ रहती थी। बच्ची खानाबदोश मुस्लिम समुदाय से थी। उस बकरवाल समुदाय से, जो कठुआ में अल्पसंख्यक है। बच्ची के साथ हुई हैवानियत के विरोध में परिजनों ने प्रदर्शन किया और हाईवे जाम कर दिया। 18 जनवरी को एक आरोपी का सुराग लगा और उसे दबोच लिया गया।
आरोपी से पूछताछ के बाद सभी आरोपियों का सुराग लग गया। मामले में आठ आरोपी हैं- मंदिर का संरक्षक सांझी राम, उसका बेटा विशाल और भतीजा, एसपीओ सुरेन्द्र कुमार, विशेष पुलिस अधिकारी दीपक खजूरिया, सब इंस्पेक्टर आनंद दत्ता, हेड कांस्टेबल तिलक राज और प्रवेश कुमार।
वकीलों ने इसका विरोध करते हुए 11 अप्रैल और 12 अप्रैल को पूरे जम्मू-कश्मीर का बंद बुलाया और वे कठुआ जिला जेल के बाहर लगातार प्रदर्शन करते रहे। पीड़ित परिवार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने यह मामला कठुआ अदालत से पठानकोट की सेशन कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया।
इन दिनों केस की सुनवाई पंजाब के पठानकोट में चल रही है। जिला एवं सत्र जज तेजविंदर सिंह इस मामले की सुनवाई कर रहे हैं। कोर्ट ने 8 जून 2018 को सात आरोपियों के खिलाफ दुष्कर्म और हत्या के आरोप तय किए थे। केस में कुल 221 गवाह बनाए गए हैं।
55वें गवाह के रूप में पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर पेश हुए। 56वें गवाह के रूप में फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी के एक्सपर्ट को पेश किया गया। जब से केस की सुनवाई शुरू हुई, तब से अब तक सभी तारीखों पर सुनवाई की वीडियोग्राफी कराई गई है। सातों आरोपी भी इस समय गुरदासपुर की जेल में रखे गए हैं।