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कठुआ सामूहिक दुष्कर्म: बचाव पक्ष ने आरोपियों को बताया बेकसूर, 10 दिनों में सुनाया जा सकता है फैसला
Thu, 30 May 2019 01:01 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पठानकोट(पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पठानकोट(पंजाब)
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 30 May 2019 01:01 PM IST
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फाइल फोटो
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बहुचर्चित कठुआ सामूहिक दुष्कर्म व हत्या मामले में बचाव पक्ष ने सातों आरोपियों को बेकसूर बताया है। वहीं अगले दस दिनों में केस का फैसला सुनाया जा सकता है। केस की सुनवाई इन दिनों पठानकोट की अदालत में चल रही है। बुधवार को हुई सुनवाई में बचाव पक्ष के वकीलों ने जांच करने वाली स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) की जांच पर सवाल उठाए हैं।
बुधवार दोपहर एक बजे शुरू हुई सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील एके साहनी और मोहित वर्मा ने बहस शुरू की। जानकारी देते हुए डिफेंस काउंसिल के वकील मास्टर मोहन लाल ने कोर्ट से बाहर निकलकर कहा कि एसआईटी और अभियोजन ने जो थ्योरी बनाई है, उसमें दम नजर नहीं आ रहा।
जांच रिपोर्ट में बताया गया कि एसएचओ ने पीड़िता के कपड़े धोए, लेकिन पूरे मामले का एक भी चश्मदीद गवाह अभियोजन पक्ष सामने नहीं ला पाया। एसआईटी अभी तक हादसे के असली मुजरिमों तक नहीं पहुंच पाई है।
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बुधवार दोपहर एक बजे शुरू हुई सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील एके साहनी और मोहित वर्मा ने बहस शुरू की। जानकारी देते हुए डिफेंस काउंसिल के वकील मास्टर मोहन लाल ने कोर्ट से बाहर निकलकर कहा कि एसआईटी और अभियोजन ने जो थ्योरी बनाई है, उसमें दम नजर नहीं आ रहा।
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जांच रिपोर्ट में बताया गया कि एसएचओ ने पीड़िता के कपड़े धोए, लेकिन पूरे मामले का एक भी चश्मदीद गवाह अभियोजन पक्ष सामने नहीं ला पाया। एसआईटी अभी तक हादसे के असली मुजरिमों तक नहीं पहुंच पाई है।
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चाहे सातों आरोपी छूट जाएं, लेकिन एक भी बेकसूर को सजा न मिले
मास्टर मोहल लाल ने कहा कि बच्ची से दुष्कर्म के बाद कत्ल किया गया, जिस पर हमें भी अफसोस है, लेकिन एसआईटी की निष्पक्ष जांच सवालों के घेरे में है। हमारी मंशा है कि चाहे सातों आरोपी छूट जाएं लेकिन एक भी बेकसूर को सजा नहीं मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बाकी कानून अपना काम करेगा। मास्टर मोहन लाल ने संभावना जताई कि 10 दिनों के भीतर मामले का फैसला सुनाया जा सकता है।
3 घंटे बहस के बाद टली बहस
जानकारी के मुताबिक, बचाव पक्ष के वकील एडवोकेट एके साहनी ने सरकारी वकील के साथ अपनी बहस शुरू की। करीब तीन घंटे अभियोजन पक्ष तथा बचाव पक्ष के बीच चली इस बहस के बाद आगामी सुनवाई को टाल दिया गया। वहीं दूसरी ओर एसपीओ सुरेंद्र कुमार के वकील मोहित वर्मा ने भी उनके बचाव में बहस शुरू कर दी है।
3 घंटे बहस के बाद टली बहस
जानकारी के मुताबिक, बचाव पक्ष के वकील एडवोकेट एके साहनी ने सरकारी वकील के साथ अपनी बहस शुरू की। करीब तीन घंटे अभियोजन पक्ष तथा बचाव पक्ष के बीच चली इस बहस के बाद आगामी सुनवाई को टाल दिया गया। वहीं दूसरी ओर एसपीओ सुरेंद्र कुमार के वकील मोहित वर्मा ने भी उनके बचाव में बहस शुरू कर दी है।
ये है मामला
जम्मू के कठुआ में 10 जनवरी 2018 को 8 साल की बच्ची लापता हो गई थी। 7 दिनों बाद उसकी लाश क्षत-विक्षत हालत में मिली। मामले में आठ आरोपी हैं- मंदिर का संरक्षक सांझी राम, उसका बेटा विशाल और भतीजा, एसपीओ सुरेन्द्र कुमार, विशेष पुलिस अधिकारी दीपक खजूरिया, सब इंस्पेक्टर आनंद दत्ता, हेड कांस्टेबल तिलक राज और प्रवेश कुमार।
बच्ची अपने परिवार के साथ रहती थी। बच्ची खानाबदोश मुस्लिम समुदाय से थी। उस बकरवाल समुदाय से, जो कठुआ में अल्पसंख्यक है। 10 जनवरी को घोड़ों को चराने के लिए आसपास के जंगलों में निकली बच्ची घर नहीं लौट पाई। बच्ची के पिता ने 12 जनवरी को हीरानगर थाने में शिकायत दर्ज कराई। 17 जनवरी को जंगल में बच्ची की लाश मिली।
उसके बाद जांच पड़ताल करके आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों के खिलाफ क्राइम ब्रांच ने चार्जशीट 10 अप्रैल को दाखिल की। इन दिनों केस की सुनवाई पंजाब के पठानकोट में चल रही है। जिला एवं सत्र जज तेजविंदर सिंह इस मामले की सुनवाई कर रहे हैं। पीड़ित परिवार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने यह मामला कठुआ अदालत से पठानकोट स्थानांतरित किया था।
कोर्ट ने 8 जून 2018 को सात आरोपियों के खिलाफ बलात्कार और हत्या के आरोप तय किए थे। केस में कुल 221 गवाह बनाए गए हैं। 55वें गवाह के रूप में पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर पेश हुए। 56वें गवाह के रूप में फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी के एक्सपर्ट को पेश किया गया।
बच्ची अपने परिवार के साथ रहती थी। बच्ची खानाबदोश मुस्लिम समुदाय से थी। उस बकरवाल समुदाय से, जो कठुआ में अल्पसंख्यक है। 10 जनवरी को घोड़ों को चराने के लिए आसपास के जंगलों में निकली बच्ची घर नहीं लौट पाई। बच्ची के पिता ने 12 जनवरी को हीरानगर थाने में शिकायत दर्ज कराई। 17 जनवरी को जंगल में बच्ची की लाश मिली।
उसके बाद जांच पड़ताल करके आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों के खिलाफ क्राइम ब्रांच ने चार्जशीट 10 अप्रैल को दाखिल की। इन दिनों केस की सुनवाई पंजाब के पठानकोट में चल रही है। जिला एवं सत्र जज तेजविंदर सिंह इस मामले की सुनवाई कर रहे हैं। पीड़ित परिवार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने यह मामला कठुआ अदालत से पठानकोट स्थानांतरित किया था।
कोर्ट ने 8 जून 2018 को सात आरोपियों के खिलाफ बलात्कार और हत्या के आरोप तय किए थे। केस में कुल 221 गवाह बनाए गए हैं। 55वें गवाह के रूप में पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर पेश हुए। 56वें गवाह के रूप में फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी के एक्सपर्ट को पेश किया गया।