हक के लिए जद्दोजहद: 1995 में हरियाणा सरकार ने ली थी कश्मीरी पंडितों की जमीन, अभी तक न पूरा हुआ वो वादा
बिगड़ते हालात के बीच कश्मीरी पंडितों ने 1989-90 में घाटी छोड़ने का फैसला लिया था। कश्मीर को छोड़कर जब वह हरियाणा के बहादुरगढ़ आए। जिसके बाद जमा पूंजी से 200-300 गज के प्लाट खरीदे। 1995 में हरियाणा सरकार ने जनहित के नाम पर जमीन अधिग्रहण करने का फैसला लिया था।
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कश्मीरी पंडितों के घाटी छोड़ने के बाद बहादुरगढ़ आए और जमापूंजी से प्लाट खरीदे, जिनका सरकार ने अधिग्रहण कर लिया। अधिग्रहण के बाद उनको अन्य स्थान पर भूमि देने का सरकार का वादा 30 साल बीत जाने के बाद भी पूरा नहीं हुआ है। अब कश्मीरी पंडितों ने इंसाफ के लिए हाईकोर्ट से गुहार लगाई है।
कश्मीरी पंडित एसोसिएशन ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए बताया कि मोती लाल खारू समेत अन्य कश्मीरी पंडितों ने बिगड़ते हालात के बीच 1989-90 में घाटी छोड़ने का फैसला लिया था। कश्मीर को छोड़कर जब वह हरियाणा के बहादुरगढ़ आए तो अपनी जमा पूंजी से 200-300 गज के प्लाट खरीदे। इसके बाद 1995 में हरियाणा सरकार ने कश्मीरी पंडितों की खरीदी हुई 10 एकड़ जमीन का जनहित के नाम पर अधिग्रहण करने का फैसला लिया था।
कश्मीरी पंडितों को अपने हक का इंतजार
कश्मीरी पंड़ित एसोसिएशन के निवेदन के बाद सरकार ने उन्हें सेक्टर दो में भूमि देने का निर्णय लिया। याची ने बताया कि इस भूमि का मालिकाना हक हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण का है और लगभग तीन दशक बीत जाने के बाद भी कश्मीरी पंडितों को अपने हक का इंतजार है।
प्लाट आवंटन की प्रक्रिया के दौरान आपत्तियां दर्ज की गई थीं
हरियाणा सरकार ने कहा कि प्लाट आवंटन की प्रक्रिया के दौरान कुछ आपत्तियां दर्ज की गई थीं। इसके अतिरिक्त कुछ कश्मीरी पंडितों के कोर्ट जाने के चलते मामला लटकता रहा। हाईकोर्ट ने अब इस मामले में अगली सुनवाई पर हरियाणा सरकार को जवाब सौंपने का आदेश दिया है।