हाइकोर्ट में आज पेश नहीं होंगे संत रामपाल
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सतलोक आश्रम के संत रामपाल सोमवार को हाईकोर्ट में पेश नहीं होंगे। जिला प्रशासन ने डॉक्टरों के दल से उनका री-मेडिकल करवाया है। इसमें सामने आया है कि वे चलने-फिरने में असमर्थ हैं और उन्हें 72 घंटे की चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है।
वहीं, पुलिस हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद दूसरे आरोपी व राष्ट्रीय समाज सेवक समिति के मुखी रामकंवर ढाका को गिरफ्तारी नहीं कर सकी है। पुलिस दावा कर रही है कि वह ढाका को रविवार देर रात तक गिरफ्तार कर सोमवार को हाईकोर्ट में पेश कर देगी।
लगातार दूसरे दिन भी हिसार-बरवाला रोड पर स्थित सतलोक आश्रम में हजारों की संख्या में संत के अनुयायी जुटे रहे। रविवार सुबह सैकड़ों महिलाएं-बच्चे और निजी ‘ब्लैक कमांडो’ आश्रम के गेट के बाहर तैनात रहे।
वहीं, संत की गिरफ्तारी के लिए विभिन्न जिलों की पुलिस और अर्ध सैनिक बलों की 35 टुकड़ियां हिसार की न्यू पुलिस लाइन में आदेशों का इंतजार करती रही।
हाईकोर्ट ने एक मामले में सतलोक आश्रम के प्रमुख संत रामपाल और रामकंवर ढाका के खिलाफ गैर जमानती वारंट निकाले हैं और प्रशासन को उन्हें 10 नवंबर को हाईकोर्ट में पेश करने के आदेश दिए हैं।
5 हार्ट स्पेशलिस्ट कर रहे संत का इलाज
आश्रम के प्रवक्ता राजकपूर सिंह ने कहा कि संत रामपाल के सीने में तेज दर्द है। अपोलो और चंडीगढ़ के अस्पताल सहित कुछ प्रमुख अस्पतालों से संत की जांच के लिए पांच हार्ट स्पेशलिस्ट की टीम आई हुई है।
उन्होंने कहा कि वे न्यायालय के आदेशों का सम्मान करते हैं, अगर संत रामपाल कोर्ट में पेश नहीं हो सके तो उनकी मेडिकल रिपोर्ट कोर्ट में समय पर पेश की जाएगी। उन्होंने कहा कि संत को बेड रेस्ट बताया गया है वे किसी हाल में सफर नहीं कर सकते।
संत रामपाल का जिला प्रशासन के चिकित्सीय दल ने री-मेडिकल किया है। मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार संत चलने-फिरने में भी असमर्थ हैं। पुलिस दूसरे आरोपी रामकंवर ढाका की गिरफ्तारी करने के प्रयास कर रही है। हो सकता है रविवार देर रात तक ढाका को गिरफ्तार कर लिया जाए।
- राजबीर सैनी, डीएसपी, बरवाला
यह था पूरा मामला
संत रामपाल को करौंथा आश्रम में हत्या के मामले को लेकर आठ अगस्त को हिसार कोर्ट में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से रोहतक कोर्ट में पेशी भुगतानी थी।
वे एक नंबर कोर्ट में हिसार पहुंचे। उनके कोर्ट पहुंचने की सूचना पर एक दिन पहले से ही उनके हजारों की संख्या में समर्थक शहर पहुंचने लगे।
कोर्ट परिसर को समर्थकों ने कब्जा लिया। वकीलों के साथ भी कहासुनी और धक्का-मुक्की हुई। इसका बार एसोसिएशन ने जमकर विरोध किया और दो दिन तक वर्क सस्पेंड रखा।
इसके बाद हाईकोर्ट ने संत रामपाल को पेशी पर हाईकोर्ट पहुंचने के निर्देश जारी किए थे। इस पर वे हाईकोर्ट नहीं पहुंचे तो कोर्ट ने उनकी गिफ्तारी के वारंट निकाल दिए।
गिरफ्तार कर पेश करने के निर्देश दिए थे कोर्ट ने
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने संत रामपाल और रामकंवर ढाका के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर सोमवार को पेश करने का निर्देश दिए थे।
सतलोक आश्रम के प्रमुख संत रामपाल और राष्ट्रीय समाज सेवक समिति (आरएसएसएस) मुखी रामकंवर ढाका को गत बुधवार को हाईकोर्ट में पेश होना था, लेकिन एक बार फिर बीमारी का बहाना बनाकर संत रामपाल पेश नहीं हुए। रामपाल का मेडिकल सर्टिफिकेट जारी करने वाले डॉ. हुड्डा बुधवार को हाईकोर्ट में पेश हुए। रामपाल के वकील ने कहा कि वह अस्वस्थ हैं।
इस वजह से अदालत में पेश नहीं हो सकते। ढाका के वकील ने बताया कि वह आ रहे थे, लेकिन समर्थकों ने रास्ते में रोक लिया। इस वजह से अदालत में पेश नहीं हो सके। बेंच ने सख्ती बरतते हुए रामपाल और ढाका के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिए।
रामपाल का पेशी पर न आने का मतलब अवमानना
एमिक्स क्यूरी सीनियर एडवोकेट अनुपम गुप्ता ने बेंच को राय दी कि रामपाल का पेशी पर न आना एक सुनियोजित और जानबूझ कर की गई अवमानना है। लिहाजा, रामपाल की जमानत रद्द की जानी चाहिए।
संत रामपाल के खिलाफ रोहतक अदालत में हत्या का केस चल रहा है। इसी मामले में उन्हें हाईकोर्ट ने जमानत दी थी। गुप्ता ने कहा कि जमानत का मतलब है कि अभियुक्त ट्रायल और केस से जुड़ी अन्य पेशियों पर पेश हो, लेकिन रामपाल पेश नहीं हो रहे। हाईकोर्ट ने रामपाल की जमानत के केस का रिकार्ड भी तलब कर लिया है।
जेल में डालने पर मांगी राय
बेंच ने एमिक्स क्यूरी से पूछा, क्या हाईकोर्ट रामपाल को सीधे जेल में डाल सकती है। अनुपम गुप्ता ने बेंच को बताया कि एक्ट के मुताबिक कोर्ट अवमानना कार्रवाई के दौरान किसी अभियुक्त को जेल में नहीं डाल सकती। सिर्फ उसकी मौजूदगी सुनिश्चित बनाने के लिए सख्त से सख्त कदम उठा सकती है।
एक्टिंग चीफ जस्टिस से मिला प्रतिनिधिमंडल
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में पेशी मुकम्मल होने के बाद पांच श्रद्धालुओं का प्रतिनिधिमंडल एक्टिंग चीफ जस्टिस से मिला। उनसे मिलकर बाहर आने के बाद प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि एक्टिंग चीफ जस्टिस से कहा गया है कि अवमानना कार्रवाई शुरू करना सही नहीं था।
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि 14 जुलाई को हिसार अदालत में वीडियो कांफ्रेंसिंग से सुनवाई के दौरान अदालत में आए एक एडवोकेट ने संत रामपाल से बदतमीजी की, जिससे श्रद्धालु भड़क उठे। प्रतिनिधिमंडल में शामिल श्रद्धालुओं ने आरोप लगाया कि उक्त वकील ने हिसार बार एसोसिएशन को एकत्र किया और हरियाणा में हड़ताल की।
इसके बाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के माध्यम से तत्कालीन चीफ जस्टिस से मिले। प्रतिनिधिमंडल का आरोप है कि संत रामपाल का पक्ष सुने बिना हाईकोर्ट में अवमानना कार्रवाई चलाई गई। श्रद्धालुओं ने बताया कि एसीजे ने कहा कि यह बात वह बेंच के समक्ष सुनवाई के दौरान रखें। फिलहाल, तुरंत चंडीगढ़ छोड़ दें।
एक माह में दर्ज हुए पांच केस
रोहतक स्थित गांव करौंथा स्थित सतलोक आश्रम पर कब्जे को लेकर आर्य समाज व रामपाल समर्थकों के बीच 2006 से विवाद चल रहा है। 18 फरवरी 2013 को सुप्रीम कोर्ट में याचिका खारिज होने के बाद 7 अप्रैल को जिला प्रशासन ने सतलोक आश्रम बंदी छोड़ भक्ति मुक्ति ट्रस्ट को सौंप दिया।
इसके विरोध में 9 अप्रैल को सैकड़ों लोग आश्रम के बाहर एकत्रित हो गए। इस संबंध में सदर पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ सरकारी ड्यूटी में बाधा डालने, रोड जाम व पथराव करने का केस दर्ज किया गया। इसके बाद 5 मई को पानीपत जिले के गांव अटावला निवासी अनिल ने शिकायत दी कि वह झज्जर गुरुकुल का छात्र है।
पानीपत से झज्जर जाते समय रोहतक रेलवे स्टेशन पर संत रामपाल के अनुयायियों ने पकड़ लिया और बंधक बनाकर सतलोक आश्रम में ले गए। वहां पर उसके साथ मारपीट की। इस संबंध में भी सदर थाने में केस दर्ज है।
आश्रम को लेकर हुई थी हिंसा
10 मई को हरियाणा गौशाला के मंत्री सर्व मित्र आर्य ने सिटी थाने में केस दर्ज कराया कि उसे अज्ञात नंबरों से धमकियां मिल रही हैं कि अगर सतलोक आश्रम खाली करने का प्रयास किया तो जान से मार देंगे। इस संबंध में सिटी थाने में केस दर्ज है। इसके बाद 12 मई को आश्रम को लेकर हुई हिंसा हुई।
इसमें गोली लगने से तीन लोगों की मौत हुई और तहसीलदार प्रमोद चहल, एसआई नरेंद्र सिंह सहित 113 से ज्यादा लोग घायल हुए। इस संबंध में सदर थाने में हत्या के प्रयास, आगजनी व तोडफ़ोड़ का केस दर्ज किया था। इसमें एक दर्जन आर्य समाजी नामजद हैं, लेकिन आचार्य बलदेव का नाम नहीं है।
क्या है करौंथा विवाद!
वर्ष 1999 में करौंथा में सतलोक आश्रम की स्थापना की गई थी। बाबा रामपाल इस आश्रम के प्रमुख हैं। पहली जून, 1999 से 7 जून, 1999 तक लगातार सप्ताह भर सत्संग हुआ। कुछ वर्ष तक सब सामान्य रहा, लेकिन फिर करौंथा और साथ लगते गांवों के लोगों खासकर आर्यसमाजियों ने रामपाल के प्रवचनों पर आपत्ति जताना शुरू कर दिया।
तब से चल रहे हैं तनावपूर्ण हालात
इसके बाद हालात तनावपूर्ण हो गए। 12 जुलाई, 2006 को रामपाल के अनुयायियों और आर्यसमाजियों में हुए खूनी टकराव में एक युवक की मौत हो गई थी। उस हिंसा के बाद संत रामपाल और उनके अनेक अनुयायियों को जेल जाना पड़ा था। तब प्रशासन की ओर से इस आश्रम को सील कर दिया गया था।
इस मुद्दे को लेकर 12 मई 2013 को फिर रामपाल के अनुयायियों और आर्यसमाजियों में टकराव हो गया। प्रदर्शन के दौरान भीड़ ने कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया। रोडवेज की दो बसों व एक एंबुलेंस को आग के हवाले कर दिया। शराब का ठेका फूंक डाला। पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। इसके बाद दोनों और से फायरिंग हुई।
हिंसा में कुल 114 लोग घायल हुए, इन घायलों में 61 पुलिसकर्मी और 53 प्रदर्शनकारी थे। गंभीर रूप से घायल में से पानीपत जिले के गांव शाहपुर निवासी संदीप नाम के अध्यापक और गांव करौंथा निवासी महिला प्रमिला देवी की मौत हो गई।
संत रामपाल पर हत्या का केस
सतलोक आश्रम के प्रमुख संत रामपाल पर वर्ष 2006 में हत्या का एक मुकद्मा दर्ज है। इस सिलसिले में वे करीब डेढ़ साल तक रोहतक जेल में भी रहे थे। बाद में उन्हें जमानत मिली।
रामपाल के अनुयायियों और आर्यसमाजियों के बीच करौंथा आश्रम को लेकर विवाद हो गया था। इस विवाद में सोनू नामक एक युवक की मौत हो गई थी जिसके बाद रामपाल को गिरफ्तार कर लिया गया था। इस दौरान रोहतक प्रशासन ने करौंथा आश्रम का कब्जा अपने हाथ में ले लिया।
बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद रामपाल को आश्रम का कब्जा मिला लेकिन एक बार फिर रामपाल समर्थकों और आर्यसमाजियों में विवाद हो गया। फिलहाल रामपाल अपनी सारी गतिविधियां हिसार के बरवाला स्थित सतलोक आश्रम से संचालित कर रहे हैं।