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कारगिल का योद्धा, जिसने शेर खान समेत चार पाकिस्तानियों को मारकर दिलाई थी जीत, अब मिला प्रमोशन
Mon, 29 Jul 2019 10:29 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 29 Jul 2019 10:29 PM IST
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एएसआई सतपाल सिंह
- फोटो : एएनआई
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा है कि उनकी सरकार युद्ध या शांति के समय बहादुरी पुरस्कार पाने वाले पंजाब के सेना और पुलिस के जवानों और अधिकारियों के लिए वन-रैंक तरक्की नीति पर विचार कर रही है।
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सोमवार को करगिल युद्ध के नायक सतपाल सिंह की कंधों पर सहायक सब इंस्पेक्टर (एएसआई) के तौर पर तरक्की के स्टार लगाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि ऐसा कोई भी अधिकारी या जवान पंजाब पुलिस में शामिल होने की इच्छा रखता है तो उसकी सेवाओं और बहादुरी को पूरी मान्यता दी जाएगी।
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खास बात यह भी है कि कैप्टन ने अपनी किताब ‘ए रिज टू फार-वार इन द करगिल हाईटस’ में भी सतपाल सिंह का जिक्र किया है। कैप्टन ने बीते शुक्रवार को वीर चक्र अवार्डी सतपाल सिंह को सीनियर कांस्टेबल के तौर पर तरक्की दे दी थी। सीनियर कांस्टेबल के रूप में सतपाल 26 जुलाई तक संगरूर जिले में ट्रैफिक कंट्रोल की ड्यूटी निभा रहे थे। सोमवार को उन्हें तरक्की के स्टार लगाने के समय डीजीपी दिनकर गुप्ता भी उपस्थित थे।
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कैप्टन ने कहा कि उनकी सरकार द्वारा बनाई जाने वाली नीति में अन्याय की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी जाएगी। इस नीति में रक्षा सेनाओं के जवानों के अलावा जेसीओ और एनसीओ समेत पुलिस बहादुरी अवॉर्ड विजेता शामिल किए जाएंगे।
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अकाली-भाजपा सरकार की भूल को सुधारा : कैप्टन
कैप्टन ने कहा कि उन्होंने तो पिछली अकाली-भाजपा सरकार द्वारा सतपाल की भर्ती के अवसर पर की गई भूल को ही सुधारा है क्योंकि अकाली-भाजपा सरकार ने इस सैनिक के महान योगदान को दरकिनार किया और जिस सत्कार का यह हकदार था, वह भी पिछली सरकार करने में नाकाम रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनको इस बारे में जानकारी नहीं थी और अब भी इस बहादुर सैनिक के लिए उन्होंने जो कुछ किया है, वह बहुत देर बाद की गई कार्रवाई है। उन्होंने कहा कि सतपाल को आज मिला हक उनकी वर्ष 2010 में हुई भर्ती के मौके ही मिल जाना चाहिए था।
सतपाल के हाथों मरे कर्नल को पाक ने दिया निशान-ए-हैदर, पंजाब ने सतपाल को बनाया कांस्टेबल
सतपाल सिंह (नंबर 2116 /एसजीआर) सेना में सेवा निभाने के बाद पंजाब पुलिस में भर्ती हो गए थे। विजय ऑपरेशन के दौरान सतपाल द्रास सेक्टर में तैनात थे। टाइगर हिल पर कब्जा करने वाली भारतीय सेना की मदद करने वाली टीम के सदस्य के तौर पर सतपाल ने नॉर्दन लाइट इनफैंट्री के कैप्टन कर्नल शेर खान और तीन अन्य को मौत के घाट उतार दिया था।
इसके बाद शेर खान को पाकिस्तान का सबसे बड़ा बहादुरी पुरस्कार निशान-ए-हैदर से सम्मानित किया गया और यह पुरस्कार भारतीय ब्रिगेड कमांडर की सिफारिश पर दिया गया था जिसने बर्फीली चोटियों पर उसके द्वारा दिखाई गई बहादुरी की पुष्टि की थी।