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हरियाणाः कांग्रेस विधायक करण दलाल ने विधानसभा स्पीकर को भेजा लीगल नोटिस

Mon, 08 Oct 2018 08:39 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 08 Oct 2018 08:39 PM IST
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Karan Dalal sent legal notice to assembly speaker
Congress MLA Karan Singh Dalal

हरियाणा विधानसभा के स्पीकर कंवर पाल को पलवल से कांग्रेस विधायक करण दलाल ने निलंबन के खिलाफ कानूनी नोटिस भेजा है। अपने वकील मोहन जैन के जरिए भेजे नोटिस में दलाल ने स्पीकर से निलंबन रद्द करने की मांग की है। उन्होंने नोटिस में स्पीकर के फैसले को गलत ठहराया है और निलंबन रद्द न करने पर हाईकोर्ट जाने की भी बात कही है। 

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दलाल ने स्पीकर से नोटिस के मार्फत यह भी जानना चाहा है कि उन्हें विधानसभा के किन रूल्स के तहत एक वर्ष के लिए निलंबित किया गया है। सोमवार को भेजे नोटिस का जवाब स्पीकर को एक माह के भीतर देना होगा। कांग्रेस विधायक करण दलाल ने कहा कि उनका निलंबन गलत है। विधानसभा के रूल्स में किसी भी सदस्य को एक वर्ष की अवधि के लिए निलंबित करने का अधिकार स्पीकर को नहीं है। 
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अधिकतम एक सत्र के लिए स्पीकर अपनी शक्तियों का प्रयोग कर विधानसभा सदस्य को निलंबित कर सकते हैं। सरकार के दबाव में उनके निलंबन का फैसला लिया गया। इसमें सभी नियमों को ताक पर रखा गया है। दलाल ने कहा कि जहां पर कानून बनते हैं अगर वहीं पर गलत निर्णय होंगे तो उसका ठीक संदेश नहीं जाएगा। शुरू से ही वह विधानसभा नियमों का हवाला देते हुए निलंबन रद्द करने की मांग करते आ रहे हैं।
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 विधानसभा स्पीकर के कोई भी निर्णय न लेने पर उन्हें कानून का सहारा लेना पड़ा है। स्पीकर को भेजे कानूनी नोटिस के साथ निलंबन के गलत फैसले की कॉपी वह राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, लोकसभा अध्यक्ष व उपाध्यक्ष को भी भेज रहे हैं। ताकि उन्हें पता चल सके कि किस तरह से गलत निर्णय किए जा रहे हैं। याद रहे कि बीते मानसून सत्र में कांग्रेस विधायक करण दलाल और नेता प्रतिपक्ष अभय चौटाला के बीच गर्मागर्मी हो गई थी। 


चौटाला व दलाल ने एक दूसरे को मारने के लिए जूते निकाल लिए थे। पूरे प्रकरण की शुरुआत दलाल की ओर से विधानसभा में गरीबों का राशन आधार लिंक न होने के कारण रोकने पर लाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर बहस के दौरान हुई थी। सरकार ने निलंबन प्रस्ताव लाकर दलाल को एक वर्ष के लिए निलंबित करा दिया था। जबकि पूरे प्रकरण के लिए निंदा प्रस्ताव भी पारित किया गया। दलाल तब से निलंबन रद्द करने की मांग कर रहे हैं। दलाल और चौटाला के बीच उसके बाद से टकराव और बढ़ा है। 

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