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कबड्डी की चकाचौंध में फुटबॉल को भूली राज्य सरकार
ब्यूरो, अमर उजाला/जालंधर
Updated Fri, 21 Nov 2014 10:41 PM IST
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कबड्डी की चकाचौंध में बादल सरकार सबसे पसंद किया जाने वाले खेल फुटबॉल को भूल गई है।
सूबे में फुटबॉल को प्रमोट करने के लिए कुछ नहीं किया जा रहा। दोआबा में स्पोर्ट्स विभाग के पास एक भी फुटबॉल ग्राउंड और कोच नहीं है। यह हालात तब हैं जबकि जालंधर स्पोर्ट्स इंडस्ट्री से 80 करोड़ रुपये की फुटबॉल का एक्सपोर्ट हो रहा है। पूरे भारत में 50 करोड़ और पंजाब में पांच करोड़ की फुटबॉल की घरेलू सेल होती है।
जालंधर से करीब 50 किलोमीटर की दूरी पर रूड़कां कलां की फुटबॉल अकादमी चल रही है, जिसमें छोटे बच्चों को ट्रेनिंग दी जाती है। इस अकादमी को प्राइवेट स्तर पर चलाया जा रहा है। इसके अलावा शहर में गुरु गोबिंद सिंह स्टेडियम में फुटबॉल का मैदान है, लेकिन इस पर सिर्फ कबड्डी मैच करवाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर दिए गए थे।
इसके बाद मैदान में स्पोर्ट्स विभाग की तरफ से कोई फुटबॉल का सेंटर नहीं चलाया जा रहा है। प्राइवेट स्तर पर चल रहे इन सभी मैदान खासतौर पर गुरु गोबिंद सिंह स्टेडियम में स्पोर्ट्स विभाग की तरफ से कोच तक उपलब्ध नहीं करवाया गया है। स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई) के फुटबाल कोच सुरिंदर को जालंधर में लगाया गया था, मगर अब उनका तबादला हुए करीब एक साल से ऊपर का समय हो चुका है।
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इस समय जालंधर स्पोर्ट्स विभाग के पास फुटबॉल का एक भी कोच नहीं है। रूड़का कलां अकादमी में पुलिस से डेपुटेशन पर मिले फुटबॉल कोच की ड्यूटी लगाई गई है। अकादमी ने खुद खिलाड़ियों को ट्रेनिंग देने के लिए एक दर्जन से ज्यादा कोच रखे हुए हैं। छोटे मैदानों में फुटबॉल खेलने वाले करीब 60 क्लब हैं, जो रजिस्टर्ड हैं।
खुद के सेंटर में अभ्यास करतीं है टीमें
जालंधर में कई स्थानों में फुटबॉल खेला जा रहा है, मगर इन खेल मैदानों में नए खिलाड़ियों को कोचिंग देने के लिए कोई सुविधा नहीं है। जालंधर में पंजाब पुलिस, बीएसएफ, फगवाड़ा स्थित जेसीटी समेत डीएवी कॉलेज और लायलपुर खालसा कॉलेज ने खुद की फुटबाल टीमें बना रखी है। यह सभी टीमें खुद के सेंटर में ही अभ्यास करती है। इन सेंटर में बाहरी युवाओं को आने की अनुमति नहीं है।
ध्यान दें तो निकल सकते हैं अच्छे खिलाड़ी
रत्तन ब्रदर्स के तिलक राज खिंदर ने कहा कि राज्य और केंद्र सरकार फुटबॉल की ओर ध्यान देती है, तो पंजाब से हॉकी की तरह ही कई बेहतरीन खिलाड़ी सामने आ सकते हैं। पंजाब में क्लब फुटबॉल का सबसे ज्यादा क्रेज है, लेकिन जालंधर में स्पोर्ट्स विभाग का एक भी फुटबाल मैदान नहीं है। वहीं पंजाब में 5 करोड़ रूपए के करीब फुटबाल की सेल हो रही है।
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सूबे में फुटबॉल को प्रमोट करने के लिए कुछ नहीं किया जा रहा। दोआबा में स्पोर्ट्स विभाग के पास एक भी फुटबॉल ग्राउंड और कोच नहीं है। यह हालात तब हैं जबकि जालंधर स्पोर्ट्स इंडस्ट्री से 80 करोड़ रुपये की फुटबॉल का एक्सपोर्ट हो रहा है। पूरे भारत में 50 करोड़ और पंजाब में पांच करोड़ की फुटबॉल की घरेलू सेल होती है।
जालंधर से करीब 50 किलोमीटर की दूरी पर रूड़कां कलां की फुटबॉल अकादमी चल रही है, जिसमें छोटे बच्चों को ट्रेनिंग दी जाती है। इस अकादमी को प्राइवेट स्तर पर चलाया जा रहा है। इसके अलावा शहर में गुरु गोबिंद सिंह स्टेडियम में फुटबॉल का मैदान है, लेकिन इस पर सिर्फ कबड्डी मैच करवाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर दिए गए थे।
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इसके बाद मैदान में स्पोर्ट्स विभाग की तरफ से कोई फुटबॉल का सेंटर नहीं चलाया जा रहा है। प्राइवेट स्तर पर चल रहे इन सभी मैदान खासतौर पर गुरु गोबिंद सिंह स्टेडियम में स्पोर्ट्स विभाग की तरफ से कोच तक उपलब्ध नहीं करवाया गया है। स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई) के फुटबाल कोच सुरिंदर को जालंधर में लगाया गया था, मगर अब उनका तबादला हुए करीब एक साल से ऊपर का समय हो चुका है।
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इस समय जालंधर स्पोर्ट्स विभाग के पास फुटबॉल का एक भी कोच नहीं है। रूड़का कलां अकादमी में पुलिस से डेपुटेशन पर मिले फुटबॉल कोच की ड्यूटी लगाई गई है। अकादमी ने खुद खिलाड़ियों को ट्रेनिंग देने के लिए एक दर्जन से ज्यादा कोच रखे हुए हैं। छोटे मैदानों में फुटबॉल खेलने वाले करीब 60 क्लब हैं, जो रजिस्टर्ड हैं।
खुद के सेंटर में अभ्यास करतीं है टीमें
जालंधर में कई स्थानों में फुटबॉल खेला जा रहा है, मगर इन खेल मैदानों में नए खिलाड़ियों को कोचिंग देने के लिए कोई सुविधा नहीं है। जालंधर में पंजाब पुलिस, बीएसएफ, फगवाड़ा स्थित जेसीटी समेत डीएवी कॉलेज और लायलपुर खालसा कॉलेज ने खुद की फुटबाल टीमें बना रखी है। यह सभी टीमें खुद के सेंटर में ही अभ्यास करती है। इन सेंटर में बाहरी युवाओं को आने की अनुमति नहीं है।
ध्यान दें तो निकल सकते हैं अच्छे खिलाड़ी
रत्तन ब्रदर्स के तिलक राज खिंदर ने कहा कि राज्य और केंद्र सरकार फुटबॉल की ओर ध्यान देती है, तो पंजाब से हॉकी की तरह ही कई बेहतरीन खिलाड़ी सामने आ सकते हैं। पंजाब में क्लब फुटबॉल का सबसे ज्यादा क्रेज है, लेकिन जालंधर में स्पोर्ट्स विभाग का एक भी फुटबाल मैदान नहीं है। वहीं पंजाब में 5 करोड़ रूपए के करीब फुटबाल की सेल हो रही है।