ज्योति मर्डर: 'आबरू' बचाने हाईकोर्ट जाएगी पुलिस
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ज्योति हत्याकांड में सभी 12 आरोपियों को बरी किए जाने से पंचकूला पुलिस काफी बदनामी हुई है। अब पुलिस इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देने पर विचार कर सकती है।
पुलिस की ओर से शुक्रवार को फैसले की प्रति के लिए आवेदन दे दिया गया। इसके सोमवार या मंगलवार को मिल जाने की उम्मीद है। पुलिस इस मामले में अब डिस्ट्रिक्ट अटार्नी सहित अन्य आला अधिकारियों से राय लेने के बाद इस मामले को हाइकोर्ट भी ले जा सकती है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक यह हाई प्रोफाइल ममला था, जिसमें पुलिस को काफी मेहनत करनी पड़ी, लेकिन नतीजा पुलिस की उम्मीदों के विपरीत रहा।
पुलिस अधिकारियों के बीच इस बात को लेकर भी चर्चा है कि इस मामले में जेसिका लाल हत्याकांड की तरह की नए सिरे से जांच हो सकती है और अगर जरूरत हुई तो अन्य एजेंसी की भी इस जांच में मदद ली जा सकती है। पुलिस अपनी साख बचाने के लिए अधिकारियों, कर्मियों की भूमिका सहित अन्य पहलुओं पर विचार विमर्श करने के बाद हाइकोर्ट भी इस मामले को लेकर जा सकती है।
अगर इस मामले में किसी पुलिस कर्मी की भूमिका को लेकर संदेह की स्थिति बनती है तो उसकी भी जांच की जाएगी। पुलिस आयुक्त अजय सिंघल के मुताबिक अब तक इस संबंध में आदेश की कॉपी नहीं मिली है, इसके बाद ही कोई कदम बढ़ाया जा सकता है।
जांच में वैज्ञानिक साक्ष्यों की अवहेलना
इस हाईप्रोफाइल केस में पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्यों की शुरू में ही उपेक्षा की। हत्या की जगह से मिले रक्त की डीएनए सैंपलिंग नहीं की गई। आरोपियों के पोलीग्राफ और नारको टेस्ट नहीं हो पाये।
पुलिस ने ज्योति की मौत और अंतिम समय की मारपीट की जो बात एफआईआर में रखी वह पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मैच नहीं करती थी।
पुलिस ने कोर्ट में मोबाइल से संपर्क में आए टॉवर की लोकेशन को मोबाइल लोकेशन बताया, जिससे यह अविश्वसनीय तथ्य पैदा हुआ कि छह मिनट में आरोपी घटनास्थल से अंबाला पहुंच गया।
असल में टावर से मोबाइल की दूरी और दिशा का उल्लेख होना चाहिए था। ऐसा जानबूझ कर किया गया या तकनीकी ज्ञान की कमी थी, यह जांच का विषय है।
चादर चढ़ाने निकले रामकुमार
मुख्य शिकायतकर्ता ज्योति के पिता बूटी राम और बहन ईशा के बयान एसआईटी गठित होने के बाद यानी घटना के करीब छह महीने बाद रिकार्ड किए गए।
वहीं उध्ार ज्योति हत्याकांड से बरी होने के बाद विधायक रामकुमार चौधरी हर मंदिर और दरगाह में शीश नवा रहे हैं। परिवार ने भी उनकी रिहाई की मन्नत मांगी थी। इसी वजह से शुक्रवार सुबह छह बजे रामकुमार आधा दर्जन गाड़ियों के काफिले में अपने परिवार के साथ राजस्थान के गंगानगर में बागड़ स्थित जाहरवीर श्री गोगा जी की दरगाह में चादर चढ़ाने के लिए रवाना हुए।
रामकुमार के साथ उनकी पत्नी कुलदीप कौर (निधि), बड़े भाई भजन चौधरी, उनकी पत्नी गुरनाम गौर, चौधरी मदन लाल और उनकी पत्नी भूपेंद्र कौर साथ हैं। रामकुमार ने घर से निकलने से पहले हरिपुर संडोली स्थित गोगा माड़ी मंदिर में भी माथा टेका।
विधायक के गांव संडोली में भी श्री गोगा जाहरवीर की स्थापना की गई है। ऐसी मान्यता है कि गोगा जाहरवीर से जो भी मन्नत मांगता है, वह जरूर पूरी होती है। गोगा जाहरवीर का बागड़ में ही असली स्थान है लेकिन लोगों ने अपनी सुविधा के लिए गांव में माड़ी बनाई है।