ज्योति मर्डरः सरकार से विधायक को बड़ी राहत
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ज्योति हत्याकांड के आरोप में न्यायिक हिरासत में चल रहे दून के विधायक राम कुमार चौधरी हिमाचल प्रदेश की 12वीं विधानसभा में एक भी दिन सदन की कार्यवाही में नहीं पहुंचे हैं।
प्रदेश की कांग्रेस सरकार चौधरी को लगातार छुट्टी मंजूर कर रही है। इसलिए भाजपा के विरोध के बावजूद चौधरी का विधायक पद गैरहाजिर रहने के बावजूद बचा रहेगा।
हिमाचल प्रदेश की 12वीं विधानसभा की पहली बैठक 8 जनवरी, 2014 को हुई थी। इस पहले सत्र में राम कुमार चौधरी को छोड़ अन्य विधायकों ने पद की शपथ ली। चौधरी को बाद में अदालत से शपथ लेने की अनुमति मिली थी।
आरोपियों का ज्योति से कोई लिंक नहीं था
बहुचर्चित ज्योति हत्याकांड में वीरवार को बचाव पक्ष के गवाहों ने बयान दर्ज कराए। इस दौरान बचाव पक्ष की तरफ से कोर्ट में कहा गया कि मौजूदा आरोपियों का ज्योति से कोई लिंक नहीं था, बल्कि सतपाल नाम का जो ड्राइवर आज तक पकड़ा नहीं गया, उसका ज्योति के साथ लिंक था।
यानी सारी बात सतपाल पर थोपने की कोशिश की गई। वहीं, मुख्य आरोपी रामकुमार चौधरी व अन्य आरोपियों के खिलाफ अभी तक जो सबूत हैं, बचाव पक्ष ने उसे दरकिनार करने की कोशिश की।
पुलिस के मुताबिक, वारदात वाले दिन पंचकूला में थे रामकुमार
पुलिस फोन रिकार्ड के मुताबिक कोर्ट में पहले ही दस्तावेज दे चुकी है कि रामकुमार चौधरी वारदात के वक्त पंचकूला में था। असली आईडी का फोन नंबर, फर्जी आईडी का फोन नंबर व ज्योति के नंबर के अलावा अन्य आरोपियों के नंबर भी साथ-साथ पंचकूला में चल रहे थे।
प्रापर्टी डीलर जसविंद्र के अलावा बचाव पक्ष से तीन अन्य लोगों ने भी अपने बयान दर्ज कराए। जसविंद्र ने कोर्ट में कहा कि वह रामकुमार चौधरी व बग्गा के साथ नालागढ़ में किसी जमीन के सौदे के लिए गया था।
वारदात वाले दिन ही उसने नालागढ़ में जमीन की रजिस्ट्री कराई थी। इसके बाद वह खुद विधायक को बद्दी में घर पर छोड़कर आया था।
प्रापर्टी डीलर ने कहा, वारदात के दिन साथ थे चौधरी
बहुचर्चित ज्योति हत्याकांड में सोमवार को एक नया मोड़ आ गया। बचाव पक्ष के एक गवाह प्रापर्टी डीलर ने कोर्ट में कहा कि वारदात वाले दिन रामकुमार चौधरी उसके साथ था।
उसने एक जमीन का सौदा किया और बाद में विधायक को उसने ही घर छोड़ा था। खास बात यह है कि प्रापर्टी डीलर कोर्ट में वह समय नहीं बता सका, जब उसने विधायक को घर छोड़ा था।
रामकुमार को नहीं जानते, पनाह देने की बात गलत
सोमवार को अपने बचाव में रामकुमार के भाई हरभजन चौधरी ने कहा कि रामकुमार को पनाह देने की बात गलत है। इस मामले में वह बेकसूर है।
वहीं, आरोपी पंकज भंडारी ने कहा कि वह न तो रामकुमार चौधरी को जानता है और न ही बब्लू कम्यूनिकेशन का मालिक है। अगर सिम फर्जी पते पर बेचे गए हैं, तो कंपनी को उन्हें बंद करना चाहिए था। अभी तक नंबर बंद नहीं हुए हैं।
दुकान पर काम करने वाले आशीष ने कहा कि वह रामकुमार व उसके ड्राइवर सतपाल को नहीं जानता। उसने इस नंबर के सिम भी नहीं बेचे हैं।
उधर, एयरटेल कंपनी के डिस्ट्रीब्यूटर सतीश कौशल ने कहा कि उसे एयरटेल कंपनी ने नियुक्त किया था। उसने आगे किसी रिटलेर को नियुक्त नहीं किया है। बब्लू कम्यूनिकेशन को भी एयरटेल ने ही नियुक्त किया है।
ये थे मुख्य गवाह और पुख्ता सबूत
ज्योति की बहन और पिता बूटी राम। ज्योति की बहन कोर्ट में बयान दे चुकी है कि ज्योति ने उसे बताया था कि रामकुमार चौधरी के साथ उसके संबंध हैं और दोनों शादी करेंगे। वहीं, बूटी राम ने भी कोर्ट में ज्योति और रामकुमार के रिश्ते के बारे में बताया था।
मोबाइल की लोकेशन
ज्योति, रामकुमार व अन्य आरोपियों के मोबाइल वारदात वाले दिन साथ चल रहे थे। टावर लोकेशन के डिकोडेड डाटा में भी साफ हो गया है कि चंडीगढ़ से पंचकूला तक किस-किस टावर पर कैसे-कैसे नंबर एक साथ चले। कौन किस टावर से कहां तक पहुंचा।
चंडीमंदिर टोल प्लाजा की डिटेल्स
इसमें स्पष्ट है कि वारदात वाली रात वह ट्रक पंचकूला में आया था, जिससे ज्योति का सिर कुचला गया था।
चौधरी के हस्ताक्षर
ज्योति का गर्भपात कराने के लिए मंजूरी फार्म पर साइन किए गए थे। ये साइन रामकुमार चौधरी के साइन थे, जो मैच हो चुके हैं।
ज्योति की कॉल डिटेल्स
हत्या के बाद डाटा डिलीट कर ज्योति के मोबाइल को फेंक दिया गया था। घग्गर नदी से मोबाइल रिकवर होने के बाद डाटा को रिट्राइव कराने पर पाया गया कि रामकुमार ने एक बार दो दिन में ज्योति को 40 फोन किए थे। ज्योति के मोबाइल से रामकुमार और उनकी पत्नी व एक जन्मदिन पार्टी की तस्वीरें भी रिट्राइव हो चुकी है।
एसएमएस
ज्योति के फोन से पुलिस को उसके नजदीकी दोस्त सिमी का पता चला। सिमी ने ज्योति को काफी एसएमएस कर रखे हैं। इनमें कुछ ऐसे एसएमएस हैं, जिनमें जिक्र है कि वह किसी और के लिए उसे छोड़ रही है। सिमी ने कोर्ट में बयान दिए हैं कि ज्योति ने उसे कहा था कि वह चौधरी के साथ है, जो उसकी काफी मदद करता है।
केस में अब तक ये हुआ
- 22 नवंबर 2012 को सेक्टर-21 में ज्योति का मिला था शव
- सेक्टर-5 थाने में अज्ञात के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज हुआ
- हिमाचल के कांग्रेसी नेता रामकुमार चौधरी का नाम केस में आया
- पुलिस ने कई बार रेड की, लेकिन चौधरी नदारद
- 8 जनवरी को चौधरी ने कोर्ट में सरेंडर किया, पुलिस ने लिया हिरासत में
- इसके बाद अन्य आरोपियों की गिरफ्तारियां हुई
- पुलिस ने चार्जशीट तैयार की, जिस पर 37 आब्जेक्शन लगे
- जांच अधिकारी को हटाकर तत्कालीन डीसीपी अश्विन शेणवी की अगुवाई में एसआईटी बनी
- फिर कोर्ट में नया चालान आया और ट्रायल शुरू हुआ। इस दौरान सप्लीमेंटरी चालान भी आते रहे।