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ज्योति हत्याकांड: हैंडराइटिंग रिपोर्ट में गड़बड़
अमर उजाला, पंचकूला
Updated Thu, 14 Nov 2013 10:33 AM IST
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ज्योति हत्याकांड में मुख्य आरोपी विधायक रामकुमार चौधरी की हैंडराइटिंग रिपोर्ट में काफी झोल है। कहीं हैंडराइटिंग मैच है तो कहीं अनमैच। यह रिपोर्ट हाल में ही पंचकूला पुलिस को फोरेंसिक साइंस लेबोरेट्री से मिली है।
वारदात की जांच के दौरान रिकवर हुए कुछ दस्तावेज पुलिस ने मिलान के लिए भेजे थे। पुलिस ने एफएसएल की रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल कर दी है।
ज्योति का गर्भपात कराने के लिए नर्सिंग होम में जो फार्म भरा गया था, उस पर रमेश कुमार शर्मा के संक्षिप्त हस्ताक्षर थे। इस फार्म को जांच के लिए भेजा गया था।
इसके अलावा आईसीआईसीआई बैंक में पैसा जमा करने वाली पर्ची पर 10 फरवरी 2012 को हुए साइन, 13 जून 2012 को हुए बैंक पर्ची पर साइन, फिर 24 जुलाई 2012, 25 जुलाई 2012 और उसके बाद 30 जुलाई 2012 को बैंक में जमा हुए पैसों की पर्ची पुलिस ने कब्जे में लेकर लिखाई मिलान के लिए भेजी थी।
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साथ ही वह बर्थ डे विशिंग कार्ड भी भेजा था, जो ज्योति के पीजी वाले कमरे से रिकवर हुआ था। इन सभी दस्तावेजों की हुई जांच में कोई निष्कर्ष नहीं निकला।
दस्तावेजों की अलग-अलग लाइटिंग कंडीशन और अलग-अलग माइक्रोस्कोप से जांच हुई। कभी लिखाई का मिलान हो जाता था तो कभी नहीं हो पा रहा था।
एफएसएल की रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर कुछ और नमूने जांच के लिए भेजे जाएं तो उस पर कोई नतीजा निकाला जा सकता है। फिलहाल, पुलिस ने यह रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल कर दी है।
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वारदात की जांच के दौरान रिकवर हुए कुछ दस्तावेज पुलिस ने मिलान के लिए भेजे थे। पुलिस ने एफएसएल की रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल कर दी है।
ज्योति का गर्भपात कराने के लिए नर्सिंग होम में जो फार्म भरा गया था, उस पर रमेश कुमार शर्मा के संक्षिप्त हस्ताक्षर थे। इस फार्म को जांच के लिए भेजा गया था।
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इसके अलावा आईसीआईसीआई बैंक में पैसा जमा करने वाली पर्ची पर 10 फरवरी 2012 को हुए साइन, 13 जून 2012 को हुए बैंक पर्ची पर साइन, फिर 24 जुलाई 2012, 25 जुलाई 2012 और उसके बाद 30 जुलाई 2012 को बैंक में जमा हुए पैसों की पर्ची पुलिस ने कब्जे में लेकर लिखाई मिलान के लिए भेजी थी।
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साथ ही वह बर्थ डे विशिंग कार्ड भी भेजा था, जो ज्योति के पीजी वाले कमरे से रिकवर हुआ था। इन सभी दस्तावेजों की हुई जांच में कोई निष्कर्ष नहीं निकला।
दस्तावेजों की अलग-अलग लाइटिंग कंडीशन और अलग-अलग माइक्रोस्कोप से जांच हुई। कभी लिखाई का मिलान हो जाता था तो कभी नहीं हो पा रहा था।
एफएसएल की रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर कुछ और नमूने जांच के लिए भेजे जाएं तो उस पर कोई नतीजा निकाला जा सकता है। फिलहाल, पुलिस ने यह रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल कर दी है।